कोरोना के चलते युद्ध जैसे हालात, फिर भी सरकार की आधी-अधूरी तैयारी, सु्प्रीम कोर्ट में PIL दाखिल, सोमवार को सुनवाई

तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस की टेस्टिंग के लिए हमारे देश में पर्याप्त प्रयोगशालाएं तक नहीं हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट सरकार को तुंरत दिशानिर्देश जारी करे। इस बारे में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होगी।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने और इससे मुकाबले करने के लिए देश में पर्याप्त परीक्षण प्रयोगशालाएं नहीं हैं, ऐसे में सरकार को इन प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ानी चाहिए साथ ही आइसोलेशन और क्वेरंटान सेंटर की संख्या बढ़ाना चाहिए। मोदी सरकार से इन मांगों का आग्रह करने वाली एक जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिस पर कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि देश की विशाल जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए कोर्ट सरकार को पर्याप्त व्यवस्थाएं करने का निर्देश दे।

यह याचिका पत्रकार प्रशांत टंडन और सामाजिक कार्यकर्ता कुंजना सिंह ने दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि कोरोना वायरस के महासंकट के मद्देनजर सरकार अस्थाई अस्पताल स्थापित करे, सार्वजनिक स्थानों पर थर्मल स्क्रीनिंग और ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों के लिए ऐसी ही अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करे। याचिका में कहा गया है कि इस बीमारी के किसी भी संभावित फैलाव के लिए ऐसी व्यवस्था होना बेहद जरूरी हैं।

याचिका में कोविड-19 की भयावह प्रकृति को रेखांकित करते हुए याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि सिर्फ 4 महीने के अंदर ही यह वायरस दुनिया भर के कम से कम 152 देशों में फैल गया है और याचिका दायर करने की तिथि 15 मार्च तक इससे डेढ़ लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं और हजारों की मौत हो चुकी है। याचिका के मुताबिक भारत में इससे प्रभावित लोगों की संख्या 300 के आसपास पहुंच गई है और कम से कम 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। साथ ही कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन – WHO ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया है।

याचिका में भारत के साथ अन्य देशों की आबादी का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि भारत में संक्रमित मामलों की संख्या परीक्षण केंद्रों की अपर्याप्त संख्या के कारण कम दिखाई देती है, जो केवल 52 प्रयोगशालाओं पर निर्भर है। याचिका के मुताबिक 130 करोड़ की आबादी के मामले में यह संख्या बहुत कम है।

याचिका में आगे कहा गया है कि भारत को युद्ध स्तर की त्वरित तैयारियों की जरूरत है, क्योंकि कोई एक आम व्यक्ति अगर COVID -19 का वाहक है और भीड़ में बड़ी आबादी के संपर्क में आ रहा है, तो इसके अकल्पनीय परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला स्तर तक सुविधाओं का निर्माण करने की आवश्यकता है, ताकि देश के प्रत्येक जिले को इस बीमारी से लड़ने के लिए आत्मनिर्भर इकाई में बदला जा सके।

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि यह याचिका संविधान के "सुरक्षा के अधिकार" और "जीवन के स्वस्थ मानक के अधिकार" सिद्धांतों पर आधारित है जो संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 47 में उल्लिखित हैं। याचिका में कहा गया है, "स्वास्थ्य का अधिकार 'जीवन के अधिकार का एक अभिन्न अंग है और सरकार को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने का संवैधानिक दायित्व है।" याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह पीआईएल अधिवक्ता आशिमा मंडला और फुजैल अहमद अय्युबी ने दायर की है।

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