पीएम मोदी ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए, भारतीय हितों को थाली में परोसकर ट्रंप को दे दियाः पवन खेड़ा

कांग्रेस नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने अडानी-अंबानी के हितों के लिए भारत के आम नागरिकों के हितों को कुर्बान कर दिया है। अब आप कयास लगा सकते हैं कि ये डील क्यों की गई? अडानी को बचाने के लिए। अंबानी के हितों के लिए। एपस्टीन फाइल में अपना नाम दबाने के लिए।

पीएम मोदी ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए, भारतीय हितों को थाली में परोसकर ट्रंप को दे दियाः पवन खेड़ा
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस ने अमेरिका से ट्रेड डील पर मोदी सरकार को घेरते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ट्रेड डील को पीएम मोदी का सरेंडर बताते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं, ये देख किसी भी भारतीय को अच्छा नहीं लगेगा। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था, किसानी और हमारे हितों को हमारी ही थाली में परोसकर ट्रंप को दे दिया है।

पवन खेड़ा ने कहा कि हमारा जो शक था, वो अब साबित हो चुका है कि नरेंद्र मोदी डरे हुए हैं, compromised हैं। जिसे बीजेपी के लोग डील कह रहे हैं, आपको आने वाले समय में समझ आ जाएगा कि भारत को क्या-क्या नुकसान होने वाले हैं। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेस में जो लिस्ट पढ़ी, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण है जो छिपाया गया। हम उम्मीद करते हैं कि आप रोज किसानों, MSME के हित के सवाल सरकार से पूछेंगे।

पवन खेड़ा ने कहा कि आज मैंने देखा कि जब रूस से ऑइल खरीदने के विषय में सवाल पूछा गया, तो पीयूष गोयल ने कहा- ये विदेश मंत्री बताएंगे। विदेश मंत्री से अमेरिका में पूछा, तो वो बोले- ये तो कॉमर्स मिनिस्टर बताएंगे। फिर बीच में डोभाल जी कूद पड़े, बोले- मैंने जाकर अमेरिका को धमका दिया, हम नहीं झुकेंगे। तभी विदेश मंत्रालय सफाई देता है कि डोभाल जी ने किसी को नहीं धमकाया। ये ट्रेड डील इस देश के करोड़ों लोगों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है।


पवन खेड़ा ने कहा कि यह उन सभी चीज़ों के साथ धोखा है जिनके लिए भारत पिछले 75 सालों से खड़ा रहा है। यह भारत के हित में कोई डील नहीं है; यह नरेंद्र मोदी का पूरी तरह से सरेंडर है। उन्होंने कहा कि भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिका से $500 बिलियन के प्रोडक्ट खरीदने का वादा किया है, जबकि अमेरिका ने ऐसा कोई वादा नहीं किया है। हमारा इंपोर्ट बिल $40-42 बिलियन से बढ़कर लगभग $100 बिलियन प्रति वर्ष हो जाएगा। कमज़ोर रुपये और नाज़ुक अर्थव्यवस्था के साथ, यह पैसा कहाँ से आएगा? पीयूष गोयल ने लिस्ट किया कि भारत क्या नहीं खरीदेगा, लेकिन यह छिपा दिया कि हम पर क्या थोपा जाएगा। यह बराबरी वालों के बीच की डील नहीं है। यह ब्लैकमेल है। यह सरेंडर है।

पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिका अब भारत पर नजर रखेगा- ये सुनकर मुझे बड़ा दुख हुआ। नजर चोरों पर रखी जाती है। अमेरिका सीधे-सीधे भारत को चोर कह रहा है और नरेंद्र मोदी खुश हो रहे हैं। वे चाहते हैं कि हम जश्न मनाएं, क्योंकि हमें चोर साबित कर दिया गया है। भारत, रूस से तेल खरीदेगा या नहीं, अमेरिका उस पर नजर रखेगा और अगर हमने रूस से तेल खरीदा तो फिर से टैरिफ डाल दिया जाएगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के कुछ लोग नरेंद्र मोदी को 'लीडर' मानते थे, लेकिन मोदी न 'लीडर' हैं और न ही 'डीलर' हैं। ये आदमी सिर्फ 'सरेंडर' करना जानता है। नरेंद्र मोदी के क्या सीक्रेट्स हैं, हमें उससे मतलब नहीं है, लेकिन अगर वे अपने सीक्रेट्स छिपाने के लिए देश का नुकसान करेंगे तो हम आवाज उठाएंगे। एक बार जो इंसान Compromised हो गया, तो फिर वो झुकता चला जाता है। ऐसा प्रधानमंत्री देश के लिए ठीक नहीं हो सकता। 'ऑपरेशन सिंदूर' में सीजफायर के समय हमें शक था कि मोदी Compromised हैं, लेकिन अब वो शक यकीन में बदल चुका है।


पवन खेड़ा ने कहा कि भारत के लिए अमेरिका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ट्रेड सरप्लस वाला पार्टनर था। कई दशकों से भारत ने भारी मात्रा में अमेरिका को निर्यात किया और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। लेकिन अब ट्रंप की इस ट्रेड डील से भारत अमेरिका का डंपिंग ग्राउंड बन गया है और ये नरेंद्र मोदी के सरेंडर की वजह से हुआ है। इस ट्रेड डील के अनुसार 5 साल में हमें 500 बिलियन डॉलर का आयात अमेरिका से करना है। यानि भारत को अपना आयात 3 गुना बढ़ाना पड़ेगा। अर्थव्यवस्था और रुपए की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। मतलब हमें हर साल अमेरिका से 40-42 बिलियन डॉलर के आयत को 100 बिलियन डॉलर करने होगा।

खेड़ा ने कहा कि सवाल है कि हम अमेरिका से क्या सामान खरीदेंगे, इसका जवाब पीयूष गोयल के पास नहीं है। पीयूष गोयल ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये बताया कि हम अमेरिका से क्या नहीं लेंगे, लेकिन ये नहीं बताया कि क्या-क्या आएगा। नरेंद्र मोदी का किसानों से रिश्ता आप जानते ही हैं। जब किसान सड़क पर निकलते हैं तो उनका सिर फोड़ा जाता है, लेकिन अब इस ट्रेड डील से किसानों की कमर तोड़ी जा रही है, जो आने वाले दिनों में साबित हो जाएगा। अमेरिका के किसान इस डील से खुश हैं क्योंकि उन्हें भारत का बड़ा मार्केट मिल गया। दोस्ती बराबरी की होती है। ऐसे में जब दोस्त आपको रोज 2 थप्पड़ मारे और आपके कुछ कहने पर एक थप्पड़ कम कर दे। तो आप इसे रियायत समझकर खुश नहीं हो सकते। क्या ये दोस्ती है? 3% के टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया और अब घटाकर 18% कर दिया, तो मोदी खुश हो रहे हैं। जिस 3% की वजह से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई, क्या उसे आप भूल जाएंगे?

कांग्रेस नेता ने कहा कि जो भारत हमेशा अमेरिका के शीर्ष नेताओं से आंखों में आंखें डालकर एक व्यावहारिक रिश्ते निभाता था, वो भारत कहां है? नरेंद्र मोदी ने अडानी-अंबानी के हितों के लिए भारत के आम नागरिकों के हितों को कुर्बान कर दिया है। ये साफतौर पर भारत के आत्मसम्मान का समझौता है। जो लोग इस मातम की घड़ी को ढोल-नगाड़ा बजाकर जश्न जैसा दिखा रहे हैं- वे जानते हैं कि यहां 'सरेंडर' किया गया है। नेता विपक्ष राहुल गांधी जी को संसद में बोलने से रोका जाता है, क्योंकि नरेंद्र मोदी को मालूम है कि नेता विपक्ष और विपक्ष को पता है कि सरेंडर क्यों किया गया है। अब आप कयास लगा सकते हैं कि ये डील क्यों की गई? अडानी को बचाने के लिए। अंबानी के हितों के लिए। एपस्टीन फाइल में अपना नाम दबाने के लिए।


पवन खेड़ा ने कहा कि भारत सरकार अमेरिका के टाइम जोन के हिसाब से चल रही है, क्योंकि सारे निर्णय अमेरिका के हिसाब से हो रहे हैं। हमारे लिए इससे ज्यादा खेद जनक बात और कुछ नहीं हो सकती। डील सामने बैठकर Negotiate की जाती है, लेकिन कनपटी पर बंदूक रखकर, CD दिखाकर, ब्लैकमेल कर जो किया जाए- वो सरेंडर होता है। 'नाम नरेंदर - काम सरेंडर'।