छात्र आंदोलन के महीने भर बाद जागे PM मोदी! NEET पर फास्ट ट्रैक कोर्ट, प्रधान के इस्तीफे समेत अन्य मांगों पर चुप्पी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया है, लेकिन उन्होंने CJP की धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत अन्य प्रमुख मांगों पर कुछ नहीं कहा।

फोटोः सोशल मीडिया
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नीट पेपर लीक के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से ज्यादा से जारी छात्रों के आंदोलन पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुप्पी चोड़ी है। छात्र आंदोलन के दबाव और विपक्षी पार्टियों के चौतरफा वार से घिरे पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर NEET पेपर लीक विवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह घोषणा ऐसे समय आई है, जब छात्र आंदोलन का आज 34वां दिन है। हाल ही में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की घटना भी सामने आई थी।

सरकार का पहला संदेश, लेकिन सवाल अभी भी बाकी

प्रधानमंत्री ने अपने पोस्ट में कहा कि देश के युवाओं का हित सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने लिखा कि पेपर लीक के सभी मामलों में दोषियों को जल्द कठोर सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने इसे विद्यार्थियों के हितों की रक्षा की दिशा में सरकार का महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं छोड़ा जाएगा।

हालांकि, प्रधानमंत्री के बयान का दायरा फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा तक ही सीमित रहा। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का कोई उल्लेख नहीं किया। यही मांग CJP आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग बताई जा रही है और पिछले कई दिनों से आंदोलन का मुख्य केंद्र भी बनी हुई है।


CJP की चार मांगों में तीन पर कोई टिप्पणी नहीं

CJP ने अपने आंदोलन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेना और सरकार की ओर से यह सॉवरेन गारंटी देना शामिल है कि भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होगी।

प्रधानमंत्री के पोस्ट में इन मांगों का कोई जिक्र नहीं किया गया। उन्होंने न तो शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई टिप्पणी की और न ही मुआवजे, FIR रद्द करने या भविष्य में कार्रवाई न करने की मांग पर प्रतिक्रिया दी। ऐसे में सरकार की ओर से फिलहाल केवल पेपर लीक मामलों की कानूनी सुनवाई तेज करने का संदेश सामने आया है।

अगला कदम क्या होगा?

प्रधानमंत्री की घोषणा से यह संकेत जरूर मिला है कि सरकार ने पेपर लीक के मुद्दे पर कार्रवाई का रास्ता चुना है, लेकिन आंदोलन चला रहे छात्रों और CJP की बाकी मांगों पर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार इन मुद्दों पर भी कोई औपचारिक प्रतिक्रिया देती है और की कदम उठाती है या फिर आंदोलन पहले की तरह जारी रहता है।

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