बिहार में सियासी घमासान: राबड़ी देवी का बंगला खाली करने का आदेश पर RJD बोली- बदले की भावना से काम कर रही NDA सरकार

आरजेडी के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतियों की आलोचना करने वाले विपक्षी दलों को निशाना बना रही है। लोकतंत्र की खूबसूरती सरकार की कमियों को उजागर करने में है। अगर सरकार कोई गलती करती है, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह उसे जवाबदेह बनाए।

फोटोः ians
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नवजीवन डेस्क

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राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेताओं ने बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिए जाने को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की सोमवार को कड़ी आलोचना की। उन्होंने सरकार पर 'बदले की राजनीति' के तहत यह कदम उठाने का आरोप लगाया।

पटना में 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला, जिसमें वर्तमान में राबड़ी और उनका परिवार रह रहा है, हाल में बिहार सरकार में मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया गया है। नंद किशोर को कुछ हफ्ते पहले 21 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास भी आवंटित किया गया था।

आरजेडी के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नीतियों की आलोचना करने वाले विपक्षी दलों को निशाना बना रही है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “लोकतंत्र की खूबसूरती सरकार की कमियों को उजागर करने में है। अगर सरकार कोई गलती करती है, तो विपक्ष का दायित्व है कि वह उसे जवाबदेह बनाए। हालांकि, बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन चाहता है कि विपक्ष हर बात पर सरकार की हां में हां मिलाए, वरना उसे विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है।”


सिद्दीकी ने दावा किया कि बिहार गरीबी और कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार इन मुद्दों के समाधान के बजाय विपक्ष को निशाना बनाने में व्यस्त है। उन्होंने 1 अणे मार्ग स्थित मुख्यमंत्री आवास और उपमुख्यमंत्री के लिए निर्धारित 5 देशरत्न मार्ग स्थित बंगले को मिलाकर ‘लोक सेवक आवास’ बनाए जाने पर भी सवाल उठाया।

सिद्दीकी ने कहा, “मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को बताना चाहिए कि दोनों बंगलों को मिलाकर संयुक्त मुख्यमंत्री आवास क्यों बनाया गया और उसका नाम ‘लोक सेवक आवास’ क्यों रखा गया, जबकि उपमुख्यमंत्री अन्य बंगलों में रह रहे हैं।”

आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने कहा कि सरकारी बंगलों का आवंटन निर्धारित नियमों और मानकों के अनुसार होना चाहिए, लेकिन बिहार में ऐसा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “पटना उच्च न्यायालय ने 1990 के दशक के अंत में कहा था कि सरकार लगातार निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करती है। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव को इसकी जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि वह खुद उस मामले में याचिकाकर्ता थे।”

मंडल ने आरोप लगाया कि सरकार पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का अपमान करने की नीयत से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राजद 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले को खाली करने के आदेश के खिलाफ अदालत का रुख करने पर विचार कर सकता है।

आरजेडी के वरिष्ठ दलित नेता शिवचंद्र राम ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दलित नेता नंद किशोर राम का इस्तेमाल कर रही है।


उन्होंने कहा, “नंद किशोर राम को 11 मई को ही 21 हार्डिंग रोड स्थित बंगला आवंटित किया गया था। फिर महज दो हफ्ते बाद 27 मई को उन्हें 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगला आवंटित करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या पहले आवंटित बंगले में कोई समस्या थी?”

शिवचंद्र ने आरोप लगाया कि सरकार दलितों और आम लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने का प्रयास कर रही है।

सिद्दीकी ने दावा किया कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा सहित कई राजग नेता पद छोड़ने के बावजूद सरकारी बंगलों में रह रहे हैं और इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई जाती।

उन्होंने सवाल किया, “अगर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी सरकारी आवास में रह सकते हैं, तो लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को अपना बंगला खाली करने के लिए क्यों कहा जा रहा है?” सिद्दीकी ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास अब पहले की तुलना में काफी बड़ा हो गया है।

उन्होंने कहा, “सम्राट चौधरी ने बिहार की सबसे महंगी जमीन पर स्थित अपने भव्य आवास का लगभग 15 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विस्तार कर लिया है। क्या लोकतंत्र और राजनीति में मर्यादा की भावना नहीं होनी चाहिए?”

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