अखिलेश, मुलायम पर निशाना साधने वाले पोस्टरों से सियासी बवाल, एसपी ने बीजेपी पर लगाया आरोप
राम मंदिर में दान चोरी पर छिड़े विवाद के बीच सामने आए इन पोस्टरों में मुलायम सिंह और अखिलेश यादव को मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टोपी पहने हुए दिखाया गया है और नारा लिखा गया है, ‘दिल में बाबर, मुंह में राम’। पोस्टर लगाने वालों की पहचान का पता नहीं चल सका है।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मथुरा, सीतापुर और बाराबंकी सहित कई स्थानों पर मंगलवार को समाजवादी पार्टी (एसपी) के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधने वाले विवादास्पद पोस्टर दिखाई देने पर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। एसपी ने बीजेपी और सहयोगियों पर सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने का आरोप लगाया है।
पोस्टरों में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को मुस्लिम समुदाय से जुड़ी टोपी पहने हुए दिखाया गया है और नारा लिखा गया है, ‘दिल में बाबर, मुंह में राम’। पोस्टर लगाने वालों की पहचान का पता नहीं चल सका है। यह घटनाक्रम अयोध्या में राम मंदिर दान निधि के कथित गबन को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्ष ने हाल के हफ्तों में बार-बार यह मुद्दा उठाया है।
सीतापुर में एसपी कार्यकर्ताओं ने इन पोस्टरों को हटा दिया है। एसपी सांसद आनंद भदौरिया ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर एक होर्डिंग हटा दी और इस घटना को ‘कायरतापूर्ण कृत्य’ करार दिया। भदौरिया ने कहा, “यह दूसरी बार है जब इस तरह के होर्डिंग सामने आए हैं। मेरा दृढ़ विश्वास है कि इसके पीछे बीजेपी है। जहां भी ऐसे पोस्टर पाए जाएं, उन्हें फाड़ दिया जाना चाहिए और जला दिया जाना चाहिए।”
मथुरा में एसपी जिला अध्यक्ष वीरेंद्र यादव ने आरोप लगाया, “असामाजिक तत्वों’ ने आपत्तिजनक होर्डिंग लगाकर सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है।” उन्होंने आरोप लगाया, “बीजेपी इतनी बौखला गई है कि उसके पास हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने और धार्मिक भावनाओं को भड़काने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। राम मंदिर दान मामले में वे पूरी तरह बेनकाब हो गए हैं।” उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की और जिला प्रशासन से सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की।
एसपी के वरिष्ठ नेता प्रदीप चौधरी ने कहा कि पार्टी इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराएगी। उन्होंने कहा, “हम सीसीटीवी फुटेज की जांच करेंगे और इस शरारत में शामिल लोगों की पहचान करेंगे। यह शांति और सद्भाव को बिगाड़ने की साजिश है।” एसपी के एक अन्य वरिष्ठ नेता अशोक अग्रवाल ने आरोप लगाया कि पोस्टर राम मंदिर दान में कथित अनियमितताओं से ध्यान भटकाने का एक प्रयास था। उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव बड़े धार्मिक व्यक्ति हैं। मतदाता अब जागरूक हैं और उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता।”
कांग्रेस नेता प्रदीप माथुर ने भी जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि ऐसे मुद्दे इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि राम मंदिर दान विवाद में भाजपा और आरएसएस ‘बेनकाब’ हो गए हैं।बाराबंकी में भी एक प्रमुख चौराहे पर लगे ऐसे ही पोस्टरों को एसपी कार्यकर्ताओं ने फाड़ दिया।एसपी नेता ताज बाबा राईन ने इस घटना को पार्टी की छवि खराब करने और सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश बताया।
कोतवाली थाना प्रभारी सुधीर सिंह ने कहा कि होर्डिंग जब्त करने के बाद जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है। शिकायत मिलने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।”
इसी बीच, गोरखपुर में अज्ञात लोगों द्वारा विश्वविद्यालय चौराहा, पडलेगंज, कुडाघाट और मोहद्दीपुर समेत कई प्रमुख चौराहों पर एक जैसे विवादित पोस्टर लगाये जाने के बाद एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। मुलायम सिंह और अखिलेश यादव की तस्वीरों के साथ राम मंदिर आंदोलन और कार सेवकों से जुड़े इन पोस्टरों को लगाये जाने के बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के जिला अध्यक्ष अविनाश तिवारी ने आरोप लगाया कि इन पोस्टरों का मकसद पार्टी की छवि खराब करना है।
उन्होंने दावा किया कि स्थानीय प्रशासन को सूचित करने के बावजूद होर्डिंग्स को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने खुद ही उन्हें फाड़ दिया। तिवारी ने इस घटना को एसपी नेता अरविंद दत्त शुक्ला की हालिया गिरफ्तारी से जोड़ा और आरोप लगाया कि शुक्ला द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी पर सवाल उठाने के बाद सत्ताधारी पार्टी के समर्थकों ने बदले की भावना से ये पोस्टर लगाए थे।
उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे पोस्टर अखिलेश यादव के लिए जनसमर्थन को कम नहीं करेंगे और उन्होंने सत्ताधारी पार्टी से विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया। पुलिस ने बताया कि गोरखपुर में पोस्टर लगाने वालों की अभी तक पहचान नहीं हो पाई है और उनकी पहचान सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने पोस्टरों का बचाव किया। राजभर ने कहा, “पोस्टर उचित हैं। यदि आप बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद संसदीय कार्यवाही को देखें, तो राम गोपाल यादव, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने बार-बार कार सेवकों पर गोलीबारी का आदेश देने की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर हिंदू उन्हें वोट नहीं देंगे, तो भी वे मुसलमानों की सुरक्षा के लिए खड़े होंगे। ये पोस्टर उन बयानों का जवाब हैं।”
हालांकि एसपी प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने बीजेपी पर जनता की चिंताओं से ध्यान भटकाने के लिए बाबरी मस्जिद मुद्दे को पुनर्जीवित करने का आरोप लगाया। वर्मा ने कहा, “बीजेपी और उसके सहयोगी समाज का ध्रुवीकरण करने और बेरोजगारी, मुद्रास्फीति, पेपर लीक और पेट्रोल एवं डीजल की बढ़ती कीमतों से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए बार-बार बाबरी मस्जिद मुद्दे को उठाते हैं। अगर लोग इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर देंगे, तो बीजेपी राजनीतिक रूप से ढह जाएगी। 1992 के मुद्दों की आज कोई प्रासंगिकता नहीं है।”
संबंधित जिलों के पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वे सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं और पोस्टर लगाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होने पर कानूनी कार्रवाई करेंगे। इससे पहले 12 जुलाई को, अयोध्या राम मंदिर में दान के कथित गबन को लेकर गोरखपुर जिले में एसपी द्वारा लगाए गए एक विवादास्पद पोस्टर के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था, जिसके कारण पार्टी के एक नेता सहित तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। पुलिस ने शास्त्री चौक पर लगे बैनर के मामले में स्थानीय एसपी नेता अरविंद उपेन्द्र शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
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