कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन के संकेत, बागियों पर फैसला होने तक बीजेपी नहीं करेगी सरकार बनाने का दावा

कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल कांग्रेस और जेडीएस के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे पर अभी फैसला नहीं हुआ है, ऐसे में बीजेपी सरकार की भी अनिश्चितता बनी हुई है।

फोटो : सोशल मीडिया
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आईएएनएस

कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार के विश्वासमत खोने के बावजूद अभी तक बीजेपी ने सरकार बनाने का दावा पेश नहीं किया है। ऐसे में कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लगने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल कर्नाटक विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने अभी तक कांग्रेस और जेडीएस के 15 बागी विधायकों के इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं लिया है। ऐसी स्थिति में बीजेपी भी सरकार बनाने का दावा करने में संकोच कर रही है।

बीजेपी के एक पदाधिकारी ने संकेत दिया कि अगर अनिश्चितता जारी रहती है तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। बीजेपी प्रवक्ता जी मधुसूदन ने कहा, "अगर विधानसभा अध्यक्ष बागी विधायकों के इस्तीफे को स्वीकार करने या खारिज करने में ज्यादा समय लेते हैं, तो राज्यपाल वजुभाई वाला राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं, क्योंकि इस तरह की स्थिति में हम सरकार बनाने के लिए दावा करना पसंद नहीं करेंगे।"

गौरतलब है कि बीजेपी को इस बारे में स्पष्टता नहीं है कि विधानसभा अध्यक्ष बागी विधायकों को लेकर क्या फैसले देंगे। उनकी शंका इसमें है कि बागियों को अयोग्य करार दिया जाता है या नहीं। हालांकि कांग्रेस और जनता दल-सेक्युलर (जेडीएस) ने व्हिप न मानने को लेकर बागी विधायकों को अयोग्य करार देने की सिफारिश की है।

यहां ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 जुलाई के आदेश में कहा है कि विधानसभा अध्यक्ष दल-बदल विरोधी कानून के अनुसार बागियों के इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बागियों ने विधानसभा में मतदान में भाग नहीं लिया। सुप्रीम कोर्ट के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने यह भी कहा था कि बागियों को सदन में भाग लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जब उनके इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष के सामने 11 जुलाई से लंबित हैं। न्यायालय के 10 जुलाई के निर्देश पर उन्होंने (बागियों) ने फिर से विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपा था।

विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस्तीफों पर फैसला लेने में ज्यादा समय लेने पर बागी विधायकों के शीर्ष अदालत से इसमें दखल के लिए संपर्क किए जाने की संभावना है। बागी विधायकों की अदालत के समक्ष 10 जुलाई की याचिका में विधानसभा अध्यक्ष को तत्काल इस्तीफा स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

उन्होंने कहा, "इस्तीफों के स्वीकार किए जाने तक विधानसभा का संख्या बल 225 बना रहेगा, इसमें एक नामित सदस्य भी शामिल है, जैसा की बागी भी अभी सदस्य हैं, इस तरह से साधारण बहुमत के लिए 113 संख्या जरूरी है। दो निर्दलियों के समर्थन से हमारी संख्या 107 है, जो बहुमत से 6 कम हैं।

अगर विधानसभा अध्यक्ष इस्तीफा स्वीकार कर लेते हैं या सदस्यों को अयोग्य करार देते हैं तो विधानसभा का संख्या बल घटकर 210 हो जाएगा और आधी संख्या 106 हो जाएगा, जिससे भाजपा दो निर्दलीयों के सहयोग से जीतने में सक्षम होगी। मधुसूदन ने कहा, "अगर विधानसभा अध्यक्ष व शीर्ष अदालत को फैसले में समय लगता है तो राज्यपाल राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं और विधानसभा को निलंबित रख सकते हैं, तब हम दावा करने की स्थिति में हो सकते हैं और अपने बहुमत पर सरकार बना सकते हैं।"

अगर बागी विधायकों का इस्तीफा स्वीकार किया जाता है या वे अयोग्य करार दिए जाते हैं तो 15 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में छह महीने के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।

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