राष्ट्रपति चुनाव 18 जुलाई को: जानिए, सिर्फ दो ही उम्मीदवार क्यों होते हैं, और कैसे तय होता है वोटों का गणित

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार सांसदों के वोटों का कुल मूल्य या संख्या 5,43,200 है, जबकि विधायकों के वोटों की कुल संख्या या मूल्य 5,43,231 है, जिससे कुल वोट 10,86,431 हो गए हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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ऐशलिन मैथ्यू

देश के 16वें राष्ट्रपति का चुनाव 18 जुलाई को होना तय है और एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू और विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के बीच मुकाबला भी तय हो चुका है। रोचक यह देखना होगा कि इन दोनों उम्मीदवारों को कितने-कितने वोट मिलते हैं।

अभी तक हुए राष्ट्रपति चुनावों पर गौर करें तो सामने आता है कि केआर नारायणन ऐसे उम्मीदवार थे जिन्हें 1997 मे हुए चुनाव में सर्वाधिक 9.56 लाख वोट मिले थे। वैसे राष्ट्रपति चुनाव में कुल वोटों की संख्या 10,06,921 है। नारायणन के सामने स्वतंत्र उम्मीदवार पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषन थे जिन्हें सिर्फ 50,631 वोट मिले थे।

सर्वाधिक मतों के मामले में दूसरे नंबर पर एपीजे अब्दुल कलाम का नाम है, जिन्हें 2002 के राष्ट्रपति चुनाव में 9,22,884 वोट मिले थे। उनके खिलाफ मैदान में उतरीं लक्ष्मी सहगल को 1,07,366 वोट हासिल हुए थे। उस समय कुल वोटों की संख्या 10,30,250 थी। इन दो के बाद हुए सभी चुनावों में सारे राष्ट्रपति उम्मीदवारों को 8 लाख से कम वोट मिले हैं।

मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पिछले चुनाव में 7,02,044 वोट और उनकी प्रतिद्धंदी मीरा कुमार को 367,314 वोट मिले थे। उस चुनाव में वोटों की कुल संख्या 10,69,358 थी। वहीं 14वें राष्ट्रपति के लिए हुए चुनाव में प्रणब मुखर्जी को 7,13,763 और उनके प्रतिद्वंदी और पहले आदिवासी उम्मीदवार पी ए संगमा को 3.15,987 वोट हासिल हुए थे। उस साल कुल वोटों की संख्या 10,29,750 थी।


राष्ट्रपति चुनावों में उम्मीदवारों का नियम 1997 में के आर नायाणन के चुनाव के समय बनाया गया। इन नियमों के तहत किसी भी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नामांकन के लिए प्रस्तावकों और दूसरे प्रस्तावकों की संख्या को 10 से बढ़ाकर 50 कर दिया गया। साथ ही सिक्यूरिटी राशि को भी 2,500 से बढ़ाकर 15,000 कर दिया गया।

राष्ट्रपति पद के लिए अब तक हुए चुनावों में सर्वाधिक 17 उम्मीदवार 1967 में मैदान में थे। उस चुनाव में डॉ जाकिर हुसैन मुख्य उम्मीदवार थे और विपक्ष के उम्मीदवार कोटा सुब्बाराव थे। जाकिर हुसैन ने वह चुनाव 4,71,244 वोटों के साथ जीता था जबकि सुब्बाराव को 3,63,971 वोट मिले थे। उस चुनाव में कुल वोटर 8,38,048 थे। इस चुनाव में 9 उम्मीदवारों को तो एक भी वोट नहीं मिला था।

पांचवे राष्ट्रपति के चुनाव में 1969 में डॉ जाकिर हुसैन की अचानक मृत्यु हो गई, तो मुख्य उम्मीदवार वी वी गिरि मैदान में थे और उनका मुकाबला 14 अन्य उम्मीदवारों से था। गिरि को 4,01,515 वोट मिले और नीलम संजीवा रेड्डी को 3,13,548 वोट। जबकि सी डी देशमुख भी 1,12,769 वोट हासिल करने में कामयाब रहे।

बात अगर सबसे पहले राष्ट्रपति चुनाव की करें तो 1952 में डॉ राजेंद्र प्रसाद को चार उम्मीदवारों के खिलाफ चुनाव लड़ना पड़ा। उन्हें 5,07,400 वोट मिले जबकि नजदीकी प्रतिद्वंदी के टी शाह 92,827 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे। इसी तरह 10वें राष्ट्रपति के लिए 1992 में हुए चुनाव में शंकर दयाल शर्मा को 6,75,804 वोट और उनके खिलाफ मैदान में प्रसिद्ध वकील राम जेठमलानी को मात्र 2,704 वोट मिले थे।


संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार, भारत के राष्ट्रपति का चुनाव केवल एक निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जा सकता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के सांसद और सभी राज्यों और दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल हैं। दोनों केंद्र शासित प्रदेश हैं। अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के पास चुनाव में वोट नहीं है। राज्यों की विधान परिषदों के सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं।

प्रत्येक वोट के लिए एक संख्या तय की गई है। एक सांसद के वोट की संख्या 700 निर्धारित होती है, लेकिन एक विधायक के वोट की संख्या उस राज्य के अनुसार अलग-अलग होती है जहां से विधायक आता है। यह राज्य की जनसंख्या और राज्य की विधानसभा की सीटों की संख्या पर निर्भर करता है।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार सांसदों के वोटों का कुल मूल्य या संख्या 5,43,200 है, जबकि विधायकों के वोटों की कुल संख्या या मूल्य 5,43,231 है, जिससे कुल वोट 10,86,431 हो गए हैं।

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