राम मंदिर चढ़ावा मामले पर कांग्रेस का PM मोदी से सवाल, जयराम रमेश बोले- चुप्पी तोड़िए, SC की निगरानी में जांच की मांग
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब सीसीटीवी फुटेज, नकदी की बरामदगी और संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान सामने आ चुकी थी, तो 25 जून को प्राथमिकी दर्ज होने तक कथित तौर पर 21 दिन क्यों लगे?

राम मंदिर चढ़ावा मामले में कांग्रेस ने PM मोदी से चुप्पी तोड़ने की मांग की।
जयराम रमेश ने जांच में ‘बड़ी मछलियों’ को बचाने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी की मांग की।
जयराम रमेश ने 105 कथित घटनाओं का हवाला देते हुए जांच के दायरे पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुप्पी तोड़ने चाहिए और यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो "चोरों" को उनका संरक्षण माना जाएगा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में जांच में ‘‘बड़ी मछलियों’’ को बचाया गया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच तथा उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग की।
रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मामले को ‘‘चंदा चोरी, आस्था धोखा’’ करार देते हुए कहा कि आरोप पत्र में सामने आए तथ्यों से विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच और ‘‘सरकारी लीपापोती’’ पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने आरोप पत्र में दर्ज घटनाक्रम का हवाला देते हुए कहा कि इस साल चार जून को गणना कक्ष के बाथरूम से 2.25 लाख रुपये मिलने का वीडियो ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय को भेजा गया था और अगले दिन उन्हें सीसीटीवी फुटेज भी दिखाई गई थी।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि जब सीसीटीवी फुटेज, नकदी की बरामदगी और संदिग्ध कर्मचारियों की पहचान सामने आ चुकी थी, तो 25 जून को प्राथमिकी दर्ज होने तक कथित तौर पर 21 दिन क्यों लगे?
रमेश ने यह भी सवाल उठाया, "एसआईटी की जांच में चढ़ावे की रकम को बिना अनुमति हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आने के बावजूद जांच सिर्फ आठ आरोपियों तक ही क्यों सीमित रही? चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी बनाने के बजाय गवाह क्यों बनाया गया?"
रमेश ने कहा कि मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था की निगरानी और प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच के बिना मामले की पूरी सच्चाई सामने आना मुश्किल है। कांग्रेस महासचिव ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इस मामले के तार भाजपा-आरएसएस के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच की पहुंच ‘‘छोटे किरदारों’’ तक सीमित कर दी गई है और पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय नहीं की गई।
रमेश ने कहा कि भगवान श्रीराम के नाम पर आए चढ़ावे से जुड़े मामले में जिम्मेदारी तय होने तक इसे खत्म नहीं माना जा सकता।
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