प्रियंका गांधी ने सरकार को लिया आड़े हाथों, कहा- क्या अरबपति मित्रों के ड्राइंगरूम में बनेंगे कृषि कानून!

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने किसानों को लेकर सरकार की संवेदनहीनता की आलोचना की है और कहा है कि कृषि कानून किसानों के खेत से बनेंगे या सरकार के अरबपति मित्रों के ड्राइंग रूम से।

फोटो : Getty Images
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस महासचिव ने कृषि कानूनों पर सरकार के टालमटोल रवैये की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि सरकार ने संवेदनहीनता की हदें पार कर दी हैं। एक फेसबुक पोस्ट में प्रियंका गांधी ने लिखा है कि, "किसान आंदोलन में किसानों और सरकार के बीच बातचीत का आज 8वां दौर खत्म हो गया। किसानों को आशा थी कि भाजपा सरकार अपनी कथनी के अनुसार किसानों का कुछ सम्मान तो करेगी, लेकिन हुआ इसके ठीक उलट। वार्तालाप करने वाले मंत्री मीटिंग में देर से पहुंचे और बिल वापस न लेने की बात करते रहे।”

किसान आंदोलन में किसानों और सरकार के बीच बातचीत का आज 8 वां दौर खत्म हो गया। किसानों को आशा थी कि भाजपा सरकार अपनी कथनी...

Posted by Priyanka Gandhi Vadra on Friday, January 8, 2021

प्रियंका गांधी ने आगे लिखा है कि, "किसान सरकार के रुख से नाराज़ हैं। आज दोपहर में मैं किसानों के समर्थन में धरने पर बैठे पंजाब के सांसदों से मिली। पूरे दिन भर मैं भारत के हर कोने से इस किसान आंदोलन के समर्थन की आवाज सुनती रहती हूं।"

"किसानों के बिना देश की कल्पना अधूरी"

उन्होंने लिखा है कि, "26 जनवरी 2021 को हम अपना गणतंत्र दिवस मनाएंगे। जब भी हम इस देश के जन गण मन की बात करते हैं उसमें किसान का जिक्र आना जरूरी हो जाता है। पूरे भारत के सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राजनैतिक ताने - बाने का जिक्र किसान के बिना अधूरा है। भाजपा सरकार आज जिस "आत्मनिर्भर" के नारे का झूठा ढोल पीट रही है, उस नारे को आत्मसात् कर किसानों ने हरित क्रांति में हिस्सा लेते हुए खाद्यान्न के मामले में बहुत पहले भारत को आत्मनिर्भर बना दिया था। किसानों के बिना इस देश की कल्पना भी नहीं की जा सकती।"

"मेहनत के हक की लूट रोकने के लिए डटे हैं किसान"

प्रियंका गांधी ने सर्दी के मौसम में किसानों का आंदोलन जारी रहने को तर्कपूर्ण बताते हुए कहा है कि किसान अपनी मेहनत की लूट को रोकने के लिए डटे हैं। उन्होंने लिखा है कि, "इस पूरे आन्दोलन में लगभग 60 किसानों की जान जा चुकी है। किसानों ने लाठियां खाईं, आंसू गैस के गोलों का सामना किया, वाटर कैनन को झेला, सरकारी तंत्र व मीडिया के एक हिस्से द्वारा फैलाई गई गलत सूचनाओं का जवाब दिया, ठंड झेली, बारिश में भी डटे रहे। किसान अपनी सालों की मेहनत का हक लुटने से रोकने के लिए डटे हैं। इस धरती पर मेहनत करके अन्न उगाकर पूरे देश का पेट भरने वाले किसान आज इन कानूनों की सच्चाई बताने सड़कों पर हैं।

"क्या बीजेपी के अरबपति मित्रों के ड्राइंग रूम में बनेंगे कृषि कानून!"

प्रियंका गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या कृषि कानून बीजेपी के अरबपति मित्रों के ड्राइंग रूम में बनेंगे या किसानों के खेत में? उन्होंने लिखा है कि, "आज इस देश को ये सोचना है कि किसान कानून किसानों के खेत से बनेंगे या भाजपा सरकार के चंद अरबपति मित्रों के ड्रॉइंग रूम में। इस देश के किसानों ने, इस देश का कानून बनाने वाले कई सारे सांसदों व विधायकों ने व करोड़ों आमजनों ने किसानों पर थोपे जा रहे इन कानूनों को अलोकतांत्रिक व किसानों के खिलाफ बताया है।"

सरकार और बीजेपी नेताओं के रवैये की भी प्रियंका गांधी ने आलोचना की है। उन्होंने लिखा है कि, "भाजपा सरकार का व्यवहार देखकर पूरा देश हैरान है। कल यूपी से आए एक वीडियो में एक पुलिस वाला एक किसान को धमकाते हुए कह रहा था, "तुम्हारा छज्जा गिरा देंगे।" कल कई जगहों पर किसानों को रोककर उन्हें धमकाया गया। इसके पहले किसानों पर हरियाणा सरकार ने आंसू गैस के गोले बरसाए। यूपी में तो आंदोलनकारी किसानों की पहचान करने के लिए सरकार ने पूरा प्रशासनिक बल लगा दिया है। भाजपा नेता किसानों को बुरा - भला कह रहे हैं, गालियां दे रहे हैं।"

"क्रूरता और निर्दयता की हदें पार कर दीं सरकार ने"

प्रियंका गांधी ने पंडित नेहरू, महात्मा गांधी और सरदार पटेल को याद करते हुए कहा है कि, "हमारे आज़ादी के नायक महात्मा गांधी जी, सरदार पटेल जी, जवाहर लाल नेहरू जी ने किसानों की आवाज का समर्थन किया और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए।"

उन्होंने आगे लिखा है कि, "इस सरकार ने क्रूरता व निर्दयता की हदें पार कर दी हैं। आज किसानों के समर्थन में धरने पर बैठे पंजाब के सांसदों से मैंने यही कहा कि हम बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। हम किसानों के साथ हमेशा रहे हैं। बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। समाधान यही है कि कानून वापिस लें और कोई समाधान नहीं है। इसी समाधान में किसान और उसकी मेहनत का सम्मान है। जय हिन्द, जय भारत, जय किसान"

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