साफगोई और हर संकट में साथ रहने के वादे से बिजनौर महापंचायत में लोगों पर गहरा असर छोड़ गईं प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी साफगोई और हर संकट में साथ रहने के वादे और प्रण से बिजनौर के लोगों पर गहरा असर छोड़ा है। किसान पंचायत में आए लोगों ने धैर्य के साथ उनकी बातें सुनीं।

फोटो : INCIndia
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आस मोहम्मद कैफ

कांग्रेस महासचिव की बिजनौर जिले के चांदपुर में हुई किसान महापंचायत कई मायनों में अलग साबित हुई। जहां आमतौर पर किसी भी विशाल जनसभा और किसान महापंचायतों में वक्ताओं के भाषणों के दौरान शोर-शराबा रहता है, वहीं इस सभा में प्रियंका गांधी के उद्बोधन के दौरान पूरी शांति के साथ लोगों ने उनकी बात सुनी। प्रियंका ने भी लोगों को निराश नहीं किया, उन्होंने बहुत ही साफगोई और शालीनता के साथ हर संकट में किसानों और लोगों के साथ रहने के वादा ही नहीं किया, बल्कि प्रण भी लिया, और यही बात लोगों के दिल में गहरी छाप छोड़ गई।

चांदपुर महापंचायत में जब प्रियंका गांधी पहुंची तो उस समय सहारनपुर के नेता इमरान मसूद मंच पर भाषण दे रहे थे। लेकिन प्रियंका के सभा स्थल पर पहुंचते ही मानो जनसमूह सिर्फ और सिर्फ प्रियंका को ही देखना सुनना चाहता था। इतना ही नहीं उनके गाड़ी से उतरते ही लोगों में जबरदस्त जोश दिखा और कई बार भीड़ में से 'इंदिरा-इंदिरा' के नारे भी लगे। लोग प्रियंका में उनकी दादी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का अक्स देख रहे थे।

फोटो : आस मोहम्मद
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प्रियंका ने मंच पर पहुंचकर लोगों को हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर अभिवादन किया।तालियों की गड़गड़ाहट के बीच प्रियंका गांधी जिंदाबाद के नारे लगने लगे। वो काफी देर तक अभिवादन का जवाब देती रही,हाथ हिलाती रही। आलम यह था कि बैठ कर पुनः खड़ी हुई और अलग - अलग दिशा में अभिवादन का जवाब दिया।

प्रियंका गांधी के भाषण के दौरान भीड़ आश्चर्यजनक तरीके से पूरी तरह शांत हो गई। उनके भाषण के दौरान उनकी गहरी बातों को बेहद संयमित तरीके से सुना गया। सबसे अलग ये रहा कि उनके भाषण के दौरान वहां तैनात पुलिसकर्मी भी गंभीरता से प्रियंका का भाषण सुनते देखे गए। ड्यूटी पर तैनात महिला कांस्टेबल अंजू मलिक ( बदला हुआ नाम) ने बताया कि वो प्रियंका गांधी की बातों को सुनकर बहुत भावुक हो गई थी। प्रियंका जी की बात बहुत गहरी जड़ छोड़ गई है।

पाबली जट गांव से इस महापंचायत में आए 60 साल के किसान रवीन्द्र कुमार ने बताया कि उन्होंने 30 साल से कांग्रेस को वोट नहीं दिया है। यहां वो वोट के लिए भी नही आये हैं, बल्कि वह सिर्फ प्रियंका गांधी के लिए यहां आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रियंका बिल्कुल अपनी दादी इंदिरा गांधी जैसी दिखती है। उन्होंने कहा, "मैंने इन्हें सुना है, इनकी बातों में सच्चाई है। एक एक शब्द दिल मे उतर रहा था। मैं किसान हूँ ,यह हमारी लड़ाई है। प्रियंका जी इस संकट में हमारे साथ है। हम शर्मिंदा है हम उनका शुक्रिया भी अदा नही कर सकते। वो आज भी कह रही है कि वो हर संकट में हमेशा हमारे साथ खड़ी रहेंगी।"

भाषण के दौरान प्रियंका गांधी दो बड़ी वजहों से यहां पहुंचे लोगों के दिल के पर गहरा असर छोड़ गई है। उन्होंने कहा कि वो वादा करती है और प्रण लेती है कि वो हर मुसीबत में हमेशा लोगो के साथ रहेगी। यही कारण है कि कांग्रेस पहले दिन से किसानों के साथ है और इसमेx कोई राजनीतिक हित नहीx है। इसके अलावा प्रियंका गांधी का किसानों की शहादत के लिए दो मिनट का मौन कराना और जय जवान जय किसान के नारे लगवाना भी गहरा असर छोड़ गया है।

चांदपुर की यह सभा किसान आंदोलन के समर्थन में आयोजित की गई थी और आपसी भाईचारे का आलम यह था कि अंतर्राष्ट्रीय बॉक्सर बिजेंद्र सिंह अपने संबोधन के दौरान अज़ान होने की वजह से शांत खड़े रहे और अज़ान पूरी होने के बाद ही उन्होंने अपनी बात पूरी की।

चांदपुर के रामलीला मैदान में हर तरफ होर्डिंग लगी थीं। नजदीक ही किराना की दुकान चलाने वाले अब्दुल अज़ीज़ (43) ने बताया कि यह बात सही है कि वो किसान नहीं है और परचून की दुकान करते हैं मगर सच है कि आज किसान भाइयों पर मुसीबत आ गई है और वो इस समय उनके साथ है। इसके अलावा सभा में पहुंची बिलकिस ने का कहना था कि, "सिर्फ प्रियंका गांधी की वजह से यहां आई थी, उन्हें सुना वो अभूतपूर्व रूप से सवेंदनशील हैं और इतनी साफगोई से अपनी बात रखती है कि वो दिल मे उतर गई है।"

इससे पहले कांग्रेस नेता और स्थानीय निवासी राशिद अल्वी ने बिजनौर जनपद के इतिहास के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बिजनौर जिले का चांदपुर वही कस्बा है जहां के विद्वान अबुल फजल अकबर के दरबार के नवरत्नों में शामिल थे। राजा भरत का जन्म भी यहीं हुआ जिनके नाम पर भारतवर्ष जाना गया। उनके मुताबिक गंगा के दूसरे छोर पर स्थित हस्तिनापुर में कौरवों का अन्याय बहुत अधिक बढ़ गया तो पांडवों को पहला आश्रय बिजनौर में ही मिला था। उनका कहना था कि इसी जिले में विदुर कुटी भी है।

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