संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया, पुलिस ने किया खंडन

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और संसद मार्ग थाने के पास सुरक्षाबलों द्वारा अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस को गोले छोड़े गए। इस बीच इलाके के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद कर दिया गया।

संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, दीपके को हिरासत में लिया गया, पुलिस ने किया खंडन (फोटोः विपिन)
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नीट पेपर लीक के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के संसद मार्च के दौरान सोमवार को पुलिस ने हजारों की संख्या में जुटे युवाओं को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और जमकर लाठीचार्ज किया। छात्रों और युवाओं के इस प्रदर्शन के कारण मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात ठप हो गया।

कॉजपा के संसद मार्च और पुलिस की बर्बर लाठीचार्ज के बीच संगठन के प्रवक्ता सौरभ दास ने दावा किया कि कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। दास ने कहा, ‘‘पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बर्बरतापूर्वक कार्रवाई कर रही है और उन्हें पीट रही है, सांसदों से अनुरोध है कि वे सड़कों पर छात्रों के समर्थन में खड़े हों।’’ हालांकि, दिल्ली पुलिस ने बयान जारी कर कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने की खबर को गलत बताया है।

स्कूल की वर्दी पहने कुछ प्रदर्शनकारियों समेत अन्य लोगों के मध्य दिल्ली में प्रवेश करने, अंदरूनी सड़कों से निकलने और संसद के जितना संभव हो सके, करीब पहुंचने के लिए वैकल्पिक रास्ते तलाशने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए जमकर लाठीचार्ज किया। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए।

व्यापक बैरिकेडिंग के बावजूद वे नहीं रुके। वे कई किलोमीटर पैदल चले, बीच-बीच में प्रदर्शनकारियों के समूहों में शामिल होकर नारे लगाए, उचित अवसर की प्रतीक्षा में रुकते रहे ताकि बैरिकेड पार कर सकें, और कई स्थानों पर बैरिकेड के कई स्तरों को पार करने में सफल भी रहे।


कुछ किलोमीटर दूर, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने चिकित्सा अधीक्षक से अनुरोध किया कि उन्हें ‘‘भले ही अस्थायी रूप से’’ अस्पताल से बाहर जाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे कॉजपा के संसद मार्च में भाग ले सकें। उन्होंने कहा कि वे पूरी तरह ठीक महसूस कर रहे हैं और उनके सभी स्वास्थ्य संबंधी मानक सामान्य हैं।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब, पटेल चौक, शास्त्री भवन, आरबीआई बिल्डिंग और संसद मार्ग थाने के पास सुरक्षाबलों द्वारा अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठी चार्ज किया गया और आंसू गैस को गोले छोड़े गए। इस बीच इलाके के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद कर दिया गया।

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन जंतर-मंतर से शुरू हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त कंपनियों और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पड़ोसी जिलों से पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ सुरक्षा दोगुनी कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि स्थिति के बिगड़ने पर रिजर्व में रखे गए अर्धसैनिक बलों की कई कंपनियां को भी तैनात किया गया। एहतियात के तौर पर मोट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाने के बाद कई यात्री अंदर ही फंस गए।

प्रदर्शनकारी परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। राष्ट्रीय ध्वज लिए हुए दर्जनों प्रदर्शनकारी राष्ट्रीय राजधानी में कई स्थानों पर एकत्र हुए और उन्होंने "भारत माता की जय", "वंदे मातरम" और "धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो" जैसे नारे लगाए।


इससे पहले दिन में, पुलिस ने मार्च को उस समय रोक दिया जब जुलूस कनॉट प्लेस इलाके में पहुंचा और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी अलग-अलग दिशाओं में बिखर गए और कई लोग धुएं से बचने के लिए सड़कों पर भागने लगे। भारी सुरक्षा तैनाती के बीच, छोटे समूह नजदीकी चौराहों पर फिर से एकत्र हुए और नारेबाजी जारी रखी, जबकि पुलिस ने मार्च को संसद की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए हुए थे।

वांगचुक को हिरासत में लिए जाने और अस्पताल ले जाए जाने के बाद से भूख हड़ताल कर रहे दीपके ने कहा, ‘‘हमारी मांगें स्पष्ट हैं: धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। आत्महत्या करने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए, और सोनम वांगचुक को तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।’’

महाराष्ट्र के एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि वह केवल प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली आया है। उसने शिक्षा को देश के विकास की नींव बताया और आरोप लगाया कि अगर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं की गई तो व्यवस्था खराब हो जाएगी। उसने कहा, ‘‘हम यहां केवल जवाबदेही की मांग करने और यह सुनिश्चित करने आए हैं कि छात्रों को वह शिक्षा मिले जिसके वे हकदार हैं।’’

सरकारी नौकरी के लिए तैयारी कर रहे बिहार के व्यक्ति ने कहा कि प्रदर्शनकारी अपनी आवाज उठाने और अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए थे। उसने कहा कि कई युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों बिताए हैं और वे पारदर्शिता तथा जवाबदेही के हकदार हैं।

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