UGC के नए नियमों का विरोध तेज, जगद्गुरु परमहंस ने PM को लिखा पत्र, कहा- वापस लें या इच्छामृत्यु की दें इजाजत

यूजीसी की नई गाइडलाइन को लेकर बीजेपी के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। रायबरेली में बीजेपी किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने यूजीसी के नए नियमों पर चुप्पी के विरोध में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजी हैं।

UGC के नए नियमों का विरोध तेज, जगद्गुरु परमहंस ने PM को लिखा पत्र, कहा- वापस लें या इच्छामृत्यु की दें इजाजत
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नवजीवन डेस्क

यूजीसी की नई गाइडलाइंस को लेकर विवाद छिड़ गया है और इसका विरोध तेज होता जा रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश में इसके विरोध में कई जगहों पर प्रदर्शन जारी है। अब इस विवाद में अयोध्या के जगद्गुरु परमहंस आचार्य भी कूद गए हैं। उन्होंने पीएम मोदी को पत्र लिखा है, जिसमें मांग की है कि या तो यूजीसी के नए नियमों को वापस लिया जाए या फिर उन्हें इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए। जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि उन्होंने नए नियमों की वापसी को लेकर पीएम मोदी को लेटर लिखा है। यदि नियम वापस नहीं लिए जाते हैं तो उन्होंने इच्छा मृत्यु की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

इस बीच इस बिल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर दी गई है। यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक नई याचिका दायर की गई है। वकील विनीत जिंदल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि ये नियम जनरल कैटेगरी के साथ भेदभाव करते हैं और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं। याचिका में रेगुलेशन 3(सी) के कार्यान्वयन पर रोक लगाने की मांग की गई है और कोर्ट से आग्रह किया गया है कि वह यह सुनिश्चित करे कि 2026 के नियमों के तहत निर्मित ढांचा सभी जातियों के व्यक्तियों पर समान रूप से लागू हो।

यूपी कई कई जिलों में विरोध-प्रदर्शन

वहीं यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर तीखा विरोध प्रदर्शन जारी है। मंगलवार को भी प्रदेश के अलीगढ़, संभल, कुशीनगर और अन्य जिलों में यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसमें छात्र समूहों और संगठनों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव का आरोप लगाया। कई जगह प्रदर्शनकारियों ने यूजीसी का पुतला भी जलाया और पीएम मोदी के खिलाफ नारे लगाए। साथ ही चेतावनी दी कि अगर केंद्र सरकार ने नियमों को रद्द करने की उनकी मांग नहीं मानी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

सर्वण छात्रों को पहले ही दोषी मानने का आरोप

नए नियमों का विरोध कर रहे पक्ष का कहना है कि इसमें सर्वण छात्रों को पहले ही दोषी मान लिया गया है। उनका कहना है कि यूजीसी के नए नियमों के लागू होने पर सवर्ण छात्रों का उत्पीड़न होगा, जिससे वे कई मौकों से वंचित हो जाएंगे। विरोध करने वालों का दावा है कि यह एक्ट सवर्णों को अच्याचारी मानने वाला है। इसमें झूठी शिकायत करने पर कोई सजा नहीं है। इससे सवर्ण छात्रों पर फर्जी आरोप लगेंगे। इसमें भेदभाव की परिभाषा सवर्ण छात्रों के खिलाफ है। साथ ही कमेटी में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व अस्पष्ट है।


बीजेपी के खिलाफ गुस्सा, सवर्ण सांसदों को भेजी गईं चूड़ियां

इधर यूजीसी की नई गाइडलाइन को लेकर बीजेपी के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। रायबरेली में बीजेपी किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गौरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने यूजीसी के नए नियमों पर चुप्पी के विरोध में सवर्ण सांसदों को चूड़ियां भेजी हैं। वहीं बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने नए नियमों के विरोध में इस्तीफा दे दिया। इधर बीजेपी के करीब माने जाने वाले कवि कुमार विश्वास ने भी यूजीसी के नए नियमों को लेकर सरकार पर तंज कसा है।

धर्मेंद्र प्रधान ने दी सफाई

यूजीसी के नए नियमों को लेकर बढ़ते विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस मामले पर सफाई देने की कोशिश की। प्रधान ने कहा कि किसी को भी इसका गलत इस्तेमाल करने का अधिकार नहीं होगा। किसी के भी साथ अत्याचार या भेदभाव नहीं होगा। प्रधान ने कहा कि मैं विनम्रतापूर्वक सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी को भी किसी प्रकार के उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोई भेदभाव नहीं होगा और किसी को भी भेदभाव के नाम पर इस नियम का दुरुपयोग करने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चाहे यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, उनकी जिम्मेदारी है। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि यह भारत के संविधान के दायरे में ही होगा।

चंद्रशेखर आजाद ने बिल को बताया जरूरी

यूजीसी की ओर से लागू किए गए 'उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026' पर जारी विवाद पर भीम आर्मी के प्रमुख और आजाद समाज पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि जिन लोगों को लगता था कि कमजोर वर्ग के बच्‍चों से भेदभाव करना उनका जन्‍मसिद्ध अधिकार है, उन्हीं लोगों को दिक्‍कत हो रही है। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आज भी एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोग देश में सबसे ज्यादा शोषण झेल रहे हैं। टैक्स भी दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं को लेकर कोई गंभीरता से बात नहीं करता।

चंद्रशेखर आजाद ने दावा किया कि यूजीसी की नई गाइडलाइन में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसका विरोध किया जाए। उल्टा, इस गाइडलाइन के उद्देश्यों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को शामिल किया गया है, जिससे ईडब्ल्यूएस वर्ग के बच्चों को भी लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी के भीतर सामाजिक न्याय की वास्तविक भावना है, तो वह एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के पक्ष में ही हो सकती है। उन्होंने यूजीसी नियमों के विरोध को निराधार बताते हुए कहा कि यह कमजोर वर्गों के हित में लाया गया है और इसका विरोध करना सामाजिक न्याय के खिलाफ है।


क्या हैं यूजीसी के नए नियम

बता दें कि केंद्र सरकार ने 13 जनवरी को यूजीसी के नए नियम- 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026' अधिसूचित किए हैं जिनके तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए भेदभाव की शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए समता समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें गठित करना अनिवार्य है। इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि इन समितियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल होने चाहिए। पिछले साल फरवरी में प्रतिक्रिया के लिए नियमों का एक मसौदा सार्वजनिक किया गया था। ये टीमें खासतौर पर एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। इसी नियम को लेकर देश में विरोध तेज होता जा रहा है।

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