कोरोना काल में गुजरात की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त, अस्पतालों के शव गृह में सड़ रही हैं लाशें

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में पीएम नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही हैं। शव गृहों में लाशें सड़ रही हैं, अस्पतालों के बाहर मरीज एंबुलेंस में इंतजार कर रहे हैं।

File Photo (courtesy: Twitter/ @iamasjadraza7)
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नचिकेता देसाई

शव गृहों में लाशें सड़ रही हैं, गंभीर रूप से बीमार कोरोना मरीज अस्पतालों के बाहर लाइनों में लगी एंबुलेंस में ऑक्सीजन के लिए तरस रहे हैं, उद्योग, बाजार स्वेच्छा से बंद हैं, बड़ी तादाद में प्रवासी मजदूरों का पलायन हो रहा है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में यह हाल है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात का।

भले ही सरकारी आंकड़ों में कोरोना से हुई मौतौं की संख्या 5000 के आसपास हो, लेकिन स्थानीय मीडिया की खबरों के देखें तो अंदाज़ा लगता है कि यह संख्या दोगुने से कहीं अधिक है।

हालात इतने खराब है कि गुजराती अखबार और टीवी चैनल जो मोटे तौर पर सरकार का पक्ष लेने वाले समझे जाते रहे हैं, वे भी अब इन भयावह हालात की खबरें लिख-दिखा रहे हैं और इससे स्पष्ट होता है कि गुजरात में स्वास्थ्य सेवा का सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

गुजरात के सरकारी अस्पतालों में बेड भर चुके हैं, और यह बात खुद डिप्टी चीफ मिनिस्टर नितिन पटेल भी मानते हैं। वे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री भी हैं। उन्होंने निजी अस्पतालों से अपील की है कि वे कोरोना बेड उपलब्ध कराएं।

जहां सरकार और स्थानीय निकाय अपना कर्तव्य निभाने में नाकाम दिख रहे हैं वहीं सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं इस संकट की घड़ी में लोगो के लिए अपने दरवाजे खोल रही हैं। उन्होंने धार्मिक स्थलों को कोविड केयर सेंटर में बदलना शुरु कर दिया है।

मसलन वडोदरा में जहांगीरपुरा की एक मस्जिद को 50 बिस्तरों वाले कोविड केयर सेंटर में तब्दील कर दिया गया है। यहां ऑक्सीजन, जीवन रक्षक दवाएं और डॉक्टरों की टीम, नर्सें और पैरामेडिकल स्टाफ मरीजों की देखभाल में जुटा है।

उधर अस्पतालों की तरह ही श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों में भी रात दिन शवों के अंतिम संस्कार और दफ्नाने का काम चल रहा है। इतनी बड़ी संख्या में कभी श्मशानों और कब्रिस्तानों में शव नहीं आए। अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, भरुच, राजकोट, जामनगर, भावनगर, मेहसाणा, पाटन और भुज में ऐसे ही हालात हैं। श्मशानों के बाहर अंतिम संस्कार के लिए शवों की कतारें लगी हैं।

जिन लोगों की मौत कोविड से हो रही है, उनके शव परिजनों को न सौपंकर अस्पतालों द्वारा अंतिम संस्कार के लिए ले जाए जा रहे हैं। शवों का पोस्टमार्टम करने में 24 से 36 घंटे का समय लग रहा है।

रविवार को वलसाड में उस समय अजीव स्थिति पैदा हो गयी जब सिविल अस्पताल में करीब 30 लाशें सड़ने लगीं। ये शव बीते तीन दिन से यहां रखे थे। आखिर इन शवों को अस्पताल की तरफ से अंतिम संस्कार के लिए आधी रात में ले जाया गया।

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