हिन्दू संगठनों की धमकी से गांधी पर कार्यक्रम रद्द, पुणे के कॉलेज ने तुषार गांधी का लेक्चर किया कैंसिल

तुषार गांधी ने कहा है कि पुणे के मॉर्डन कॉलेज को हिंदूवादी संगठन की धमकी के बाद बापू की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में प्रस्तावित कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा है, जिसमें उन्हें शामिल होना था और अपना लेक्चर देना था। संगठन ने कार्यक्रम बाधित करने की धमकी दी थी

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलने से गांधी जी के ही पोते को रोक दिया गया है। यह मामला पुणे का है, जहां के मॉर्डन कॉलेज में शुक्रवार को गांधी जी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम रखा गया था। इस कार्यक्रम में महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी को भी लेक्चर देना था। लेकिन हिंदूवादी संगठनों की धमकी के बाद अचानक से कॉलेज ने इस कार्यक्रम को ही रद्द कर दिया।

तुषार गांधी ने खुद ट्विट कर इसकी जानकारी दी है। उन्होंने ट्वीट में कहा, “मॉर्डन कॉलेज पुणे को धमकियों के बाद जबरन अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। यह कार्यक्रम बापू की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित होना था। इसे इसलिए रद्द करना पड़ा क्योंकि मैं इसमें शामिल होने वाला था। पतितपावन संस्था ने मेरे शामिल होने पर कार्यक्रम को बाधित करने की धमकी दी थी।”

पूरे विवाद पर मॉडर्न कॉलेज के अधिकारियों ने माना कि उन्हें कार्यक्रम के खिलाफ कई संगठनों से पत्र मिले थे, लेकिन ये भी कहा कि उन्होंने ‘शांतिपूर्ण विरोध’ की चेतावनी दी थी। कॉलेज ने आगे सफाई देते हुए कहा है कि कॉलेज में चल रही प्रैक्टिकल परीक्षाओं और परिसर में 1000 से अधिक छात्रों की मौजूदगी को देखते हुए तुषार गांधी के लेक्चर को रद्द करने का फैसला किया गया, क्योंकि अगर परिसर में हिंसा हुई तो छात्रों पर खतरा हो सकता है और उनका बाहर निकलना मुश्किल हो सकता है।

पुणे स्थित मॉडर्न कॉलेज का संचालन प्रोग्रेसिव एजुकेशन सोसाइटी के तहत होता है। सोसायटी के अध्यक्ष गजानन एकबोटे ने मामले पर कहा कि मंगलवार की दोपहर कुछ छात्रों ने प्रिंसिपल संजय खरात से मिलकर तुषार गांधी के कुछ वीडियो क्लिप दिखाए और दावा किया कि उनके भाषण राजनीतिक रूप से प्रेरित होते हैं। ऐसे में वर्तमान में सीएए और एनआरसी को लेकर जारी विरोध को देखते हुए उनका भाषण लोगों को उकसा सकता है। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि कॉलेज के फंड का इस्तेमाल राजनीतिक कार्यकर्मों के लिए नहीं होना चाहिए।


गौरतलब है कि पूरा देश राष्ट्रपिता गांधी की 150वीं जयंती वर्ष मना रहा है। केंद्र की मोदी सरकार और खुद पीएम मोदी बड़े धूमधाम से अखबारों और सरकारी कार्यकर्मों में बीते एक साल से गांधी जी के विचारों और जीवन को सलाम करते रहे हैं। ऐसे में जो गांधी जी जीवन भर अहिंसा और असहमति के सम्मान की बात करते रहे, उन्ही की जयंती के उलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में उनके पड़पोते के शामिल होने पर हिंसा की धमकी दिया जाना और इसको लेकर कार्यक्रम ही रद्द कर देना दुखद है।

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