पंजाब में 3 लाख कर्मचारियों का आंदोलन, दो दिन की सामूहिक छुट्टी पर गए, पुरानी पेंशन और DA समेत कई मांगें

पंजाब में आज से 22 अक्टूबर तक करीब 3 लाख सरकारी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। DA, पुरानी पेंशन और नियमितीकरण की मांगों के बीच इस आंदोलन का असर सरकारी दफ्तरों और बस सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका है।

फोटो: सोशल मीडिया
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  • पंजाब में करीब 3 लाख सरकारी कर्मचारी आज से 22 अक्टूबर तक सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर।

  • कर्मचारियों के आंदोलन से सरकारी दफ्तरों, पंजाब सिविल सचिवालय और रोडवेज बस सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका।

  • कर्मचारी लंबित महंगाई भत्ते के भुगतान, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग कर रहे हैं।

  • पंजाब रोडवेज और PRTC के संविदा कर्मचारी भी नियमित किए जाने की मांग उठा रहे हैं, जिससे बस संचालन प्रभावित हो सकता है।

पंजाब में अपनी मांगों को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने आंदोलन तेज कर दिया है। राज्य के करीब तीन लाख कर्मचारी आज से 22 अक्टूबर तक यानी दो दिन सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे। इस दो दिवसीय आंदोलन से सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। इसका असर चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के साथ सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर सरकार से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने दो दिन काम से दूर रहकर प्रदर्शन करने का फैसला किया है। आज कर्मचारी पंजाब सिविल सचिवालय में धरना देकर अपनी मांगें उठाएंगे।

DA, पुरानी पेंशन और नियमितीकरण की मांग

सिविल सचिवालय की जॉइंट एक्शन कमिटी के महासचिव साहिल शर्मा ने कहा कि करीब 3 लाख कर्मचारी दोनों दिन सामूहिक आकस्मिक अवकाश पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की घोषणा पहले ही की जा चुकी है और कर्मचारी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे।

साहिल शर्मा के मुताबिक, कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, लंबित महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करना शामिल है। इसके अलावा, प्रोबेशन पीरियड के दौरान वेतन से जुड़े मुद्दों का समाधान करने की भी मांग की जा रही है।


18% DA की मांग, 8% देने की बात पर नाराजगी

महंगाई भत्ते को लेकर भी कर्मचारियों और सरकार के बीच मतभेद सामने आए हैं। साहिल शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को 18 प्रतिशत DA दिया जाना चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान से हाल में हुई मुलाकात के बाद केवल 8 प्रतिशत महंगाई भत्ता दिए जाने की बात सामने आई। कर्मचारी इसे अपनी मांगों के मुकाबले अपर्याप्त मान रहे हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। आज सचिवालय में होने वाला धरना इसी दबाव की रणनीति का हिस्सा है। सामूहिक अवकाश के चलते अलग-अलग सरकारी विभागों में कामकाज धीमा पड़ सकता है और लोगों को अपने जरूरी सरकारी काम निपटाने में परेशानी हो सकती है।

पंजाब रोडवेज और PRTC की बस सेवाओं पर भी असर की आशंका

आंदोलन का असर सरकारी दफ्तरों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। पंजाब रोडवेज और पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) की बस सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इन परिवहन सेवाओं में काम करने वाले संविदा चालक, परिचालक और मैकेनिक नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं।

कर्मचारियों के आंदोलन से राज्य के प्रमुख मार्गों पर बसों की उपलब्धता कम हो सकती है। इससे रोजाना बसों से यात्रा करने वाले नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और अन्य यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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