नफ़रत के खिलाफ 'दीपक' बनते लोग

'बांटो और राज करो’ की राजनीति से परेशान लोग अब खुलकर प्रतिरोध करने सामने आ रहे हैं।

जान मोहम्मद के निलंबन के खिलाफ मथुरा बीएसए के दफ्तर पर विरोध करते आमजन
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तसलीम खान

कोटद्वार में जिम चलाने वाले दीपक कुमार एक मुस्लिम दुकानदार को धमकाने आए बजरंग दल के लोगों के सामने जिस तरह 'मोहम्मद' दीपक बनकर तन गए और अब भी झुकने को तैयार नहीं हैं, और जिस तरह लोग उनके समर्थन में लगातार सामने आ रहे हैं, लगता है, उसने देश के विभिन्न प्रदेशों में नफ़रत की राजनीति से उकता चुके लोगों को प्रेरणा दी है।

उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले के नौहझील प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक जान मोहम्मद का मामला ही लीजिए। उन्हें एक स्थानीय बीजेपी नेता की एक झूठी शिकायत के आधार पर बिना जांच-पड़ताल ही निलंबित कर दिया गया। इसमें कोई आश्चर्य नहीं था क्योंकि यूपी की यही पहचान बन गई है। नई बात यह हुई कि इलाके के लोग इसके खिलाफ खड़े हो गए और प्रशासन को अपना फैसला बदलने पर होना पड़ा।

यह स्कूल जिस ग्राम पंचायत में है, वहां की आबादी लगभग 20 हजार है। यह हिन्दू बहुल इलाका है। लेकिन फिर भी इलाके के लोगों ने शिक्षक जान मोहम्मद का खुलकर साथ दिया। इलाके के तीन-चार सौ लोग जिलाधिकारी से मिलने गए। ध्यान रहे कि इस स्कूल में जान मोहम्मद के अलावा सभी सात शिक्षक हिन्दू हैं। इनमें दो ‘शिक्षा मित्र’ भी हैं। 

मांट विधानसभा से 8 बार के पूर्व विधायक श्यामसुंदर शर्मा कहते हैं कि जान मोहम्मद ने 12 साल तक अर्धसैनिक बल में सेवा की। वह 17 साल से यहां हैं और उनके अनुशासन की वजह से छात्र उनका आदर करते हैं, शिक्षक भी उनके साथ स्नेह रखते हैं। इसलिए अचानक किए गए उनके निलंबन ने सबको चौंकाया।

दरअसल, उन्हें बीजेपी के बाजना मंडल अध्यक्ष और नौशेरपुर निवासी दुर्गेश प्रधान की शिकायत के आधार पर निलंबित किया गया था। इसमें कहा गया था कि जान मोहम्मद बच्चों को बहला-फुसलाकर इस्लाम का प्रचार करते हैं, उसे अपनाने के प्रति प्रेरित करते हैं, उनका ब्रेनवाश करके नमाज पढ़वाते हैं, और हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करते हैं। यह भी कहा गया था कि जान मोहम्मद सुबह-सुबह विद्यालय में राष्ट्रगान, जन गण मन, का भी गायन नहीं कराते और अगर बच्चे करने लगें तो उनको धमकाते हैं। यह भी कि स्कूल में दूर-दूर से मुस्लिम तब्लीगी आते हैं और वे भी बच्चों के साथ उनके परिजनों पर इस्लाम धर्म अपनाने के लिए जोर देते हैं।

इस शिकायत के आधार पर 31 जनवरी 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने बिना किसी जांच के 24 घंटे के भीतर जान मोहम्मद को निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की जांच के लिए दो-सदस्यीय समिति का गठन किया गया और इसे एक महीने का समय दिया गया।  


लोग इस निलंबन के खिलाफ आंदोलन पर उतर आए और जिलाधिकारी से मिले। पूर्व विधायक श्यामसुंदर शर्मा ने प्रशासन को भी बताया कि अभी चल रहे एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के दौरान जान मोहम्मद बीएलओ थे। बीजेपी विधायक राजेश चौधरी ने जान मोहम्मद को मतदाताओं की एक सूची दी और उनके नाम हटाने को कहा। पर उन्होंने बिना उचित कारण किसी भी मतदाता का नाम काटने से मना कर दिया। इस पर विधायक चौधरी ने उन्हें देख लेने की धमकी दी। विधायक की इस धमकी के बाद ही पार्टी के स्थानीय नेता दुर्गेश प्रधान ने जान मोहम्मद के खिलाफ झूठी शिकायत की।

जनआंदोलन का असर यह हुआ कि प्रशासन ने निलंबन के तीन दिन बाद ही 3 फरवरी को एक नया आदेश जारी करते हुए जांच कमिटी को तीन दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा। इसके बाद 6 फरवरी को प्रशासन ने नया आदेश जारी करते हुए कहा कि जांच में जान मोहम्मद पर लगाया गया कोई भी आरोप सच नहीं पाया गया, इसलिए उन्हें सवेतन बहाल किया जाता है।

जान मोहम्मद अब भी मीडिया से बात नहीं करना चाहते। वह कहते हैं कि उनके नाम पर राजनीति न हो, वह अपनी लड़ाई खुद लड़ लेंगे। वैसे स्थानीय निवासी देवदत्त पाठक कहते हैं कि जनता जान मोहम्मद के साथ नहीं खड़ी होती, तो उनकी बहाली नहीं होती, प्रशासन को जनता की ताकत के आगे झुकना पड़ा।

लेकिन गौरतलब यह है कि बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए, मतलब अपने स्तर पर प्राथमिक जांच किए बिना ही, जान मोहम्मद को निलंबित करने वाले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। झूठी शिकायत करने वाले स्थानीय बीजेपी नेता दुर्गेश प्रधान पर तो, खैर, क्या ही कार्रवाई होनी है, इस प्रकरण पर बीजेपी विधायक राजेश चौधरी ने खेद तक प्रकट करने की जरूरत महसूस नहीं की है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ‘कहो नरेंदर मजा आ रहा’ गाना आपने सुना होगा। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के छात्र संगठन दिशा से जुड़े प्रियांशु ने इसे गाया है। दिशा कैंपस में सांस्कृतिक तौर पर सक्रिय है और फिल्म शो, स्टडी सर्कल, परिचर्चा और गीतों के जरिये युवाओं के मुद्दों को स्वर दे रहा है।

यूजीसी रेगुलेशन के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्टे लगाए जाने के बाद दिशा से जुड़े छात्रों ने कैंपस के बरगद लॉन में 3 फरवरी को एक परिचर्चा का आयोजन किया। जब विचार-विमर्श चल रहा था, उसी दौरान 30-40 अराजक तत्व इन छात्रों के इर्द-गिर्द इकठ्ठा होने लगे। इसी समय विश्वविद्यालय के मेन गेट से बिना नंबर की एक गाड़ी अंदर आई, जिस पर बजरंग दल लिखा था। इसमें सवार लोगों ने पहले चंद्रप्रकाश नाम के छात्र को बाहर बुलाया और उसका कॉलर पकड़कर मारपीट करने लगे। इस पर कुछ छात्रों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की लेकिन वे लोग गाली-गलौच करते हुए जातिसूचक गालियां देने लगे। आरोप है कि छात्राओं के साथ भी इन लोगों ने बदतमीजी की। इन सबके बीच विश्वविद्यालय प्रशासन मूकदर्शक बना रहा जबकि आसपास सेक्योरिटी गार्ड भी थे।


छात्र इस आशंका से इनकार नहीं करते कि 'कहो नरेंदर मजा आ रहा' गीत के वायरल होने की वजह से इस किस्म की घटना हुई; संभव है कि यह भी एक वजह हो। यूनिवर्सिटी के ही छात्र प्रियांशु कहते हैं कि हम लोगों ने स्थानीय थाने पर एफआईआर के लिए शिकायती पत्र दिया है, लेकिन इंचार्ज कहते हैं कि जब तक यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट नहीं आएगी, मामला दर्ज नहीं करेंगे। वैसे, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने निधि और भावेश दुबे नामक छात्रों को निलंबित कर दिया है। साथ ही निष्कासन का ‘कारण बताओ’ नोटिस भी जारी किया गया है।

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय में प्रवेश से पहले परिचय पत्र दिखाना लगभग अनिवार्य है। ऐसे में, एक विशेष संगठन की चारपहिया गाड़ी का धड़ल्ले से परिसर में घुसना आश्चर्य ही है। जब घटना हो रही थी, तब तक प्रॉक्टर वहां आ चुके थे, पर उन्होंने इन अराजक तत्वों को वहां से भाग जाने का मौका दिया और पीड़ित छात्रों को ही अपने ऑफिस लेकर चले गए।

14 फरवरी, वैलेंटाइंस डे, को जयपुर से एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में कुछ युवक गले में भगवा पट्टा डाले और हाथों में डंडा लिए पार्क में घूमते दिखाई दिए। वे पार्क में बैठे हुए युवक-युवतियों से उनका धर्म और आपसी संबंध पूछते हैं और उन्हें धमकाते हैं। इसी दौरान पार्क में मौजूद कुछ युवक उन्हें घेर लेते हैं और उनसे आईडी दिखाने की मांग करते हैं। पूछते हैं: “तुम क्या पुलिस वाले हो? या किस संगठन से हो? कौन है तुम्हारा लीडर?” पलट-जवाब सिर्फ यह कि “यह पट्टा देखो, बजरंग दल से हैं”। लेकिन पार्क में मौजूद लोगों के सवालों का दबाव इतना बना कि उन्हें उल्टे पैर भागना पड़ा।   

ऐसा ही एक वीडियो वाराणसी से भी सामने आया जहां पुलिस-प्रशासन का साधारण रवैया सांप्रदायिक शक्तियों को ही प्रोत्साहन दे रहा है। लेकिन उनके रंग-ढंग से ऊब गए लोग यहां भी सामने आ रहे हैं। वाराणसी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का संसदीय इलाका है। यहां 60 साल पुरानी बकरा मंडी है। स्थानीय गोट मीट यूनियन के लीगल एडवायजर अब्दुल्ला बताते हैं कि कुछ लोगों ने अफवाह फैला दी कि मंडी में गौकशी हो रही है। इसकी जांच करने के नाम पर कुछ लोग दुकानदारों के लाइसेंस चेक करने के लिए यहां पहुंच गए। ये दो दर्जन लोग खुद को अधिकारी बता रहे थे। स्थानीय निवासी आदिल खान कहते हैं कि मंडी से हजारों लोगों का कारोबार जुड़ा है। अफवाह फैलाकर लोगों की रोजी-रोटी के खिलाफ साजिश हो रही है।

ग़नीमत कि यहां भी कुछ लोग प्रतिवाद में खड़े हुए और इन ‘अधिकारियों’ को रास्ता नापने पर मजबूर किया।

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