राफेल पर कांग्रेस ने तेज़ की हमलों की धार, कहा जेपीसी से कम पर कोई समझौता नहीं, विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया

राफेल कोलेकर सरकार और विपक्ष के बीच जंग जारी है। कांग्रेस ने और हमलावर होते हुए सरकारके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार नेसुप्रीम कोर्ट को और संसद को गुमराह किया है।

फोटो : सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आज़ाद ने बताया कि, “ये सरकार, जो सुप्रीम कोर्ट से झूठ बोल सकती है, गलत एफिडेविट भेज सकती है और सुप्रीम कोर्ट के द्वारा पूरे संसद और पूरे देश को गुमराह कर सकती है, उस सरकार पर हमारा कोई विश्वास नहीं है।“ उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का, और खास तौर से कानून मंत्री के खिलाफ नोटिस दिया है। आज़ाद का कहना है कि जो जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी गई वह भले ही लॉ ऑफिसर ने दी हो, लेकिन उस जांचा परखा तो कानून मंत्रालय ने ही था।

गुलाम नबी आज़ाद ने दोहराया कि न ही सीएजी ने राफेल की कीमत की जानकारी पीएसी को दी और न ही पीएसी ने ऐसी किसी रिपोर्ट को देखा, ऐसे में राफेल की कीमत सार्वजनिक होने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। उन्होंने कहा कि, “भारत के इतिहास में पहली बार हुआ है कि केन्द्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को गलत एफिडेविट देती है और गुमराह करती है और उसी के आधार पर फैसला आ जाता है।“

उन्होंने कहा कि, “राज्यसभा के माननीय चेयरमैन और लोकसभा में स्पीकर इस नोटिस को स्वीकार करें। इसके साथ ही हमारी जो जेपीसी की हमारी मांग रही है, वो और भी जरुरी हो गई है।“

उन्होंने कहा कि, “पूर्व में भी संयुक्त संसदीय समितियों का गठन हुआ है। अब तक बनी कुल 6 जेपीसी में कई तो छोटे-छोटे मामले थे, लेकिन इस बार तो हज़ारों करोड़ के घोटाले की बात है, ऐसे में अगर इस पर जेपीसी नहीं बनेगी तो किस पर बनेगी।“

इस बीच कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि, “जब राफेल की कीमत का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठा था तो सरकार ने कहा कि हम कीमतें सार्वजनिक नहीं कर सकते, इस पर सुप्रीम कोर्ट बंद लिफाफे में कीमतें देने की बात की थी। इस पर सरकार ने बंद लिफाफे में शपथपत्र के साथ जो जानकारी कोर्ट को दी, उसी आधार पर कोर्ट ने फैसला सुना दिया। लेकिन वह जानकारी गलत साबित हुई।”

प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि विशेषाधिकार हनन का अर्थ क्या है, उसका संदर्भ क्या है। उन्होंने कहा कि, “सरकार पर हमारा आरोप है कि उसने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट जैसी संस्था को गुमराह किया। सरकार ने उसे बरगलाने, बहकाने और भटकाने की कोशिश की। यह न सिर्फ कोर्ट की अवमानना है बल्कि शपथ लेकर झूठ बोलने का मामला है।”

उन्होंने कहा कि, “विशेषाधिकार नोटिस का मकसद पीएसी और सीएजी का नाम लेकर झूठ बोला गया। पीएसी संसद का अभिन्न अंग है। इसलिए यह सीधा सीधा संसद के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मामला है।“

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