राफेल के लिए दसॉल्ट एविएशन से पीएमओ और एनएसए ने सीधे की सौदेबाज़ी और नहीं ली बैंक गारंटी: ‘द हिंदू’ का खुलासा

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट उस पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहा है कि राफेल सौदे पर आए फैसले पर दोबारा विचार हो या न हो, दूसरी तरफ अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने इसी सौदे से जुड़ी एक खबर प्रकाशित की है कि मोदी सरकार ने दसॉल्ट एविएशन को फायदा पहुंचाया।<b></b>

Photo: Getty Images
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नवजीवन डेस्क

बुधवार को प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार ने फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन को कुछ ऐसी छूट दी हैं, जो पिछले प्रस्तावित सौदे में नहीं थी। द हिंदू ने जुलाई 2016 में सरकार की निगोशिएटिंग टीम (सौदा करने वाली टीम) की फाइनल रिपोर्ट का हवाला दिया है। यह रिपोर्ट फ्रांस और भारत सरकार के बीच हुए 36 राफेल विमानों की खरीद के समझौते के दो महीने पहले दाखिल की गई थी। भारत ने सितंबर 2016 में राफेल सौदे को अंतिम रूप दिया था।

द हिंदू का दावा है कि उसने निगोशिएटिंग टीम की फाइनल रिपोर्ट देखी है। इसी के आधार पर वरिष्ठ पत्रकार एन राम ने खबर प्रकाशित की है। इस खबर में कुछ अहम बिंदु उठाए गए हैं:

  • फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन जब 126 विमानों के सौदे की बात कर रही थी तो वह बैंक गारंटी देने को तैयार थी, लेकिन मोदी सरकार के साथ हुए सौदे में उसने बैंक गारंटी देने से इनकार कर दिया
  • फ्रांस ने इस सौदे में किसी संप्रभु गारंटी (सोवरीन गारंटी) देने से भी इनकार कर दिया, हालांकि दिसंबर 2015 में कानून मंत्रालय ने इस गारंटी को अहम बताया था
  • सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने बैंक गारंटी की शर्त को खत्म कर दिया था
  • सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने सिर्फ ‘लेटर ऑफ कम्फर्ट’ को मान लिया था, जिसकी कोई कानूनी वैधता नहीं था और इससे भारतीय पक्ष कमजोर होता है
  • बैंक गारंटी ने लेने के कारण विमानों की जो कीमत निकलकर आई है वह करीब 2000 करोड़ रुपए ज्यादा है

द हिंदू की रिपोर्ट में एन राम ने लिखा है कि राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) दिसंबर 2015 के बाद से अलग से बात कर रहे थे। पीएमओ और एनएसए के दखल के चलते राफेल सौदे की बात कर रही भारतीय टीम का पक्ष कमजोर हुआ। नतीजतन जब भारतीय निगोशिएटिंग टीम ने मार्च 2016 में फ्रांस से बैंक गारंटी की मांग की और कानून मंत्रालय की सलाह का हवाला दिया, तो फ्रांसीसी पक्ष इस मुद्दे से हट गया और उसने जनवरी 2016 में हुए एक एमओयू (सहमति पत्र) की बात की और इस मामले में औपचारिक बातचीत पीएमओ से करने पर जोर दिया।

अखबार की रिपोर्ट ने इस बात का भी जिक्र किया है कि मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसने राफेल सौदा पहले से बेहतर शर्तों पर किया है। इसी दावे का जिक्र सीएजी ने राफेल सौदे से जुड़ी रिपोर्ट में भी किया है।

लेकिन, सीएजी रिपोर्ट ने यह भी कहा था, “2007 के प्रस्ताव में दसॉल्ट एविएशन ने वित्तीय और प्रदर्शन गारंटी (फाइनेंशियल एंड पर्फार्मेंस गारंटी) की पेशकश की थी और इसकी कीमत सौदे में जोड़ी गई थी। लेकिन 2015 के प्रस्ताव में किसी भी बैंक गारंटी का जिक्र नहीं है। ऐसे में सौदे से विमान बेचने वाली कंपनी को कुल बचत करीब ‘एएबी3 मिलियन यूरो’ हुई है। मंत्रालय ने ऑडिट गणना में माना है कि बैंक गारंटी न मिलने से रक्षा मंत्रालय को बचत हुई है। लेकिन, ऑडिट का मानना है कि इससे दरअसल दसॉल्ट एविएशन को फायदा हुआ है।“

रिपोर्ट में द हिंदू ने कहा कि, “बैंक गारंटी न लिए जाने का एक पहलू यह भी है कि ऐसे में सौदे का 60 फीसदी पैसा एडवांस में देना होगा। यह भुगतान सौदे पर हस्ताक्षर के 18 महीनों के भीतर करना होगा, जो कि मार्च 2018 तक है। हालांकि पहला राफेल विमान 36 महीने बाद सिंतबर 2019 में आना है।”

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