शायर राहत इंदौरी नहीं रहे, कोरोना के बाद दिल का दौरा पड़ने से निधन, राहुल गांधी समेत कई हस्तियों ने जताया दुख

राहत इंदौरी के निधन की खबर से देश के साहित्य जगत से लेकर राजनीति, सामाजिक और मनोरंजन जगत तक स्तब्ध रह गया है। दिग्गज नेताओं से लेकर पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और बॉलीवुड की हस्तियां शोक जाहिर कर रही हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी श्रद्धांजलि दी है।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

उर्दू के मशहूर शायर राहत इंदौरी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। वो कोरोना से भी संक्रमित थे। कोराना जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें इंदौर के ऑरबिंदो हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। इसकी जानकारी खुद उन्होंने आज दिन में ट्वीट कर दी थी। लेकिन शाम को उनके निधन की खबर आ गई। उनके परिवार ने उनके ट्विटर हैंडल से उनके निधन की खबर की पुष्टि की है।

इससे पहले आज दिन में खुद के कोरोना पॉजिटिव होने पर इंदौर के अस्पताल में भर्ती होने की खबर देते हुए उन्होंने ट्वीट किया था, “कोविड के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है। ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूं, दुआ कीजिये जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूं। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।”

राहत इंदौरी के निधन की खबर से देश का राजनीति, सामाजिक से लेकर मनोरंजन जगत तक स्तब्ध रह गया है। उनकी मौत के बाद तमाम दिग्गज नेताओं से लेकर पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता और बॉलीवुड की हस्तियां शोक जाहिर कर रही हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राहत इंदौरी का एक शे’र साझा करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने लिखा, “अब ना मैं हूं ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे…” अलविदा, राहत इंदौरी साहब।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राहत इंदौरी के निधन पर दुख जताया। उन्होंने कहा, “…राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें, रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो, एक ही नदी के हैं ये दो किनारे दोस्तों, दोस्ताना ज़िंदगी से, मौत से यारी रखो”। राहत जी आप यूं हमें छोड़ कर जाएंगे, सोचा न था। आप जिस दुनिया में भी हों, महफूज़ रहें, सफर जारी रहे।” वहीं, मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी राहत इंदौरी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए परिवार और उनके चाहने वालों के लिए सब्र की दुआ की है। उन्होंने लिखा,

केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी दुख जताते हुए लिखा, “मक़बूल शायर राहत इंदौरीजी के गुज़र जाने की खबर से मुझे काफ़ी दुख हुआ है। उर्दू अदब की वे क़द्दावर शख़्सियत थे।अपनी यादगार शायरी से उन्होंने एक अमिट छाप लोगों के दिलों पर छोड़ी है।आज साहित्य जगत को बड़ा नुक़सान हुआ है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके चाहने वालों के साथ हैं।” वहीं दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी ट्वीट कर कहा, “अलविदा राहत इंदौरी साहब! देश की एक बेबाक़ आवाज़ चली गई। “सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में, किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है…”। उनका जाना हम सबके लिए बेहद दुखद है।”

राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को इंदौर में हुआ था। उनके पिता रिफअत उल्लाह सोनकछ, देवास जिले से 1942 में इंदौर आ गए थे। राहत साहब के बचपन का नाम कामिल था। बाद में नाम बदलकर राहत उल्लाह कर दिया गया। राहत इंदौरी का बचपन बेहद मुफलिसी में गुजरा। इंदौर आने के बाद उनके पिता ऑटो चलाया करते थे। उसके बाद उन्होंने मिल में मजदूरी भी की। आगे चलकर हालात इतने खराब हो गए कि राहत इंदौरी के परिवार को बेघर भी होना पड़ा।

लेकिन तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए राहत इंदौरी ने बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी से उर्दू में एमए किया। आगे चलकर भोज यूनिवर्सिटी ने उन्हें उर्दू साहित्य में पीएचडी से नवाजा था। बहुत कम लोगों को मालूम है कि राहत इंदौरी ने ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘मीनाक्षी’, ‘खुद्दार’, ‘नाराज’, ‘मर्डर’, ‘मिशन कश्मीर’, ‘करीब’, ‘बेगम जान’, ‘घातक’, ‘इश्क’, ‘जानम’, ‘सर’, ‘आशियां’ और ‘मैं तेरा आशिक’ जैसी फिल्मों के गीत लिखे थे।

Published: 11 Aug 2020, 7:16 PM
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