राहुल गांधी ने उठाया मनरेगा मजदूरों का मुद्दा, बोले- सिर्फ बातों की है मोदी सरकार, कुचल रही गरीबों के अधिकार

राहुल गांधी ने मनरेगा मजदूरों का मद्दा उठाते हुए कहा कि पहले किया तुगलकी लॉकडाउन, करोड़ों मजदूरों को सड़क पर ले आए। फिर उनके एकमात्र सहारे मनरेगा की कमाई को बैंक से निकालना दूभर किया। सिर्फ बातों की है मोदी सरकार, कुचल रही गरीबों के अधिकार।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

मीडिया रिपोर्ट्स में एक सर्वे के हवाले से कहा गया है कि देश में मनरेगा मजदूरों को अपनी दिहाड़ी का पैसा निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इस खबर पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “पहले किया तुगलकी लॉकडाउन, करोड़ों मजदूरों को सड़क पर ले आए। फिर उनके एकमात्र सहारे मनरेगा की कमाई को बैंक से निकालना दूभर किया। सिर्फ बातों की है मोदी सरकार, कुचल रही गरीबों के अधिकार।”

रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा के तहत महज 202 रुपये की दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों को अपनी रकम को निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। LibTech India की ओर से किए गए एक सर्वे में कहा गया है कि 45 फीसदी मनरेगा मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें अपनी दिहाड़ी की रकम निकालने के लिए बैंकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इनमें से 40 फीसदी मजदूर ऐसे हैं, जिन्हें बायोमीट्रिक डिटेल्स मैच न करने के चलते कई बार बैंक और डाकघर से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, मामूली कमाई के रकम को हासिल करने के लिए मजदूरों को अपनी जेब से पैसे भी गंवाने पड़ रहे हैं। सर्वे के अनुसार, एक मजदूर का पोस्ट ऑफिस जाने का एक बार का खर्च 6 रुपये तक आता है। इसके अलावा बैंक विजिट पर करीब 31 रुपये और एटीएम तक जाने और कैश निकालने के लिए उन्हें 67 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। LibTech India की ओर से आंध्र प्रदेश समेत अन्य राज्यों में 1,947 मजूदरों पर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। मनरेगा मजदूरों की यह हालत तब है जब केंद्र सरकार की ओर से मनरेगा मजदूरों की दिहाड़ी के तत्काल भुगतान की तमाम कोशिशें की जा चुकी हैं। इन कोशिशों पर केंद्र की मोदी सरकार वाहवाही भी लूटती रही है।

Published: 20 Nov 2020, 11:48 AM
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