भारत जोड़ो यात्रा ने नफरत के खिलाफ पूरे देश को दिया है एक विकल्प जिसका राजनीति पर पड़ेगा असर - राहुल गांधी

राहुल गांधी ने साफ कहा कि देश में दो विजन हैं, एक बीजेपी-आरएसएस का विजन है, जो नफरत और अहंकार भरा है। और दूसरा विजन हमारा है जो मुहब्बत, भाईचारे, एक दूसरे इज्जत देने का विजन है। इसलिए राजनीति में इसका असर निश्चित रूप से पड़ेगा।

फोटो सौजन्य - @INCIndia
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नवजीवन डेस्क

भारत जोड़ो यात्रा 4000 किलोमीटर से अधिक का सफर पूरा कर कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने के बाद संपन्न हो गई। इसके बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने श्रीनगर में प्रेस को संबोधिता किया। उन्होंने साफ कहा कि यह यात्रा न तो कांग्रेस की यात्रा थी और न ही राहुल गांधी की यात्रा थी, बल्कि यह भारत की यात्रा थी।

उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में सवाल-जवाब की शुरुआत से पहले कहा कि, "भारत जोड़ो यात्रा श्रीनगर में समाप्त हुई, चलना खत्म हुआ। मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला, बहुत कुछ समझने को मिला। लाखों लोगों से मिला, बातचीत की। मेरे पास शब्द नहीं हैं आपको समझाने के लिए। यात्रा का लक्ष्य भारत को एक करने का था, जोड़ने का था। जो नफरत फैलाई जा रही है, हिंसा फैलाई जा रही है, उसके खिलाफ हमने यात्रा की और जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है।"

उन्होंने आगे कहा कि दरअसल शुरु में ऐसी उम्मीद नहीं थी कि इस यात्रा को लेकर लोगों में इतना उत्साह होगा। राहुल गांधी ने कहा कि देश के लोगों में जो लचीलापन है, उनकी ताकत है, वह सब सीधे देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि आज देश के हर तबके पर दबाव है, वह किसान हों, मजदूर हों, बेरोजगार युवा हों, छोटे व्यापारी हों, उनकी आवाज सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि, "मैं कह सकता हूं मेरी जिंदगी का सबसे गहरा और सबसे सुंदर एक्सपीरियंस रहा है।"

राहुल गांधी ने यात्रा में साथ देने के लिए भारत जोड़ो यात्रियों के साथ ही सभी राज्यों की पुलिस और सुरक्षा बलों का धन्यवाद देते हुए आभार प्रकट किया। इस सवाल पर कि भारत जोड़ो यात्रा से कश्मीर की राजनीति या राष्ट्रीय राजनीति पर क्या असर पड़ेगा, राहुल गांधी ने कहा, "यह हमारी यात्रा नहीं, बल्कि भारत की यात्रा है, क्योंकि ये कांग्रेस पार्टी की यात्रा नहीं रही, क्योंकि इसमें कांग्रेसियों से ज्यादा आम लोग शामिल रहे। ये भारत की यात्रा है, हम इसमें जरूर शामिल हुए।"

उन्होंने कहा कि इस यात्रा से एक वैकल्पिक दृष्टि मिली है। स्पष्ट करते हुए कहा कि देश में दो विजन हैं, एक बीजेपी-आरएसएस का विजन है, जो नफरत भरा और अहंकार भरा है। और दूसरा विजन हमारा है जो मुहब्बत, भाईचारे, एक दूसरे इज्जत देने, गले गले लगाने का विजन है। उन्होंने कहा कि देश के सामने दो रास्ते हैं, एक दूसरों को दबाने का है, तो दूसरा सबको जोड़ने का है। इसलिए राजनीति में इसका असर निश्चित रूप से पड़ेगा। राहुल गांधी ने कहा कि लेकिन प्रभाव क्या होगा, उस बारे में अभी नही कहा जा सकता।

उन्होंने आगे कहा कि वैसे यात्रा अभी खत्म नहीं हुई है, यह पहला कदम है, ये शुरुआत है। इसके बाद भी कांग्रेस पार्टी और जिस अल्टरनेटिव विजन की बात हम कर रहे हैं जो लोग उसको मानते हैं वो है।


राहुल गांधी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मुद्दे भी देश के बाकी हिस्सों से अलग नहीं हैं। यहां भी बेरोजगारी, मौके न होना, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे हैं जो देश के बाकी मुद्दों की तरह हैं। लेकिन यहां अलग मुद्दे भी हैं, जैसे कि राज्य का दर्जा वापस मिलना, लोगों की आवाज को प्रतिनिधित्व देना आदि। धारा 370 पर पूछे गए सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी का रुख स्पष्ट है और कांग्रेस कार्यसमिति में इसका उल्लेख है।

भारत जोड़ो यात्रा दक्षिण से उत्तर की तरफ की गई है, क्या आने वाले दिनों में पश्चिम से पूर्व की तरफ भी यात्रा होगी, इस सवाल पर राहुल गांधी ने कहा कि अभी इस बारे में कहना थोड़ी जल्दबाजी है। उन्होंने कहा कि लेकिन यात्रा का असर पूरे देश में देखने को मिला है। उन्होंने बताया कि अन्य राज्यों में भी कांग्रेस के साथियों ने यात्राएं की हैं और उनका असर भी दिख रहा है।

उन्होंने कहा, "आज की राजनीति आम लोगों से दूर हो गई है। सारा का सारा सवाद मीडिया के जरिए होता है, इंटरव्यू होते हैं, प्रेस वार्ता होती है। मेरी सोच है कि इस दूरी को कम किया जाए। सिर्फ शारीरिक दूरी नहीं बल्कि विचारों और संवाद की दूरी को कम किया जाए।" राहुल गांधी ने कहा कि, "आज मीडिया का एक बायस होता है। जो फोकस मीडिया को अपोजिशन पर देना चाहिए वो देते नहीं हैं और जो हम बोलते हैं, उसको (मीडिया) ट्विस्ट कर जाती है। तो मुझे लगा कि एक नए तरीके के पॉलिटिकल विजन की जरूरत है।"

एक अन्य सवाल कि बीजेपी का दावा है कि धारा 370 हटने के बाद कश्मीर में सुरक्षा के हालात काफी ठीक हो गए हैं, राहुल गांधी ने कहा कि "नहीं, यहा पर तो टारगेटेड किलिंग हो रही हैं, बम ब्लास्ट हो रहे हैं। अगर सिक्योरिटी सिचुएशन इम्प्रूव होती तो जो कनवर्सेशन सिक्योरिटी वाले मुझसे कर रहे हैं, वो तो होते ही नहीं और फाइनली बीजेपी के लोग यात्रा क्यों नहीं कर देते जम्मू से लाल चौक तक? अगर सुरक्षा इतनी ही अच्छी है तो अमित शाह जी जम्मू से श्रीनगर तक पैदल यात्रा क्यों नहीं करते?"

विपक्षी एकता पर भी राहुल गांधी ने बेबाकी से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा मानना कि विपक्षी एकता बिखर चुकी है, गलत है। उन्होंने कहा, "जो अपोजिशन यूनिटी आती है, वो बातचीत के बाद, कन्वर्सेशन के बाद, एक विजन के बाद आती है  और ये कहना कि अपोजिशन बिखरी हुई है, ये सही नहीं है। जरूर अपोजिशन में डिफरेंसेस हैं, जरूर अपोजिशन में बातचीत होती है, परंतु अपोजिशन एक साथ लड़ेगी, एक साथ खड़ी होगी और विचारधारा की लड़ाई है, जो एक तरफ आरएसएस-बीजेपी वाले हैं और दूसरी तरफ नॉन आरएसएस-बीजेपी की फोर्सेस है।"


इस बारे में पूछे जाने पर कि भारत जोड़ो यात्रा के राजनीतिक पहलू के अलावा क्या कोई दूसरा और पहलू भी है। इस पर राहुल गांधी ने कहा कि, "भारत जोड़ो एक दृष्टि है; यह एक विचार है कि भारत को कैसे आगे बढ़ना चाहिए। यह सिर्फ सैर नहीं है। चलना एक भावना की अभिव्यक्ति है। भाव है- लोगों की सुनो, लोगों को गले लगाओ, लोगों से स्नेह करो और इस विचार को गहरा करने की और भी संभावनाएं हैं, जिन्हें हम अपनाएंगे।"

जम्मू-कश्मीर में सीमांकन की प्रक्रिया और क्या यही प्रक्रिया दूसरे राज्यों में भी अपनाई जा रही है, इससे जुड़े सवाल राहुल गांधी ने कहा कि, "मुझे लगता है कि देश भर में आरएसएस और बीजेपी जो कर रहे हैं, वह इस देश के संस्थागत ढांचे पर हमला कर रहे हैं, चाहे संसद हो, चाहे विधानसभा हो, चाहे न्यायपालिका हो, चाहे मीडिया हो, सभी संस्थानों पर हमले हो रहे हैं. और भाजपा ने कब्जा कर लिया। आप देश के विभिन्न हिस्सों और जम्मू-कश्मीर में जो देख रहे हैं, वह संस्थागत ढांचे पर उस हमले का परिणाम है।"

उन्होंने याद दिलाया कि, "भारत जोड़ो यात्रा करने का एक मुख्य कारण यह है कि जब हम संसद में बात करते हैं तो हमारा माइक बंद कर दिया जाता है। तो स्पष्ट रूप से लोकसभा का सदस्य होने का कोई मतलब नहीं है। मैं वहां बैठ सकता हूं, मैं हाथ उठाकर कह सकता हूं- मैं नोटबंदी के बारे में बात करना चाहता हूं- आप नहीं कर सकते। मैं जीएसटी के बारे में बात करना चाहता हूं- आप नहीं कर सकते। मैं चीन के बारे में बात करना चाहता हूं- आप नहीं कर सकते। मैं भारत में लोकतंत्र के बारे में बात करना चाहता हूं- आप नहीं कर सकते।"

राहुल गांधी ने कहा कि, "तो, ये सिर्फ जम्मू-कश्मीर में नहीं हो रहा है, बल्कि ये पूरे देश में हो रहा है और ये देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से हो रहा है। हमने कई सरकारें चुनाव जीतने के बाद भी खोई हैं। हम मध्य प्रदेश में चुनाव जीत गए और हमारी सरकार गायब हो गई। तो यह उनके काम करने का तरीका है, जो उनके पास है।"

चीन के बारे में एक सवाल के जवाब में राहुल गांधी ने कहा कि, "भारत के प्रधान मंत्री लगभग स्पष्ट रूप से देश के एकमात्र व्यक्ति हैं, जो मानते हैं कि चीन ने हमारी किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया है।"

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