राहुल गांधी का देश के नाम संदेश: क्या हम अपनी मर्जी से जिएंगे या विभाजनकारी नीतियों के माहौल में

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने घोषणापत्र में देश के नाम एक संदेश लिखा है, जिसमें उन्होंने पूछा है कि क्या हमें ऐसा देश बनाना है जहां सबको अपनी मर्जी से जीने का अधिकार है या फिर देश विभाजनकारी विचारधारा से चलेगा जो लोगों के अधिकारों को रौंदकर छिन्न-भिन्न कर देगा? पढ़िए राहुल गांधी का पूरा संदेश:

Photo : Getty Images
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भाइयों और बहनों,

2019 का आम चुनाव देश के सामने एक बड़ा विकल्प प्रस्तुत कर रहा है। क्या भारत एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश होगा? क्या भारत के लोग भय से मुक्त होगें? अपनी इच्छा अनुसार जीवन जीने, काम करने, खाने-पीने, स्वेच्छा से जीवनसाथी चुनने के लिए स्वतंत्र रहेंगे? क्या गरीबी से मुक्ति पाने के लिए अपनी आकांक्षाओं और महत्वाकांक्षाओं, को परिपूर्ण करने के प्रयास के लिए स्वतंत्र होंगे?

या

क्या भारत उस विभाजनकारी, विध्वंसकारी विचारधारा से संचालित होगा जो लोगों के अधिकारों को, संस्थाओं को, विविधतापूर्ण, सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्ववादी स्वस्थ मतभिन्नता के विचार को, जो कि भारत जैसे बहु-सांस्कृति क समाज और देश की आत्मा है, रौंदकर छिन्न-भिन्न कर देगा?

क्या भारत विकास की लहरों के साथ, अपने सभी नागरिकों, को ऊपर उठाकर, उन्हें गरीबी के कुचक्र से मुक्ति दिला पायेगा या भारत, धन-संपत्ति और शक्ति की असमानताओं से पहचाना जाने वाला राष्ट्र बनकर रह जायेगा?

राहुल गांधी का देश के नाम संदेश: क्या हम अपनी मर्जी से जिएंगे या विभाजनकारी नीतियों के  माहौल में

पिछले 5 वर्ष, भारत तथा भारतीयता के लिए विनाशकारी रहे हैं। युवाओं का रोजगार छिन गया है। किसान उम्मीद खो चुके हैं, व्यापारियों का कारोबार छिन्न-भिन्न हो चुका है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों ने, अपना आत्मविश्वास खो दिया है, महिलाओं में सुरक्षा की भावना का ह्रास हुआ है, वंचित समुदायों ने अपने पारंपरिक अधिकार खो दिये हैं, संस्थाओं ने अपनी स्वतंत्रता खो दी है। इन सबसे इतर जो सबसे खतरनाक चीज हुई है वह यह है कि आम जनता के बीच प्रधानमंत्री और उनके मंत्रीमंडल के “शब्दों” ने अपना विश्वास खो दिया है। उन्होंने हमें केवल आडंबर से परिपूर्ण किन्तु खोखले वायदे, असफल कार्यक्रम, झूठे आंकड़े, भय और नफरत का वातावरण दिया है।

गंभीर संकट के इस दौर में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, पिछले पांच वर्ष के दुःस्वप्न से मुक्ति का वादा करती है। इस घोषणा पत्र के द्वारा कांग्रेस, अपने आपको, आपके सम्मुख, एक मात्र राष्ट्रीय विकल्प के रूप में प्रस्तुत करती है, एक विकल्प जो सत्य, स्वतंत्रता, गरिमा, आत्मसम्मान, सौहार्द और समृद्धि के प्रति अपनी प्रतिबद्धता में अटूट है। हम भारत को मजबूत और एकजुट बनाने, और न्यायपूर्ण व समृद्ध समाज बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। हमारा घोषणा पत्र “जनता की आवाज को सुनना” जैसे उच्च विचार एवं दर्शन के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। यह किसी एक व्यक्ति के “मन की बात” नहीं है बल्कि लाखों-करोड़ों देशवासियों की सामूहिक आवाज है।

हमने जनता की अकांक्षाओं एवं अपेक्षाओं को शामिल करने के लिए सभी आधुनिक साधन वेबसाइट, व्हाटसएप, ईमेल, ऑनलाइन याचिकांए) तथा परंपरागत तरीके, नागरिकों, हितधारकों, विशेषज्ञों और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ व्यापक चर्चा की तथा उस निष्कर्ष को इस घोषणा पत्र में शामिल किया है।

अक्टूबर 2018 से फरवरी 2019 के बीच आप में से कई लोग, देश की कम से कम 16 भाषाओं तथा आपके आस-पास आसानी से उपलब्ध साधनों के माध्यम से, कांग्रेस के साथ बातचीत में शामिल हुए हैं। हमारी घोषणा पत्र समिति ने आम नागरिकों के साथ 121, तथा किसानों, उद्यमियों, अर्थशास्त्रियों, छात्रों, शिक्षकों, महिला समूहों, डाक्टर, वकील तथा अन्य क्षेत्र के विषय विशेषज्ञों, विद्वानों के साथ 53 परामर्श कार्यक्रम आयोजित किये। हमने 24 राज्यो और 3 केन्द्र शासित प्रदेशों के 60 से अधिक स्थानों में परामर्श आयोजित कियेI हमने 12 से अधिक देशों के अप्रवासी भारतीयों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात और चर्चा की।

मैं व्यक्तिगत रूप से, देश के कोने-कोने में जाकर लोगों से मिलता हूं और उनकी बातों विचारों को सुनता हूं, परिणामस्वरुप, कांग्रेस के घोषणा पत्र में अंकित प्रत्येक शब्द, आपकी आवाज और करोड़ो भारतीयों की आकांक्षाओं को दर्शाता है। यह भारत के बेहतर भविष्य के लिए एक कार्ययोजना है। इस घोषणापत्र को बनाने में आपकी प्रेरणा, आपकी आकांक्षा का योगदान हैI यह घोषणापत्र एक जीवित दस्तावेज है। इस घोषणापत्र को अब आपके समर्थन और आपके मूल्यवान वोट की जरूरत है।

हम अपने घोषणा पत्र के क्रिन्यान्वयन/कार्यान्वयन की स्थिति पर, प्रत्येक वर्ष, सार्वजनिक रूप से देश के लोगों के सम्मुख अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। हम एक स्वतंत्र सोशल ऑडिट ग्रुप बनायेंगे, जो इस बात का आंकलन करेगा कि हमने अपने वायदे किस हद तक और कैसे पूरे किये हैं।

यह हमारी प्रतिबद्धता है, कांग्रेस जो वायदा करती है, उसे निभाती है।

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