राहुल की भारत जोड़ो यात्रा 'मन की बात' करने के लिए नहीं, बल्कि 'जनता की चिंता' सुनने के लिए थी: कांग्रेस
जयराम रमेश ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों और संस्थाओं पर RSS और बीजेपी के हमले को वैचारिक चुनौती देना था। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का मकसद केवल अपनी बात रखना नहीं, बल्कि “जनता की चिंता सुनना” था।

कांग्रेस ने 'भारत जोड़ो यात्रा' के सोमवार को चार साल पूरे होने पर इसे देश की समकालीन राजनीति में एक ‘‘परिवर्तनकारी घटना’’ करार दिया और कहा कि इस पदयात्रा ने देश में नयी उम्मीद जगाई और नया संकल्प पैदा किया।
पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सात सितंबर, 2022 को भारत जोड़ो यात्रा शुरू की थी। उनकी करीब चार हजार किलोमीटर लंबी पदयात्रा का समापन 30 जनवरी, 2023 को श्रीनगर में हुआ था।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 'भारत जोड़ो यात्रा' के चार साल पूरे होने पर उस ‘‘निर्णायक मोड़’’ को याद किया जा रहा है, जिसने देश में नयी उम्मीद, नयी ऊर्जा और नया संकल्प पैदा किया।
रमेश ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में निकाली गई यह ऐतिहासिक पदयात्रा कन्याकुमारी से शुरू होकर 145 दिन में 12 राज्य और दो केंद्रशासित प्रदेश से गुजरते हुए 4,080 किलोमीटर की दूरी तय कर श्रीनगर में एक रैली के साथ संपन्न हुई थी।
उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू करने से पहले राहुल गांधी ने कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद स्मारक का दौरा किया था और उनके साथ करीब 120 अन्य ‘भारत यात्री’ भी इस यात्रा में शामिल हुए थे।
कांग्रेस महासचिव के अनुसार, आर्थिक असमानताओं के बढ़ने, सामाजिक ध्रुवीकरण और ‘‘बढ़ते राजनीतिक अधिनायकवाद’’ से चिंतित लाखों भारतीयों ने इस पदयात्रा को समर्थन और सहयोग दिया।
उन्होंने कहा कि पदयात्रा का मूल उद्देश्य संवैधानिक सिद्धांतों, प्रावधानों, परंपराओं और प्रक्रियाओं पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जन ता पार्टी (भाजपा) के ‘‘व्यवस्थित हमले’’ को वैचारिक चुनौती देना था।
रमेश ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य ‘‘मन की बात’’ करना नहीं, बल्कि ‘‘जनता की चिंता’’ सुनना था।
PTI के इनपुट के साथ
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