राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT रिपोर्ट सौंपी गई, 5 साल के ऑडिट और ट्रस्ट सुधार की सिफारिश!
राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT ने प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। खबरों के मुताबिक, रिपोर्ट में 5 साल के दान का ऑडिट, ट्रस्ट में बदलाव और पारदर्शिता बढ़ाने की सिफारिश की गई है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद की जांच कर रही 3 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर गृह सचिव संजय प्रसाद को सौंप दी है। मंगलवार सुबह सौंपी गई इस रिपोर्ट को लेकर अब आगे का फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर होना है।
7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यह मुद्दा उठाया था, जिसके बाद 13 जून को राज्य सरकार ने मामले की जांच SIT को सौंप दी थी।
5 साल के चढ़ावे के ऑडिट की सिफारिश
जनसत्ता ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों के चढ़ावे और दान का ऑडिट कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में चढ़ावा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने, अनियमितताओं को रोकने और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में कुछ बदलाव करने के सुझाव भी दिए गए हैं। जनसत्ता के मुताबिक, जांच के दौरान SIT को ऐसे संकेत मिले हैं कि चढ़ावे में कथित हेरफेर का खेल कई वर्षों से चल रहा था। माना जा रहा है कि जल्द ही यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके बाद सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
दान रिकॉर्ड से लेकर CCTV तक की जांच
जांच के दौरान SIT ने दान के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, नकदी गिनने की प्रक्रिया और अन्य कीमती सामान से जुड़े दावों की पड़ताल की। टीम ने 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की, जिनमें राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े सदस्य, पुजारी, बैंक अधिकारी और चढ़ावे की नकदी संभालने वाले कर्मचारी शामिल थे। जांच के सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ की गई।
जनसत्ता ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि SIT ने रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव से कई बार पूछताछ की। टिन्नू यादव को चंपत राय का पुराना सहयोगी बताया जाता है। जांच टीम ने उनके करीबी सहयोगियों और रिश्तेदारों से भी सवाल-जवाब किए हैं।
ट्रस्ट और बैंक का बड़ा फैसला
जांच के बीच राम मंदिर ट्रस्ट और बैंक ने चढ़ावे की राशि गिनने की व्यवस्था में बदलाव किया है। चढ़ावे की रकम गिनने में लगे 40 कर्मचारियों को इस काम से हटा दिया गया है और उनकी जगह नए कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। इसे व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
200 किलो चांदी की ईंटों का मुद्दा भी चर्चा में
इस पूरे विवाद के बीच सिंधी समाज ने भी एक बड़ा सवाल उठाया है। समाज का दावा है कि वर्ष 2021 में राम मंदिर निर्माण के लिए 200 किलो चांदी की ईंटें दान की गई थीं, लेकिन अब तक उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई है। यह दावा सामने आने के बाद चढ़ावे और दान की निगरानी व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अगले कदम पर टिकी हैं। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट पर निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकार इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है।
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