राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! डिलीट चैट्स हुईं रिकवर, पैसों के बंटवारे का राज आया सामने

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने डिलीट मोबाइल चैट्स रिकवर की हैं। जांच में कथित रकम के बंटवारे, बैंक लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े नए सुराग मिले हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जिन मोबाइल चैट्स को आरोपी हमेशा के लिए मिटा हुआ समझ रहे थे। वही, अब उनके खिलाफ अहम डिजिटल सबूत बनकर सामने आई हैं। पुलिस ने साइबर सेल और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से आरोपियों के मोबाइल का बैकअप हासिल कर लिया है। करीब एक साल पहले डिलीट किया गया डेटा भी रिकवर कर लिया गया है। 'आज तक' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रिकवर हुए डेटा से 2 करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी से जुड़े अहम सुराग मिले हैं।

डिलीट चैट्स में पैसों के बंटवारे को लेकर विवाद का खुलासा

'आज तक' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि पुलिस को पहले से आशंका थी कि आरोपियों ने पुराने मोबाइल बदल दिए हैं और डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश की है। इसी आधार पर साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली गई। फॉरेंसिक जांच के दौरान पुराने मोबाइल का बैकअप निकाला गया और करीब एक साल पहले डिलीट किए गए चैट, डेटा और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड भी रिकवर कर लिए गए। पुलिस ने मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला और अनुकल्प मिश्रा के नए मोबाइल फोन का डेटा भी अपने कब्जे में ले लिया है। अब जांच टीम इन रिकॉर्ड्स को पूरे घटनाक्रम की टाइमलाइन से जोड़कर जांच रही है।

'आज तक' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि रिकवर हुई चैट्स में सबसे बड़ा खुलासा चोरी की कथित रकम के बंटवारे को लेकर हुआ है। फरवरी 2026 में अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा के बीच रकम के हिस्से को लेकर तीखी बहस हुई थी। चैट्स में अनुकल्प ने लवकुश पर आरोप लगाया कि उसने ज्यादा रकम अपने पास रख ली और उसका पूरा हिस्सा नहीं दिया। पुलिस को मिले मोबाइल डेटा से 2 करोड़ रुपये से अधिक की कथित चोरी से जुड़ी जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम चैट्स में दर्ज रकम का बैंक खातों में हुए लेनदेन से मिलान कर रही है। यदि दोनों रिकॉर्ड मेल खाते हैं, तो यह जांच की सबसे मजबूत कड़ी साबित हो सकती है।


नए मोबाइल, बैंक खाते और संपत्तियां भी जांच के दायरे में

'आज तक' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कुछ आरोपियों ने नए मोबाइल फोन खरीद लिए थे। पुलिस को शक है कि ऐसा पुराने डिजिटल सबूतों से दूरी बनाने के लिए किया गया होगा। हालांकि साइबर फॉरेंसिक जांच में नए मोबाइल का डेटा भी खंगाल लिया गया है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि पुराने फोन से नए फोन में कोई डेटा ट्रांसफर हुआ था या नहीं और आरोपियों ने बातचीत के लिए किसी अन्य माध्यम का इस्तेमाल किया था या नहीं।

सिर्फ मोबाइल डेटा ही नहीं, पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों की भी गहन जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि चैट्स में जिन रकमों का जिक्र है, क्या वही रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर भी हुई थी। साथ ही यह भी जांच हो रही है कि कथित चोरी की रकम से कार, बाइक, मकान या अन्य संपत्तियां खरीदी गईं या नहीं।

प्रतापगढ़ तक पहुंची जांच, बाकी आरोपियों से भी होगी पूछताछ

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी अविनाश शुक्ला ने कथित चोरी की रकम से खरीदी गई कार अपने नाम के बजाय भाई अभिषेक के नाम पर खरीदी थी। मामला सामने आने के बाद कार को प्रतापगढ़ स्थित गांव भेज दिया गया था। पुलिस ने रिमांड के दौरान आरोपी की निशानदेही पर कार बरामद कर ली है। अब यह भी जांच की जा रही है कि चोरी की कथित रकम से और कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदी गईं।

जांच का दायरा अब अयोध्या से निकलकर प्रतापगढ़ तक पहुंच चुका है। पुलिस टीम आरोपी अविनाश शुक्ला को उसके गांव भी लेकर गई, जहां बाइक और अन्य सामान की बरामदगी के साथ पूछताछ में सामने आए तथ्यों का सत्यापन किया गया। स्थानीय पुलिस परिवार से जुड़े आर्थिक लेनदेन की भी जानकारी जुटा रही है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कथित चोरी की रकम का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया और क्या परिवार के अन्य लोगों को भी इसकी जानकारी थी। इधर, पुलिस कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद जेल में बंद अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, करुणेश पांडे और मनीष यादव से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।

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