राम मंदिर ट्रस्ट में दायित्व बदले तो पलटा फैसला, हटाए गए तीन कर्मचारी वापस, अंदरूनी खींचतान के संकेत!
राम मंदिर ट्रस्ट में दायित्व बदलने के बाद पहले हटाए गए तीन कर्मचारियों की वापसी हुई है। नए महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने आदेश जारी किया है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दायित्वों के बदलाव के बाद अब एक फैसले को लेकर अंदरूनी खींचतान के संकेत सामने आने लगे हैं। कुछ दिन पहले शिकायतों के आधार पर अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने जिन तीन कर्मचारियों को राम मंदिर की सेवा से बाहर किया था, नए महासचिव स्वामी गोविंददेव गिरि ने उन्हें वापस लेने का आदेश जारी कर दिया है। शनिवार को जारी आदेश के बाद तीनों कर्मचारियों के फिर से सेवा में लौटने का रास्ता साफ हो गया है। इनमें मंदिर आंदोलन के कारसेवक रहे वासुदेव गुप्ता के बेटे संदीप गुप्ता भी शामिल हैं, जिन्हें पूर्व महासचिव चंपतराय ने ट्रस्ट में नियुक्त किया था।
महिला CO की शिकायत पर दो कर्मचारी हटाए गए थे
करीब 15 दिन पहले रामजन्मभूमि परिसर में तैनात एक महिला पुलिस क्षेत्राधिकारी की लिखित शिकायत पर कृष्ण मोहन ने गर्भगृह में सेवा दे रहे बजरंग पाठक और कृष्ण दत्त तिवारी को हटा दिया था। दोनों पर अपने दायित्वों का ठीक से निर्वहन नहीं करने और महिला सीओ के एक मेहमान से दुर्व्यवहार करने का लगा था।
अंतरिम महासचिव ने दोनों कर्मचारियों का पक्ष भी जाना था, लेकिन उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद दोनों को मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर बाग बिजेसी स्थित तीर्थ क्षेत्र पुरम भेज दिया गया। बताया जाता है कि एक-दो दिन बाद उनकी सेवा ही खत्म कर दी गई थी।
विदेशी श्रद्धालु की शिकायत पर संदीप गुप्ता भी हटे
इसके एक-दो दिन बाद एक विदेशी श्रद्धालु की शिकायत पर संदीप गुप्ता को भी ट्रस्ट की लॉकर सेवा से हटा दिया गया था। आरोप है कि इस कार्रवाई से पहले उनका पक्ष नहीं लिया गया। इस फैसले के बाद ट्रस्ट के कर्मचारियों में रोष के साथ भय का माहौल भी बनने की बात सामने आई।
संदीप गुप्ता के मामले ने इसलिए भी सवाल खड़े किए थे क्योंकि वह मंदिर आंदोलन में कारसेवक रहे वासुदेव गुप्ता के पुत्र हैं। ट्रस्ट में नौकरी मिलने के बाद उन्हें हटाए जाने को लेकर भी कई सवाल उठे थे।
2 सितंबर की बैठक के बाद बदले समीकरण
इसी बीच ट्रस्ट की 2 सितंबर को हुई बैठक में दायित्वों में बदलाव किया गया। कोषाध्यक्ष रहे स्वामी गोविंददेव गिरि को नया महासचिव बनाया गया, जबकि कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव के पद से मुक्त कर दिया गया। इसके बाद तीनों कर्मचारियों की वापसी को ट्रस्ट के भीतर बदलते समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है और अंतर्विरोध के स्वर उभरने की बात कही जा रही है।
खबरों के मुताबिक, स्वामी गोविंददेव गिरि को जब पहले की कार्रवाई की जानकारी मिली और बजरंग पाठक और कृष्ण दत्त तिवारी की ओर से खुद को निर्दोष बताया गया, तो उन्होंने दोनों को वापस लेने के साथ लॉकर सेवा से हटाए गए संदीप गुप्ता की भी वापसी करा दी। शनिवार को उनकी वापसी का आदेश जारी किया गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों कर्मचारी फिर मंदिर में लौटा लिए गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें अब कौन-सा दायित्व दिया जाएगा। वहीं, ट्रस्ट कर्मी बजरंग पाठक ने अलग दावा किया है। उनका कहना है कि उन्हें कभी निकाला ही नहीं गया था और वह पहले से ही काम कर रहे हैं।
