राम मंदिर दान चोरी: आरोपियों के पास से 79 लाख रुपये बरामद, कोर्ट में पेशी के बाद सभी जेल भेजे गए
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने ही आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी लेकिन सभी आरोपियों के पिता के नाम और पते की उन्हें जानकारी नहीं थी। इस वजह से एफआईआर कॉपी में पिता के नाम और पते का कॉलम रिक्त ही रह गया।

अयोध्या के राम मंदिर के दान चोरी के मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के पास से लगभग 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। शुक्रवार की शाम पुलिस ने सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को तीन दिन के लिए जेल भेज दिया गया। इस बीच मंदिर के दान में चोरी और वित्तीय गड़बड़ी में कुछ बैंक कर्मियों की भी संलिप्तता सामने आई है, जिसकी जांच जारी है।
मंदिर ट्रस्ट की लापरवाही सामने आई
कोर्ट में आरोपियों की पेशी के दौरान एक बार फिर राम मंदिर ट्रस्ट की घोर लापरवाही उस समय सामने आई जब ट्रस्ट के सदस्य आरोपियों के पिता का नाम और पता नहीं बता सके। राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने ही आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन सभी आरोपियों के पिता के नाम और पते की उन्हें जानकारी नहीं थी। इस वजह से एफआईआर कॉपी में पिता के नाम और पते का कॉलम रिक्त ही रह गया। गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य में जुटे कर्मियों का भी पूरा विवरण ट्रस्ट के पास न होना घोर लापरवाही को दिखाता है।
तीन दिन बार कस्टडी मांगेगी पुलिस
एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद गुरुवार को राम मंदिर परिसर से ही सभी आरोपियों को कस्टडी में ले लिया गया। उनसे पुलिस ने कई चरणों में पूछताछ की और शुक्रवार की दोपहर पुलिस लाइन स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उनका मेडिकल परीक्षण किया। इसके बाद दोपहर लगभग 03:30 बजे सभी को कचहरी ले जाया गया, जहां उन्हें रिमांड के बाद जेल भेज दिया गया। इस दौरान राम मंदिर से लेकर पुलिस थाने और कचहरी परिसर तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे।
पुलिस के अनुसार, मोहर्रम अवकाश के चलते सभी आरोपियों को स्पेशल रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के लिए रिमांड लेने की तैयारी कर रही है और सोमवार को उन्हें दोबारा अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी की मांग करेगी।तीन दिन बाद आरोपियों को फिर अदालत में पेश किया जाएगा।
मामले की विवेचना पुलिस क्षेत्राधिकारी आशुतोष त्रिपाठी कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे प्रकरण की परतें खोली जाएंगी और यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। धिकारियों का कहना है कि रिमांड के दौरान आरोपियों से विस्तृत पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और कथित अनियमितताओं की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज मुकदमे के बाद जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में प्रत्येक आरोपी की भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका विशेष रूप से जांच के दायरे में है। पुलिस अब यह भी पता लगाएगी कि आरोपियों को किस स्तर पर सहयोग मिला, गणनाकर्मियों की नियुक्ति किन सिफारिशों पर हुई और चढ़ावे की गणना एवं बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों तथा कर्मचारियों की क्या जिम्मेदारी बनती है।
गौरतलब है कि राम मंदिर को दान में मिली धनराशि में चोरी का मामला सामने आने के बाद विवाद बढ़ने पर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की थी। दो दिन पहले एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जिसके आधार पर गुरुवार शाम को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने मंदिर ट्रस्ट के कर्मियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा और पर्यवेक्षणीय कर्मी सुभाष श्रीवास्तव और महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर उर्फ टिन्नू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद गुरुवार रात पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
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