आरबीएल बैंक ने अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट का 82 फीसदी बड़े डिफॉल्टरों के 'बैड लोन' की भरपाई में खर्च कर दिया

आरबीएल बैंक में प्रबंधन बदलने के साथ ही वह सुर्खियों में है। साथ ही चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि 2020-21 के दौरान बैंक ने जितना भी ऑपरेटिंग प्रॉफिट कमाया था, उसका 82 फीसदी तो बड़े डिफॉल्टरों के बैड लोन (न चुकाए गए कर्ज) के निपटान में ही खर्च हो गया।

फोटो : सोशल मीडिया
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विश्वदीपक

रत्नाकर बैंक लिमिटेड यानी आरबीएल बैंक महाराष्ट्र के कोल्हापुर में 1943 में स्थापित हुआ था। हाल ही में बैंक ने अपने एमडी और सीईओ विश्ववीर आहूजा को हटाकर राजीव आहूजा को बैंक का अंतरिम प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी (सीईओ) बनाया है।

बैंक के शीर्ष प्रबंधन में बदलाव के बाद सोमवार को आरबीएल बैंक के शेयरों जबरदस्त गिरावट सामने आई थी और इसके शेयरों ने करीब 23 फीसदी का गोता खाया था। साथ ही ब्रोकरेज फर्म्स ने बैंक को लेकर नया मूल्यांकन किया है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए और केयर ने कहा है कि वह आरबीएल बैंक में हो रहे बदलावपर बारीकी से निगाह रखे हुए हैं।

रिजर्व बैंक ने आरबीएल बैंक में योगेश दयाल को निदेशक के तौर पर दो साल के लिए नामित किया था, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि किसी निजी बैंक को बचाने के लिए यह सरकार का हस्तक्षेप है।

इस सबके बाद ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आरबीएल बैंक का किसी सरकारी बैंक में विलय करने की मांग की है। नेशनल हेरल्ड से बातचीत में बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन महासचिल सीएच वेंकटचलम ने कहा कि बैंक के बैड लोन और एनपीए में हाल के साल में जबरदस्त बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होंने बताया कि, “2017 में बैंक के ग्रॉस एनपी सिर्फ 357 करोड़ थे जो कि आज बढ़कर 2600 करोड़ हो चुके हैं।”

ऑल इंडिया बैंक इम्पलाइज एसोसिएश ने जोड़-घटाकर और सारी गणना करने के बाद इस नतीजे पर पहुंचा है कि बैंत ने 2020 और 2021 में 2752 करोड़ और 3091 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट कमाया है। लेकिन जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक बैंक ने इसमें से 2,583 करोड़ बैड लोन सैटलमेंट में खर्च कर दिया जिसके बाद नेट प्रॉफिट 506 करोड़ और 508 करोड़ रह गया।


वेंकटचलम ने बताया कि पुराने बैंक कम ही जगहों पर अपना कारोबार करते थे और वहां वे लोकप्रिय भी रहते थे। इस तरह उनका कामकाज ठीक से चलता रहता था। लेकिन जैसे ही वे दूसरे बैंकों की नकल करते हुए अपने कारोबार का दायरा बढ़ाते हैं और जोखिम लेना शुरु करते हैं तो उन्हें तो दुर्घटना का शिकार होना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पुराने बैंकों के साथ दिक्कत यही है कि वे नकल तो कर लेते हैं लेकिन कारोबार संभाल नहीं पाते।

इस बीच ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने कहा है कि बैंक को नियमों के अनुसार अपने कामकाज और लेनदेन के बारे में रिजर्व बैंक को और स्पष्टीकरण देना चाहिए क्योंकि छोटे निवेशकों का पैसा ही सबसे खतरे में रहता है।

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