चर्चित लेखक मिलान कुंदेरा का फ्रांस में निधन, 'द अनबियरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग' ने बनाया साहित्य का सितारा

साल 1984 में प्रकाशित उपन्यास 'द अनबियरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग' कुंदेरा की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है। इसने उन्हें वैश्विक साहित्य में स्टार बना दिया था। इसमें कुंदेरा ने प्राग स्प्रिंग की पृष्ठभूमि के खिलाफ एक प्रेम त्रिकोण की कहानी बयां की है।

चर्चित लेखक मिलान कुंदेरा का फ्रांस में निधन
चर्चित लेखक मिलान कुंदेरा का फ्रांस में निधन
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नवजीवन डेस्क

उपन्यास 'द अनबियरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग' के लेखक और दुनिया के मशहूर साहित्यकार मिलान कुंदेरा का आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। चेक के सरकारी टेलीविजन ने बुधवार को खबर की पुष्टि की कि चेक मूल के फ्रांसीसी लेखक मिलान कुंदेरा का निधन हो गया है। फ्रांस में कुंदेरा के प्रकाशक गैलिमार्ड के एक प्रवक्ता ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कुंदेरा लंबी बीमारी से जूझ रहे थे।

अप्रैल 1929 में चेकोस्लोवाकिया में जन्मे मिलान कुंदेरा को वहां की कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। देश में राजनीतिक और रचनात्मक आजादी की उम्मीद हार चुके कुंदेरा 1975 में देश छोड़कर फ्रांस चले गए थे। करीब 6 साल बाद 1981 में उन्हें वहां की नागरिकता मिली। इसके बाद वह फ्रांस के ही नागरिक बन गए और उन्होंने मौत तक अपनी पूरी जिंदगी वहीं गुजारी।

यूं तो उपन्यास 'द अनबियरेबल लाइटनेस ऑफ बीइंग' कुंदेरा की सबसे प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है। इस उपन्यास ने उन्हें वैश्विक साहित्य में स्टार बना दिया था। इसमें कुंदेरा ने प्राग स्प्रिंग की पृष्ठभूमि के खिलाफ एक प्रेम त्रिकोण की कहानी बयां की है। 1984 में प्रकाशित हुई इस किताब ने कुंदेरा को एक अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक सितारा बना दिया।

हालांकि, कुंदेरा की लोकप्रिय पुस्तकों का सिलसिला 'द जोक' से शुरू हुआ जो उनका पहला उपन्यास था। लेकिन सोवियत नेतृत्व वाले सैनिकों के चेक में प्रवेश के कुछ महीने बाद ही इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। चेकोस्लोवाकिया की कम्युनिस्ट सरकार ने उनकी सभी किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया था जो 1989 में कम्युनिस्ट सरकार के पतन होने तक जारी रहा। उनकी रचनाओं को सिनिकल, कामुक और समाज-विरोधी करार दे दिया गया था।


मिलान कुंदेरा खुद भी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े थे। हाई स्कूल स्नातक के बाद कुंदेरा 1948 में उत्साहपूर्वक कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए थे। लेकिन दो साल बाद उन्हें शत्रुतापूर्ण सोच और व्यक्तिवादी प्रवृत्ति के आरोप में निष्कासित कर दिया गया। इस कारण कुंदेरा को फिल्म अकादमी की अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी, जहां वह संगीत और साहित्य का अध्ययन कर रहे थे।

इसके बाद उन्होंने 1953 में कविता संग्रह 'मैन: ए वाइड गार्डन' से एक लेखक के रूप में अपनी नई शुरुआत की। इस संग्रह में उन्होंने साम्यवादी दृष्टिकोण से समाजवादी यथार्थवाद पर प्रकाश डाला। कुंदेरा ने कई हास्य कहानियां भी लिखीं। बाद में वह फिर से कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हो गए, लेकिन कुछ दिनों बाद एक बार फिर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।

इसके बाद देश निकाला मिलने पर मिलान 1975 में फ्रांस चले गए थे। क़रीब छह साल बाद 1981 में उनको फ्रांस की नागरिकता मिली। इसके बाद कुंदेरा अपनी पूरी जिंदगी फ्रांस में ही रहे और लिखते रहे। कुंदेरा ने अपना अंतिम उपन्यास 'द फेस्टिवल ऑफ इनसिग्निफिकेंस' 2015 में लिखा था। कुंदेरा ने यहां चेक और फ्रांसीसी दोनों भाषाओं में किताबें लिखीं। उन्होंने खुद ही अपनी सभी पुस्तकों का फ्रांसीसी भाषा में रूपांतरण कर प्रकाशन कराया। यही कारण है कि उनकी फ्रांसिसी भाषा की पुस्तकों को भी मूल रचना के तौर पर माना जाता है।

मिलान कुंदेरा के बारे में यह भी कहा जाता है कि कई चेक लोग उन्हें ऐसे व्यक्ति के रूप में देखते थे जिसने अपने लोगों को छोड़ दिया और एक आसान रास्ता अपना लिया। कहा जाता है कि चेक लोग 2008 में एक चेक पत्रिका में छपे इस आरोप पर विश्वास करने लगे थे कि मिलान अपने छात्र दिनों में एक मुखबिर थे और उन्होंने एक पश्चिमी जासूस को धोखा दिया था। जिसकी वजह से उस एजेंट ने 14 साल जेल में काटे। हालांकि, कुंदेरा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था।

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