राजधानी पटना सहित बिहार के कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ा, शहरों में घुसने लगा पानी, प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के नदी तटों और निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों के लिए अलर्ट जारी किया है, जिसमें उनसे सतर्क रहने और एहतियाती उपाय करने का आग्रह किया गया है।

बिहार में शुक्रवार को गंगा, गंडक, पुनपुन और दरधा सहित प्रमुख नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ने से राज्य के कई जिलों में कई इलाके जलमग्न हो गए हैं। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने से राजधानी पटना पर बाढ का खतरा मंडराने लगा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, शुक्रवार रात तक पटना के गांधी घाट और मोकामा के हथीडा में गंगा के अपने उच्चतम बाढ़ स्तर (एचएफएल) को पार करने की आशंका है।
इस बीच राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने भोजपुर, पटना, सारण, वैशाली, नालंदा, बेगूसराय, लखीसराय और जहानाबाद के नदी तटों और निचले इलाकों में रहने वाले निवासियों के लिए अलर्ट जारी किया है, जिसमें उनसे सतर्क रहने और एहतियाती उपाय करने का आग्रह किया गया है।

पटना के दीघा में गंगा नदी खतरे के निशान से 1.17 मीटर ऊपर, गांधी घाट में 1.67 मीटर ऊपर और हाथीदह में 1.32 मीटर ऊपर बह रही थी। श्रीपालपुर में पुनपुन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 2.29 मीटर ऊपर दर्ज किया गया, जबकि कोलहाचक में दरधा नदी खतरे के निशान से 3.07 मीटर ऊपर बह रही थी।
वहीं भागलपुर में पिछले 24 घंटों में गंगा का जलस्तर 15 सेंटीमीटर बढ़ गया, जिसके चलते नाथनगर, नौगछिया और पीरपैंती के दियारा क्षेत्रों में बाढ़ का पानी फिर से प्रवेश कर गया। खड़ी फसलों और चारे सहित कृषि भूमि का विशाल भूभाग जलमग्न हो गया है। खगड़िया सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में से एक है, जहां गंगा नदी खतरे के निशान से 1.01 मीटर ऊपर बह रही है। कोसी, बागमती और बूढ़ी गंडक नदियां भी खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही हैं, जिससे और बाढ़ आने की आशंका बढ़ गई है।

राघोपुर में रेलवे लाइन के किनारे बने तटबंध के लगभग पूरी तरह से कट जाने के बाद गंभीर भू-क्षरण और भूमि धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। गंगा का मुख्य प्रवाह पटरियों के खतरनाक रूप से करीब खिसक गया है, जिससे दो से तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाले क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। मुंगेर में गंगा का जलस्तर पिछले 24 घंटों में 36 सेंटीमीटर बढ़ गया है।
मधेपुरा जिले के आलम नगर और चौसा ब्लॉक में बाढ़ से लगभग एक लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जिसके चलते अधिकारियों ने बचाव और राहत कार्यों के लिए 35 नौकाएं तैनात की हैं। बांका जिले में बरसंदा गांव के पास निर्माणाधीन पुल के लिए बनाई गई वैकल्पिक सड़क मिर्चनी नदी की तेज धारा में बह गई। सहरसा के कई गांव भी जलमग्न हो गए हैं।

बाढ़ के पानी ने कई जिलों में सड़क संपर्क को बाधित कर दिया है। पश्चिम चंपारण में योगीपट्टी-छोटा चौमुख-सिसवा मंगलपुर सड़क पर यातायात ठप हो गया है, जहां पानी सड़क से दो से तीन फीट ऊपर तक बह रहा है। समस्तीपुर के लगभग दो दर्जन से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कई ग्रामीण सड़कें जलमग्न हो गई हैं।
पटना में कच्ची दरगाह-बिदुपुर छह लेन वाले पुल पर भी यातायात बाधित है। वैशाली जिले के राघोपुर ब्लॉक की सभी पंचायतें प्रभावित हुई हैं, जिनमें से लगभग 20 पंचायतों का मुख्य सड़क नेटवर्क से संपर्क टूट गया है, जिससे राहत कार्यों और निवासियों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न हो रही है। आज रात तक गंगा, कोसी, गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर और अधिक बढ़ने की आशंका है, जिससे बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है।
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