वे 8 आरटीआई जानकारियां जो बनीं प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार के लिए मुसीबत

विभिन्न आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार के बारे में जब जानकारियां मांगी तो सरकार को पसीने आ गए। इन अर्जियों में पीएम की डिग्री की जानकारी भी शामिल है। ऐसी ही 8 आरटीआई जानकारियां हम यहां दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री की डिग्री

दिल्ली के नीरज शर्मा ने आरटीआई के जरिए दिल्ली विश्वविद्यालय से उस रजिस्टर के उन पन्नों की प्रति मांगी थी, जिसमें वर्ष 1978 में विश्वविद्यालय से पास होने वाले बीए के सभी छात्रों के बारे में पूरी सूचना हो। 1978 वही वर्ष है, जिस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की थी। लेकिन, दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस रजिस्टर की प्रति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद नीरज शर्मा ने केंद्रीय सूचना आयोग का दरवाज़ा खटखटाया। इस पर आयोग ने विश्वविद्यालय जानकारी मांगी। लेकिन विश्वविद्यासय ने जानकारी देने के बजाए आयोग के आदेश के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर दी।

नोटबंदी

  • आरटीआई कार्यकर्ता मनोरंजन एस रॉय ने अर्जी डालकर पूछा कि नोटबंदी के दौरान अलग-अलग जिलों के सहकारी बैंकों में 500 और 1000 के कितने नोट जमा हुए। रॉय की अर्ज़ी पर पता चला कि नोटबंदी के पहले पांच दिनों में सबसे ज्यादा प्रतिबंधित नोट अहमदाबाद जिले की केंद्रीय सहकारी बैंक में जमा हुए। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह इस बैंक के निदेशक रह चुके हैं।
  • एक दूसरी आरटीआई अर्जी के जवाब में खुलासा हुआ कि रिजर्व बैंक ने 500 रुपए मूल्य के कुल 971.162 करोड़ नोट और 1000 रुपए मूल्य के कुल 470,972 करोड़ नोट बदले। रिजर्व बैंक ने यह भी बताया कि 30 जून, 2017 तक उसके पास नकली या फर्जी नोटों का कोई ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
  • एक और आरटीआई से पता चला कि जनधन खातों से बड़े पैमाने पर पैसा इधर-उधर किया गया। यूनाइटेड बैंक के एक जनधन खाते में तो 93.82 करोड़ रुपए जमा कराए गए।

आधार

नवंबर 2017 में दाखिल एक आरटीआई से जानकारी सामने आई कि निजता के अधिकार का उल्लंघन करते हुए सरकारी वेबसाइट ने आम लोगों के आधार नंबर और दूसरी निजी जानकारियां दूसरों को उपलब्ध कराईं। ऐसा करने वाली कुल 210 वेबसाइट के बारे में पता चला। इनमें केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग और शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। जो जानकारियां साझा की गईं उनमें लाभार्थियों के नाम, पते और आधार सहित अन्य निजी जानकारियां शामिल हैं।

नगा शांति समझौता

आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक ने सूचना के अधिकार के तहत सरकार से 2015 में हुए नगा समझौते की जानकारी मांगी। उन्होंने सरकारी मध्यस्थों को दिए जाने वाले मानदेय, इस समझौते पर खर्च होने वाला पैसा, एनएससीएन (आईएम) यानी नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (आईजैक मोइवा) के प्रतिनिधियों की यात्रा और रहने आदि पर हुए खर्च का ब्योरा मांगा। इस अर्जी का मामला जब केंद्रीय सूचना आयोग के पास पहुंचा तो ये जानकारियां देने से यह कहकर इनकार कर दिया गया कि ये भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और पूर्वोत्तर में शांति के प्रयासों से जुड़ा मुद्दा है।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना

मई 2017 में एक आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ कि पूर्वोत्तर के 8 राज्यों में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत एक भी एलपीजी कनेक्शन नहीं दिया गया है। आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक 8 मई 2017 तक एक भी परिवार को इस योजना का लाभ नहीं मिला। जो राज्य इस योजना से वंचित हैं उनमें अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिज़ोरम, नगालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम शामिल हैं। सिर्फ बीजेपी शासित असम में 5 और मणिपुर में 27 एलपीजी कनेक्शन इस योजना के तहत मिले हैं। असम के बक्सा जिले में एक, दारांग में एक, धेमाजी में एक और डिब्रूगढ़ में दो कनेक्शन दिए गए हैं। जबकि मणिपुर के काकचिंग जिले में सर्वाधिक 15, थुबल में 8, इंफाल में 2 और जिरिबाम और चुराचांदपुर में एक-एक कनेक्शन इस योजना के तहत दिया गया है।

आयुष मंत्रालय

2015 में एक आरटीआई जानकारी से जानकारी सामने आई थी कि केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय विश्व योग दिवस के लिए लघु अवधि प्रशिक्षकों के रूप में मुस्लिमों की भर्ती के खिलाफ था। आरटीआई के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि इस पद के लिए अक्टूबर 2015 तक कुल 3,841 मुस्लिम अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन इनमें से किसी को भी भर्ती नहीं किया गया। मंत्रालय ने यह भी माना कि विदेशों में लघु अवधि कार्य के लिए कुल 711 मुस्लिम अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, लेकिन इनमें से किसी का भी साक्षात्कार दौर के लिए चयन नहीं हुआ।

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