‘सद्भावना को सिर्फ विविधता में नहीं बल्कि समाज की विभिन्नताओं के जश्न के रुप में देखते थे राजीव गांधी’

गोपालकृष्ण गांधी को साल 2017 के राजीव गांधी सद्भावना पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

फोटो : @INCIndia
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नवजीवन डेस्क

दिल्ली के जवाहर भवन में हुए कार्यक्रम में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ कर्ण सिंह ने गोपालकृष्ण गांधी को राष्ट्रीय एकता, सांप्रदायिक सद्भाव और शांति को बढ़ावा देने में अहम योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया। इस मौके पर सोनिया गांधी ने राजीव गांधी को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को नहीं भुलाया जा सकता। पढ़िए सोनिया गांधी का पूरा भाषण।

उनका पूरा भाषण आप इस वीडियो में देख भी सकते हैं।

‘डॉ. मनमोहन सिंह जी, डॉ. करण सिंह जी, श्री गोपालकृष्ण गांधी जी, श्री मोती लाल वोरा जी तथा देवियों और सज्जनों, आप सबके सानिध्य में आज मैं बहुत प्रसन्न हूं।

राजीव गांधी अगर आज जिंदा होते तो वो 74 वर्ष के होते तथा आज जिनको हम सम्मानित करने जा रहे हैं, वे केवल उनसे एक वर्ष बड़े होते। उनका राजनीतिक जीवन बहुत संक्षिप्त रहा, परंतु उस संक्षिप्त कार्यकाल में उन्होंने हमारी अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी। उन्होंने आईटी, दूरसंचार और कम्प्यूटर पर ध्यान केन्द्रित करने के साथ-साथ भारत के 21वीं शताब्दी में प्रवेश की नींव रखी। महिलाओं के लिए आरक्षण तथा अन्य बातों के साथ-साथ पंचायतों और नगरपालिका के संवैधानिक सशक्तिकरण द्वारा हमारी राजनीति को बदलने के लिए वे अकेले जिम्मेदार थे। उन्होंने हमारे देश के अशांत क्षेत्रों में शांति बहाल की, भले ही इस प्रक्रिया में उन्हें निर्वाचित कांग्रेस राज्य सरकारों का बलिदान देना पड़ा। उन्होंने हमारे युवाओं की विशाल क्षमता को मद्देनजर 18 वर्ष के युवाओं के लिए वोट देने का अधिकार सुनिश्चित किया। उन्होंने पेयजल, प्राथमिक स्वास्थ्य, साक्षरता और कृषि जैसे क्षेत्रों में भारत के समक्ष चुनौतियों का सामना करने के लिए इसे सक्षम बनाने की दृष्टि से आधुनिक विज्ञान और प्राद्योगिकी के उपयोग के लिए नई दिशाओं का सूत्रपात किया।

यह बात महत्वपूर्ण है कि राजीव जी का इस बात में अटूट विश्वास था कि भारत की एकता वास्तव में इसकी अविश्वसनीय विविधता का परिणाम है तथा इसी विविधता ने इसे सुदृढ़ बनाया है। उनके लिए सद्भावना का अर्थ केवल विविधताओं का सम्मान तथा स्वीकार्यता ही नहीं था बल्कि वे इसे समाज की विभिन्नताओं के जश्न के रुप में देखते थे। वे केवल दृष्टिकोणों की भिन्नता के प्रति सहिष्णुता में ही विश्वास नहीं रखते थे बल्कि सक्रिय जुड़ाव में भी उनका विश्वास था ताकि भारत का प्रत्येक नागरिक गरिमा, सुरक्षा और आत्म-सम्मान के साथ जीवन का निर्वहन कर सकें।

सद्भावना के संदर्भ में राजीव गांधी के दृष्टिकोण का एक और पहलू है, जो आज के समय में अत्यधिक प्रांसगिक और सार्थक है। नि:संदेह वे भारत को वैज्ञानिक और तकनीकी शक्ति के रुप में अग्रणी शक्ति बनाने के लिए तेजी से आर्थिक विकास और आर्थिक आधुनिकीकरण के समर्थक थे। लेकिन उनके लिए बढ़ती समृद्धि और सामाजिक उदारवाद एक ही सिक्के के दो पहलू थे, दोनों को इक्कठ्ठे चलना होगा। बढ़ती वैज्ञानिक अस्पष्टतावाद और सामाजिक पूर्वाग्रह के वातावरण में तकनीकी क्षमता का बहुत कम महत्व होगा। हमने देखा है कि अर्थव्यवस्था का खुलापन और दिमाग का संकुचितीकरण एक खतरनाक और विनाशकारी सम्मिश्रण है।

श्री गोपालकृष्ण गांधी एक विशिष्ठ पब्लिक सर्वेंट, प्रशासक, राजनयिक और राज्यपाल रहे हैं। वह एक लेखक और प्रतिष्ठित रचनाकार हैं। वे हमारे संविधान में समाहित उन मूल्यों के प्रबल समर्थकों में से एक हैं जिन पर, निरंतर और योजनाबद्ध तरीके से आघात का प्रयास होता रहा है। हाल के कुछ वर्षों में उनकी लेखनी, उनके दर्द और पीड़ा की अभिव्यक्ति है और हर सही सोच रखने वाला भारतीय उनके विश्लेषण से ही सहमत नहीं है, बल्कि उनकी इस बात से भी सहमत हैं कि इसके समाधान के लिए क्या किया जाए। उनको इस पुरस्कार से सम्मानित करते हुए हम विभाजन, घृणा और कट्टरवाद की उन शक्तियों से लड़ने और सामूहिक रुप से उन विचारधाराओं के प्रति विरोध के अपने संकल्प की अभिव्यक्ति करते हैं जो समग्र राष्ट्रवाद की भावना के विरुद्ध है।

धन्यवाद।

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