'जेन-जी को गुमराह किया गया' वाले धर्मेंद्र प्रधान के बयान पर राउत का हमला, बोले- आप ही हैं जिम्मेदार
संजय राउत ने धर्मेंद्र प्रधान के जेन-जी को गुमराह करने वाले बयान पर पलटवार किया है। राउत ने NEET पेपर लीक और युवाओं की नाराजगी को लेकर BJP पर निशाना साधा।

पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 'जेन-जी को गुमराह करने' वाले बयान पर शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने पलटवार किया है। राउत ने कहा कि अगर जेन-जी को किसी ने भड़काया है तो इसके लिए भाजपा ही जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि युवाओं में नाराजगी शिक्षा मंत्रालय के कामकाज और NEET पेपर लीक जैसे मामलों का नतीजा है।
'जेन-जी को भड़काने वाले आप ही हैं'
संजय राउत ने कहा, "अगर जेन-जी को भड़काया गया था, तो उसे भड़काने वाले आप ही हैं न। जेन-जी आपकी वजह से ही भड़का।" उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्रालय चलाने के तरीके का यह नतीजा है। राउत ने आरोप लगाया कि NEET के पेपर लीक हुए और परीक्षाएं बार-बार टाली गईं, जिसके लिए तत्कालीन शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं।
राउत ने कहा कि युवाओं की नाराजगी को गुमराह किए जाने से जोड़ने के बजाय सरकार को यह देखना चाहिए कि आखिर जेन-जी में असंतोष पैदा क्यों हुआ।
RSS और BJP पर भी साधा निशाना
शिवसेना (यूबीटी) नेता ने RSS और भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि RSS के नेता बार-बार जेन-जी को राष्ट्रविरोधी बताते हैं, जबकि कुछ लोग कहते हैं कि युवाओं को भड़काया गया। राउत ने कहा कि भाजपा के कुछ नेता जेन-जी को 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का हिस्सा बताते हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सभी लोग एक बार बैठकर बैठक कर लें और आपस में तय कर लें कि युवाओं को लेकर उनकी वास्तविक राय क्या है।
धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को संबलपुर में कहा था कि NEET पेपर लीक विवाद के दौरान कुछ लोगों ने जेन-जी को गुमराह करने की कोशिश की। इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राउत ने भाजपा पर निशाना साधा।
एकनाथ शिंदे और प्रधानमंत्री से मुलाकात पर भी सवाल
संजय राउत ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के पीछे एक 'महाशक्ति' होने की बात कही थी। राउत ने कहा कि एकनाथ शिंदे की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है और उन्हें अपना मानसिक संतुलन बनाने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री से छह सांसदों की मुलाकात को लेकर भी राउत ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव चिह्न से जुड़ा मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ऐसे में प्रधानमंत्री से सांसदों की सीधी मुलाकात से उन्हें आशंका है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकती है।
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