जिंदगी और मौत की जंग हार गए अरुण जेटली, दिल्ली के एम्स में ली आखिरी सांस, जानिए कैसा रहा राजनीतिक सफर

पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का निधन हो गया है। वो लंबे समय से बिमार चल रहे थे। उनका इलाज दिल्ली के एम्स अस्पताल में चल रहा था।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

9 अगस्त से एम्स में भर्ती पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली आखिरकार जिंदगी से जंग हार गए। दिल्ली के एम्स में अरुण जेटली ने आखिरी सांस ली। वे 66 वर्ष के थे और 9 अगस्त से दिल्ली एम्स के आईसीयू में भर्ती थे। यह जानकारी दिल्ली एम्स ने खुद दी है। उन्होंने दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली। बता दें कि किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके जेटली को कैंसर भी हो गया था।

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। पिछले कुछ महीनों में वित्त मंत्री अरुण जेटली की सेहत लगातार गिर रही थी। खराब सेहत की वजह से ही उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इसी साल 14 मई को एम्स में जेटली के गुर्दे का प्रत्यारोपण किया गया था।

 जिंदगी और मौत की  जंग हार गए अरुण जेटली, दिल्ली के एम्स में ली आखिरी सांस, जानिए कैसा रहा राजनीतिक सफर

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में हुआ। जेटली वकीलों के परिवार वाली पृष्ठभूमि से आते हैं। उनके माता-पिता का नाम महाराज किशन जेटली और रतन प्रभा जेटली है। जेटली ने दिल्ली के राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने लॉ में ग्रेजुएशन किया है। छात्र जीवन में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

जेटली के राजनीति करियर की शुरूआत उनके छात्र जीवन में ही हो गया था। दिल्ली विश्वविद्यालय में एबीवीपी के विद्यार्थी नेता के रूप में जेटली ने छात्र संघ चुनाव में सक्रिय रूप से भाग लिया था और फिर 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष भी बने थे। एक नजर डालते है उनके राजनीतिक सफर के बारे में।

  • 1977 में जनसंघ में शामिल हुए
  • 1977 में दिल्ली एबीवीपी के अध्यक्ष और एबीवीपी के अखिल भारतीय सचिव बने
  • 1980 में बीजेपी के युवा मोर्चा के अध्यक्ष बने
  • 1991 में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बने
  • 1999 में बीजेपी के प्रवक्ता बने
  • 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने
  • 2000 में वह विधि, न्याय और कम्पनी मामलों एवं जहाजरानी मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री बने
  • 2002 में बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव बने
  • 2003 में कानून और न्याय मंत्री और उद्योग मंत्री बने
  • 2009 में राज्यसभा में विपक्ष के नेता चुने गए
  • 2014 में पहली बार अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़े
  • 2014 को मोदी सरकार की कैबिनेट में वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभालें बाद में रक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला था।

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Published: 24 Aug 2019, 12:42 PM