उत्तराखंड में बीजेपी को झटका, गढ़वाल विश्वविद्यालय चुनावों एनएसयूआई की शानदार जीत, विद्यार्थी परिषद का किला ढहा
उत्तराखंड की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। गढ़वाल विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनावों में और बीजेपी का किला कहे जाने वाले पौड़ी में एनएसयूआई ने छात्र राजनीति में बंपर जीत हासिल कर एबीवीपी का किला ढहा दिया है।

उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। उत्तराखंड में केंद्रीय विश्वविद्यालय में हुए छात्रसंघ चुनाव में बीजेपी की छात्र इकाई विद्यार्थी परिषद का किला ढह गया है और कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई और अन्य समूहों ने जीत हासिल की है। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के पौड़ी परिसर छात्रसंघ चुनाव के नतीजों में एनएसयूआई ने विद्यार्थी परिषद को करारी शिकस्त दी है।
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के बिड़ला परिसर (श्रीनगर विश्वविद्यालय) में छात्रसंघ चुनाव के शुक्रवार देर शाम घोषित नतीजों में अध्यक्ष पद पर जय हो ग्रुप के हिमांशु भंडारी ने जीत दर्ज की। उनके पक्ष में कुल 3301 मत पड़े, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी विद्यार्थी परिषद के भुवन चमोली 1796 मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।
उपाध्यक्ष पद पर छात्रम संगठन के पुलकित अग्रवाल को 2991 मत मिले और उन्होंने जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी प्रीति वर्मा को 2046 मत पड़े। सचिव पद पर एनएसयूआई के मयंक बहुगुणा ने 2708 मत हासिल कर जीत दर्ज की। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे एबीवीपी के पंकज को 2375 मत मिले। सह-सचिव पद पर अमन कुनियाल ने 1694 मत हासिल कर जीत दर्ज की। रनर रही निशा को 1652 मतों पर संतोष करना पड़ा। कोषाध्यक्ष पद पर रामस्वरूप का निर्विरोध निर्वाचन हुआ है।
वहीं, दूसरी ओर विवि प्रतिनिधि पद पर लेफ्ट की छात्र इकाई आइसा के युवराज ने 2979 मत हासिल की जीत हासिल की, जबकि छात्रा प्रतिनिधि पद पर सुनिधि सिंह 2105 मत हासिल कर विजयी रही।
इसके अलावा विश्वविद्यालय के बीजीआर कैंपस के चुनावों में एनएसयूआई का दबदबा रहा। एनएसयूआई ने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की। परिसर में उपाध्यक्ष, सह सचिव, चार कार्यकारिणी सदस्य और यूआर को निर्विरोध चुना गया। विद्यार्थी परिषद को इस बार कार्यकारिणी सदस्य के लिए निर्विरोध निर्वाचित प्रत्याशी से ही संतुष्ट होना पड़ा।
हेमवती नंदन बहुगुणा केंद्रीय विश्वविद्यालय श्रीनगर की छात्र राजनीति को गढ़वाल की सियासत के प्रतिबिम्ब के तौर पर देखा जाता रहा है। शुक्रवार को आए विश्वविद्यालय कैंपस और पौड़ी कैंपस कॉलेज के चुनावी नतीजों ने बदलाव की बयार का संकेत दिया है।
चुनावी नतीजों से साफ संकेत मिलता है कि युवा बीजेपी और आरएसएस से संबद्ध विद्यार्थी परिषद से विमुख हुए हैं। ऐसे में पौड़ी और टिहरी समेत कई जिलों के युवाओं को जोड़े रखने की चुनौती बीजेपी के सामने खड़ी हो गई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि बीते काफी दिनों से गढ़वाल में बीजेपी सरकार और उससे जुड़े संगठनों को लेकर बेचैनी देखी जा रही है। उनका कहना है कि इन चुनावी नतीजों के पीछे पिछले महीने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के देहरादून में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम का भी असर माना जा रहा है। इसके अलावा हाल के महीनों में गढ़वाल के इन जिलों में कई आंदोलन हो चुके हैं और हाल के जेन ज़ी वाला ट्रेंड ही इन चुनावी नतीजों में नजर आता है।
ध्यान होगा कि मोहम्मद दीपक वाला घटनाक्रम भी जिले के कोटद्वार मे ही हुआ था, जिसके बाद सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संगठनों में मौजूदा शासन-प्रशासन के खिलाफ काफी नाराजगी भी दिखी थी।
राज्य की राजनीतिक में हाल के दिनों में बीजेपी कई मुद्दों पर बैकफुट पर नजर आई है। वह अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लोगों को आक्रोश हो, बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हो, बिना पर्यावरण की चिंता किए पहाड़ों को काटकर नए मार्ग बनाने की परियोजनाएं हों और नैनीताल, हरिद्वार आदि जिलों में बढ़ता जा रहा सामाजिक तनाव हो।
उत्तराखंड का पौड़ी जिला उत्तराखंड की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। मोदी सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत इसी जिले से हैं। पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र राज्य की हाई प्रोफाइल सीटों में शुमार रहा है। इसके अलावा जिले की पौड़ी, कोटद्वार, लैंसडाउन, चौबट्टाखाल, यमकेश्वर, श्रीनगर विधानसभा सीटों से बीजेपी के विधायक हैं। कुल मिलाकर 6 विधायक, 2 मंत्री और एक सांसद इस जिले से हैं। ऐसे में यहां होने वाले हर चुनाव पर दिग्गजों की नजर रहती है।
पौड़ी क्षेत्र से मौजूदा धामी सरकार में मंत्री धन सिंह रावत और सतपाल महाराज जैसे इसी जिले से हैं, जबकि कोटद्वार से ऋतु खंडूरी विधानसभा अध्यक्ष हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव के नतीजे राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। चुनाव में एनएसयूआई ने सभी प्रमुख पदों पर जीत दर्ज कर विद्यार्थी परिषद को बड़ा झटका दिया है।
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