'नशा तस्कर और शराब निर्माता BJP के संरक्षण में', शिवसेना UBT का हमला- महाराष्ट्र बन रहा 'उड़ता महाराष्ट्र'

शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार के 2029 तक नशामुक्त राज्य बनाने के संकल्प पर सवाल उठाए हैं और BJP पर नशे के कारोबार को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

फोटोः सोशल मीडिया
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महाराष्ट्र सरकार ने 2029 तक राज्य को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है, लेकिन इस घोषणा के बाद शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने बीजेपी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में सरकार की इस पहल को “पाखंडी” और “घटना-आधारित तमाशा” बताया। शिवसेना (यूबीटी) ने सवाल उठाया कि एक दशक से अधिक समय तक सत्ता में रहने के बावजूद सरकार राज्य में बढ़ते नशीले पदार्थों के कारोबार पर लगाम क्यों नहीं लगा सकी।

‘2029 की तारीख कैलेंडर में लिख लें’

ठाकरे गुट ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 2014 से केंद्र में सत्ता में है और देवेंद्र फडणवीस भी लगभग इतने ही समय से महाराष्ट्र की सत्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। पार्टी ने लोगों से अपील की कि 2029 की समयसीमा को अपनी डायरी या कैलेंडर में दर्ज कर लें और समय पूरा होने पर मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व से सवाल पूछें कि क्या महाराष्ट्र वास्तव में नशामुक्त हो गया है।

संपादकीय में राज्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया गया कि अवैध मादक पदार्थों का कारोबार, शराब निर्माता और तस्करी से जुड़े आपूर्तिकर्ता कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण में काम कर रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) ने नासिक, पुणे और सतारा में सामने आ चुकी अवैध विनिर्माण इकाइयों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस के नेतृत्व वाले गृह विभाग पर भूमि आवंटन और रासायनिक गोली कारखानों से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की जांच दबाने का आरोप लगाया।


‘नासिक-पुणे बने उड़ते महाराष्ट्र के दो पंख’

संपादकीय में कहा गया कि राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और नशे के बढ़ते कारोबार के कारण नासिक और पुणे जैसे इलाके महाराष्ट्र को “उड़ता महाराष्ट्र” की ओर ले जा रहे हैं। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि जब नशे के खिलाफ स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए तो बीजेपी नेताओं ने उनका मजाक उड़ाया।

शिवसेना (यूबीटी) ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों के तस्कर, शराब निर्माता, सिगार-सिगरेट विक्रेता और भांग-गांजा बेचने वाले लोग कथित तौर पर बीजेपी के संरक्षण में हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि नशे के कारोबार से जुड़े हितों का असर बीजेपी की राजनीति पर भी है, जबकि वही पार्टी महाराष्ट्र को नशामुक्त बनाने का संकल्प ले रही है।

शराब कारोबार और ‘नशे’ की दूसरी परिभाषा पर भी सवाल

‘सामना’ के संपादकीय में यह भी कहा गया कि शराब बनाने वाली कई चीनी मिलों के मालिक बीजेपी खेमे में शामिल हो चुके हैं। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री फडणवीस इन “शराब व्यापारियों” को शराब की बिक्री रोकने की कड़ी चेतावनी देंगे या चुनावी प्रचार के मकसद से शराब की परिभाषा को ही बदलने की कोशिश होगी।

शिवसेना (यूबीटी) ने कहा कि महाराष्ट्र में नशाखोरी केवल चरस, गांजा और भूरी चीनी जैसे अवैध पदार्थों तक सीमित नहीं है। पार्टी के मुताबिक नशा और मदहोशी भ्रष्टाचार और पैसे से भी पैदा होती है और महाराष्ट्र को इस तरह के “नशे” से भी मुक्त करने की जरूरत है।

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