मराठा आरक्षण का मुद्दा सदन में उठाने की नहीं मिली इजाजत, प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाया सवाल

प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मराठा आरक्षण पर मेरे शून्यकाल के प्रस्ताव पर मतदान होने और संसद के पहले दिन उठाए जाने के लिए सूचीबद्ध होने के बावजूद, मुझे यह कहते हुए इसे उठाने की अनुमति नहीं दी गई कि यह राज्य का विषय है।

प्रियंका चतुर्वेदी को मराठा आरक्षण का मुद्दा सदन में उठाने की नहीं मिली इजाजत
प्रियंका चतुर्वेदी को मराठा आरक्षण का मुद्दा सदन में उठाने की नहीं मिली इजाजत
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नवजीवन डेस्क

उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने सोमवार को मराठा आरक्षण के मुद्दे को सूचीबद्ध होने के बावजूद 'शून्यकाल' के दौरान उठाने की अनुमति नहीं दिए जाने पर आश्चर्य जताया और इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।

प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मराठा आरक्षण पर मेरे शून्यकाल के प्रस्ताव पर मतदान होने और संसद के पहले दिन उठाए जाने के लिए सूचीबद्ध होने के बावजूद, मुझे यह कहते हुए इसे उठाने की अनुमति नहीं दी गई कि यह राज्य का विषय है।"


शिवसेना नेता ने कहा कि आरक्षण के इस मुद्दे को केवल संवैधानिक संशोधन से ही हल किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "इसलिए संसद सही मंच है। फिर भी मुझे अपने राज्य के लोगों के लिए बोलने की इजाजत नहीं दी गई।" प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाया।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण का मुद्दा कुछ महीनों से गरमाया हुआ है। मनोज जारांगे पाटिल के नेतृत्व में पिछले कुछ महीनों के दौरान राज्य में मराठा आरक्षण के लिए कई आंदोलन हो चुके हैं। जारांगे पाटिल के आमरण अनशन के सामने झुकते हुए राज्य की शिंदे सरकार ने कमेटी का गठन किया है।

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