स्कूलों में 'नो-एंट्री' पर आर-पार: मानसून सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस विधायकों का वॉकआउट, विधानसभा के बाहर धरना
जब कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा में जाने की कोशिश की तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। कई नेता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। ये विधायक विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए।

राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र बृहस्पतिवार को शुरू हुआ जिसमें मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों ने भाग नहीं लिया। कांग्रेस विधायकों ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कथित प्रतिबंध के मुद्दे को लेकर विधानसभा परिसर के बाहर धरना दिया।
सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विपक्षी सदस्यों की गैरमौजूदगी पर निराशा जताई और उनसे कार्यवाही में हिस्सा लेने की अपील की। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग और विधायी कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने भी कार्यवाही में भाग नहीं लेने के लिए कांग्रेस विधायकों की आलोचना की। कुछ विधायी काम निपटाने व शोकाभिव्यक्ति के बाद कार्यवाही शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले कांग्रेस विधायक बृहस्पतिवार की सुबह पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचे थे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और मीडिया कवरेज पर कथित प्रतिबंध का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जनता और मीडिया को सरकारी स्कूलों की खराब हालत को उजागर करने से रोकने की कोशिश कर रही है।
जूली ने कहा कि इस आदेश को वापस लिया जाए। कांग्रेस नेताओं ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के इस्तीफे के भी मांग की। बाद में ये विधायक जूली की अगुवाई में पोद्दार स्कूल से पैदल मार्च करते हुए विधानसभा के मुख्य दरवाजे तक पहुंचे।
जब विधायकों ने समूह में विधानसभा में जाने की कोशिश की तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। कई नेता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। ये विधायक विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए।
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों के परिसर में प्रधानाचार्य की अनुमति के बिना 'बाहरी लोगों' के प्रवेश पर रोक लगा दी है। साथ ही लिखित मंजूरी के बिना स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर भी रोक लगा दी गई है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने हाल ही में घोषणा की थी कि उसकी टीम राज्य के उन स्कूलों का दौरा करेगी जिनकी हालत ‘ठीक नहीं है’। इसके बाद ही राज्य के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने रोक संबंधी यह आदेश निकाला। हालांकि, शिक्षा मंत्री दिलावर ने कहा कि इस आदेश से आगंतुकों पर पूरी तरह कोई रोक नहीं है।
आज के धरना स्थल पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि विधायकों को नियमित दरवाजे से अंदर नहीं जाने दिया जा रहा है तथा दरवाजे पर ताला लगा दिया गया है।
डोटासरा ने राज्य की बीजेपी सरकार पर "तानाशाही" वाला रवैया अपनाने का आरोप लगाया और स्कूलों की हालत दिखाने पर लगाई गई रोक पर सवाल उठाए।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि विधानसभा के गेट नंबर छह पर ताला इसलिए लगाया गया था ताकि कांग्रेस विधायक शिक्षा विभाग में कथित भ्रष्टाचार, शिक्षा मंत्री की कथित विफलता, कथित कृषि घोटाले और स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में कमियों जैसे मुद्दों को न उठा सकें।
उन्होंने कहा,'सवालों से डरती, जवाबदेही से भागती...ये बीजेपी की कैसी भगोड़ी सरकार है जो लोकतंत्र पर ताला लगाती है? विधायकों को सदन में प्रवेश से रोकना और लोकतंत्र के मंदिर पर ताला लगाना, भाजपा सरकार द्वारा सीधे-सीधे लोकतंत्र की हत्या करना है।'
नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि विधानसभा सुचारु रूप से चले, लेकिन उन्होंने सवाल किया कि विधायकों को उस दरवाजे से प्रवेश करने से क्यों रोका गया जिसका वे पारंपरिक रूप से इस्तेमाल करते रहे हैं।
जूली ने पूछा, ‘‘जब से विधानसभा बनी है, हम इसी दरवाजे से आते रहे हैं। आज इसे क्यों बंद किया गया?’’ उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर विशेषाधिकार प्रस्ताव लाएगी।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस विधायक पहले सुबह स्कूल गए जहां उन्हें एक नोटिस दिखाया गया जिसमें कहा गया था कि वे परिसर में प्रवेश नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘‘फिर हम पैदल विधानसभा पहुंचे और हमें यहां प्रवेश करने से रोक दिया गया।’’
जूली ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए एक ‘आवाज दबाने वाला कानून’ लेकर आई है और मांग की कि इस आदेश को वापस लिया जाए। राज्य के सरकारी स्कूलों की जर्जर हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि 3,768 स्कूलों को जर्जर घोषित किया गया था, लेकिन उनमें से किसी में भी पुनर्निर्माण का काम पूरा नहीं हुआ है।
उन्होंने आगे दावा किया कि लगभग 85,000 कक्ष खराब हालत में हैं और अध्यापकों के 1.25 लाख से अधिक पद खाली हैं।
शिक्षा की व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा जरूरी
कांग्रेस विधायकों के धरने में मौजूद पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा,‘‘शिक्षा की व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा ...इन तमाम मुद्दों को लेकर राज्य सरकार बिल्कुल गंभीर नहीं है।’’
सरकारी स्कूलों की इमारतों की जर्जर हालत और झालावाड़ में स्कूल हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,‘‘अब सरकार चाहती है कि आप वहां जाओ ही मत। ना पत्रकार जाए, ना कोई फोटो खींचे। मतलब गलती को छिपाने के लिए हर सीमा को पार करने के लिए सरकार तैयार है। जनता सब देख रही है। सरकार की जवाबदेही तय करनी पड़ेगी।’’
उन्होंने कहा,‘‘सरकार बौखलाई हुई है, ना जवाब है, ना कोष है, ना नीयत है। अगर सरकार प्राथमिकता तय करे तो सुधार हो सकता है। लेकिन करना नहीं चाहती।’’
वहीं सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विपक्ष के सदस्यों के सदन में नहीं होने पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की बेंचों को खाली देखकर मन में पीड़ा है। विपक्ष के सदस्यों से कार्यवाही में भाग लेने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थिति ठीक नहीं है।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए
