सिलक्यारा सुरंग हादसा: आखिर सुरंग से कब बाहर आएंगे 41 मजदूर? बचाने के लिए अब 4 योजनाओं पर चल रहा काम

मजदूरों को निकालने के लिए अब 4 योजनाओं पर काम किया जा रहा है - पहला, मैन्युअली, यानी हाथ से खुदाई। दूसरा, सुरंग के ऊपर से ड्रिलिंग। तीसरा, बड़कोट की तरफ से कम ऊंचाई की सुरंग जल्द से जल्द बनाकर घटनास्थल पर पहुंचने का और चौथा सुरंग के दोनों किनारों पर समानांतर (हॉरिजेंटल) ड्रिलिंग का है।

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

 सिलक्यारा सुरंग के ढहने से उसके अंदर 15 दिनों से 41 मजदूर मौत से जूझ रहे हैं और पूरे देश में उनकी सलामती और सुरक्षित बाहर आने की दुआ मांगी जा रही है। 47 मीटर की ड्रिलिंग के बाद आई दिक्कतों के कारण ड्रिलिंग का काम बंद कर दिया गया। ऑगर मशीन खराब हो जाने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन को एक बड़ा झटका लगा है। बरमा के फंस जाने के बाद अब उसे निकालने के लिए हैदराबाद से प्लाजमा कटर मशीन को बुलवाया गया है, जिसने कटिंग का काम शुरू कर दिया है।

मजदूरों को निकालने के लिए अब 4 योजनाओं पर काम किया जा रहा है - पहला, मैन्युअली, यानी हाथ से खुदाई। दूसरा, सुरंग के ऊपर से ड्रिलिंग। तीसरा, बड़कोट की तरफ से कम ऊंचाई की सुरंग जल्द से जल्द बनाकर घटनास्थल पर पहुंचने का और चौथा सुरंग के दोनों किनारों पर समानांतर (हॉरिजेंटल) ड्रिलिंग का है।

पहला प्लान : ऑगर मशीन के फंसे हिस्से को काटकर निकाला जाएगा। इसके बाद मजदूर हाथों से खुदाई कर मलबा निकालेंगे। मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना भी अब इस में मदद करेगी। इसके लिए भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के एक इंजीनियर समूह (मद्रास सैपर्स) की एक इकाई को बुलाया गया है। इंजीनियर रेजिमेंट के 30 जवान मौके पर पहुंच गए हैं। मैनुअल ड्रिलिंग के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर सुरंग के अंदर रैट बोरिंग करेगी।

एक अधिकारी ने बताया कि मैन्युअल ड्रिलिंग करने के लिए भारतीय सेना नागरिकों के साथ मिलकर हथौड़े और छेनी जैसे हथियारों से सुरंग के अंदर के मलबे को खोदेगी और फिर पाइप को पाइप के अंदर बने प्लेटफॉर्म से आगे बढ़ाया जाएगा। सुरंग के अंदर 41 लोग सुरक्षित और स्थिर हैं। प्लाज्मा कटर पहुंच गया है और पाइप लाइन में फंसी मशीन को काटने का काम चल रहा है।

दूसरा प्लान : इसमें निर्माणाधीन सुरंग के ऊपरी क्षेत्र में 90 मीटर की वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही है। इसके लिए मशीन का प्लेटफॉर्म तैयार कर लिया गया है। मशीन के एक हिस्से को भी वहां पहुंचा दिया गया है और वर्टिकल ड्रिलिंग का काम भी शुरू हो गया है। अभी तक 20 मीटर की ड्रिलिंग कर ली गई है।

पीएमओ के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने कहा कि वर्टिकल ड्रिलिंग हो रही है। 20 मीटर ड्रिलिंग हो चुकी है। अभी 66 मीटर ड्रिलिंग और बाकी है। सुरंग के दूसरे छोर पाल गांव बड़कोट की तरफ से खुदाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। यह करीब पांच सौ मीटर हिस्सा है। इस अभियान में भी 12 से 13 दिन लगने का अनुमान है। अपर सचिव (सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार) एवं एम.डी (एनएचआईडीसीएल) महमूद अहमद ने बताया कि ड्रिफ्ट टनल बनाने के विकल्प पर भी कार्य शुरू किया गया है। ड्रिफ्ट टनल का डिजाइन तय कर फ्रेम के फेब्रिकेशन का कार्य शुरू कर दिया गया है। टीएचडीसी ने भी बड़कोट साइड से टनल का निर्माण शुरू कर दिया है, जिसमें अब तक चार ब्लास्ट कर 10 मीटर का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। ब्लास्टिंग में विशेष सावधानी बरती जा रही हैं।

इस दौरान महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी भी मौजूद रहे। योजना चार के तहत सुरंग के दोनों किनारों पर समानांतर (हॉरिजेंटल) ड्रिलिंग की जानी है। इसका सर्वे हो चुका है। रविवार को इस योजना पर भी काम शुरू किया जा सकता था, पर अभी इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। उधर, सिलक्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन के संबंध में आज देर शाम अस्थायी मीडिया सेंटर, सिलक्यारा में प्रेस ब्रीफिंग की गई, जिसमें सचिव उत्तराखंड शासन डॉ. नीरज खैरवाल ने बताया कि पाइप में फंसे ऑगर मशीन की ब्लेड एवं साफ्ट को काटने का कार्य जारी है। उन्होंने बताया पाइप से अब 8.15 मीटर के ऑगर मशीन की ब्लेड एवं साफ्ट के हिस्से को निकाला जाना बाकी है।

अपर सचिव (सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार) एवं एम.डी (एनएचआईडीसीएल) महमूद अहमद ने बताया कि वर्टिकल ड्रिलिंग का कार्य तेजी से चल रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक 19.2 मीटर वर्टिकल ड्रिलिंग कर ली गई है। आगे का कार्य भी पूरी तेजी और सावधानी से किया जा रहा है। इस दौरान जिला अधिकारी अभिषेक रुहेला, पुलिस अधीक्षक अर्पण यदुवंशी, सी.डी.ओ गौरव कुमार मौजूद रहे।

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