SIR: कांग्रेस ने ECI को लिखा पत्र, BJP पर फॉर्म-7 के दुरुपयोग का लगाया आरोप, रोकने और जांच कराने की मांग की

कांग्रेस ने लिखा है कि बीजेपी विपक्षी वोटरों को हटाने के लिए फॉर्म- 7 का बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल कर रही है। यह एक सिस्टमैटिक सेटअप है जिसका इस्तेमाल लाखों दलित, आदिवासी, ओबीसी और अल्पसंख्यक वोटरों को टारगेट करने और उनके वोट छीनने के लिए किया जाता है।

SIR: कांग्रेस ने ECI को लिखा पत्र, BJP पर  फॉर्म-7 के दुरुपयोग का लगाया आरोप, रोकने और जांच कराने की मांग की
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नवजीवन डेस्क

कांग्रेस ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए गुरुवार को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है और आग्रह किया है कि इससे संबंधित सभी संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया रोकी जाए और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

फॉर्म-7 मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम के शामिल होने पर आपत्ति जताने या पहले से सूचीबद्ध नाम को हटाने का अनुरोध करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला आधिकारिक आवेदन पत्र है। कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर दावा किया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

केसी वेणुगोपाल ने पत्र में कहा, ‘‘हम इस आयोग का ध्यान एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत दावा और आपत्तियां दर्ज कराने के चरण में योग्य मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से हटाए जाने से संबंधित है।’’

उन्होंने दावा किया कि जो बात अत्यंत चिंताजनक है और जिस पर आयोग का तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है, वह यह है कि मीडिया की खबरों और पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है जो बीजेपी से जुड़े हैं और निर्वाचन आयोग के ही दस्तावेज़ ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।


कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि इन कार्रवाइयों को रोका नहीं गया और आयोग द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया, तो इससे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को अनुचित चुनावी लाभ प्राप्त करने का दुस्साहस मिलेगा और लाखों मतदाता विशेषकर पिछड़े, हाशिए पर रहने वाले समुदायों से संबंधित लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।

वेणुगोपाल ने कहा कि दावों एवं आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति पर ही होता है और झूठी जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जो कुछ हो रहा है, वह अत्यंत चौंकाने वाला है और इस पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

वेणुगोपाल ने दावा किया, ‘‘फॉर्म-7 के ‘प्री-प्रिंटेड’ आवेदन बड़ी संख्या में किसी केंद्रीकृत प्रणाली से तैयार किए जा रहे हैं। इनका उपयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इन फॉर्म को संगठित ढंग से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ को सौंपा जा रहा है।’’

उनके अनुसार, इन फॉर्म में आपत्तिकर्ता की पहचान से जुड़ी आवश्यक जानकारियां नहीं होती।कांग्रेस नेता के अनुसार, कई मामलों में जिन लोगों के नाम से फॉर्म-7 भरे गए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से इनकार किया कि उन्होंने ऐसा कोई फॉर्म भरा था। उनका कहना है कि राजस्थान और असम में यह दुरुपयोग स्पष्ट रूप से दिख रहा है।


कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘बिना वैध पहचान व प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए। बीएलओ और ईआरओ को निर्देश दिया जाए कि व्यक्तिगत सत्यापन के बिना कोई भी नाम न हटाया जाए। ऐसे सभी व्यक्तियों/संगठनों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाए जो फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस पूरे मामले की तत्काल और स्वतंत्र जांच कराई जाए।’’

उन्होंने आयोग से यह आग्रह भी किया, ‘‘12 राज्यों में फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।’’ वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘मताधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। किसी भी संगठित प्रयास द्वारा नागरिकों को इससे वंचित करना असंवैधानिक है। हम आयोग से आग्रह करते हैं कि वह इस विषय को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए।’’

गौरतलब है कि बीजेपी पर एसआईआर के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग के आरोप लगातार लगते रहे हैं। पश्चिम बंगाल और असम में सबसे ज्यादा बीजेपी से जुड़े लोगों द्वारा फॉर्म-7 के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। असम की बीजेपी सरकार के मुखिया सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने तो खुलेआम यह बात एक तरह से स्वीकार भी की है। हाल ही में उन्होंने कहा कि, “यह छिपाने की बात नहीं है कि हम मियां के खिलाफ हैं। हां, हम उनके वोट चुरा रहे हैं। हां यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि हम फॉर्म 7 भरकर उनके नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए चुनाव आयोग को दें। मैंने खुले तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे ऐसा काम करें, हम उन्हें वोट के अधिकार से वंचित करना चाहते हैं...वे जाएं और बांग्लादेश में वोट डालें....।” हालांकि 28 जनवरी को उन्होंने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वे मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि बांग्लादेशियों के खिलाफ हैं।

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