बंगाल के बाद त्रिपुरा बीजेपी में दलबदल की अटकलें, आननफानन में मनाने में पहुंचे तीन केंद्रीय नेता

बीजेपी सूत्रों के अनुसार संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष, पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रभारी महासचिव अजय जामवाल और केंद्रीय पर्यवेक्षक फणींद्र नाथ शर्मा राज्य के मंत्रियों, विधायकों और नेताओं के साथ बैठक करने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर अगरतला पहुंचे हैं।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

पश्चिम बंगाल में बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे मुकुल रॉय के टीएमसी में जाने के बाद त्रिपुरा के कई विधायकों के दलबदल की अटकलों ने बीजेपी की बेचैनी बढ़ा दी है। कुछ नेताओं के दूसरे दलों में शामिल होने की सुगबुगाहट आते ही बुधवार को बीजेपी के तीन वरिष्ठ केंद्रीय नेता राज्य में पहुंचे और राज्य के नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।

हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वोत्तर राज्य में पार्टी में किसी भी नए राजनीतिक हलचल को खारिज कर दिया है। लेकिन खबर है कि बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे मुकुल रॉय के हाल ही में तृणमूल कांग्रेस में वापसी के बाद अब त्रिपुरा के कुछ नेता भी बीजेपी छोड़ने की फिराक में हैं।

बीजेपी सूत्रों ने बताया कि संगठन के राष्ट्रीय महासचिव बी एल संतोष, पूर्वोत्तर क्षेत्र के प्रभारी महासचिव अजय जामवाल और केंद्रीय पर्यवेक्षक फणींद्र नाथ शर्मा बुधवार को राज्य के नेताओं, विधायकों, मंत्रियों और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों के साथ बैठक करने के लिए दो दिवसीय यात्रा पर अगरतला पहुंचे। एक अन्य केंद्रीय पर्यवेक्षक विनोद सोनकर भी बुधवार को आने वाले थे, लेकिन अंतिम समय में उनका दौरा रद्द कर दिया गया।

बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा कि तृणमूल लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत त्रिपुरा में पुनर्जीवित हो सकती है, लेकिन पश्चिम बंगाल स्थित पार्टी ने पहले दो बार वहां राजनीतिक आधार स्थापित करने का प्रयास किया था और वह बुरी तरह विफल रही थी, क्योंकि राज्य में इसकी शून्य स्वीकृति है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के त्रिपुरा प्रदेश अध्यक्ष आशीष सिंघा ने कहा कि पार्टी सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी त्रिपुरा में पार्टी को पुनर्जीवित करने के लिए उत्सुक हैं और वे जल्द ही कुछ नेताओं को राज्य में संगठन को और मजबूत करने के लिए भेजेंगे।

मुकुल रॉय के साथ उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय के तृणमूल में फिर से शामिल होने के बाद त्रिपुरा में नए राजनीतिक विकास की अटकलें तेज हो गई हैं। लगभग चार साल पहले बीजेपी में शामिल होने से पहले रॉय तृणमूल के संगठनात्मक मामलों की निगरानी के लिए अक्सर त्रिपुरा जाते थे।
रॉय के प्रभाव में, सुदीप रॉय बर्मन के नेतृत्व में कांग्रेस के सात विधायक और बड़ी संख्या में पार्टी के नेता और कार्यकर्ता 2016 में तृणमूल में शामिल हुए। हालांकि अगले ही साल वे बीजेपी में शामिल हो गए। सभी सात नेता 2018 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर जीते और उनमें से रॉय बर्मन, प्रणजीत सिंह रॉय और रतन लाल नाथ को मंत्री बनाया गया और विश्वबंधु सेन को उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता समीर रंजन बर्मन के बेटे रॉय बर्मन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, सूचना प्रौद्योगिकी विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री बने, लेकिन मई 2019 में मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब के साथ मतभेदों के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। रॉय बर्मन तथा साथी विधायक और पार्टी के पूर्व उपाध्यक्ष राम प्रसाद पॉल के नेतृत्व में कम से कम 11 बीजेपी विधायक औरृकुछ नेता केंद्रीय नेतृत्व के साथ त्रिपुरा में पार्टी मामलों पर चर्चा करने के लिए पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली गए थे।

वहीं बीजेपी नेताओं और विधायकों के एक वर्ग के बीच असंतोष की अटकलों के बीच, मुख्यमंत्री विप्लब देब ने पिछले साल दिसंबर में अगरतला में एक सार्वजनिक सभा के माध्यम से सार्वजनिक जनादेश की घोषणा की थी, लेकिन बाद में केंद्र और राज्य के नेताओं की नाराजगी के बाद अपनी योजना से पीछे हट गए थे।

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Published: 16 Jun 2021, 10:12 PM