त्यौहारों से पहले ‘चीनी घोटाला’ मोदी सरकार का नया ‘मास्टर स्ट्रोक’: कांग्रेस
सुरजेवाला ने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि जनता को खुलेआम मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों से लुटवाने का मोदी सरकार का यह नया मास्टर स्ट्रोक है। 12 साल से मोदी सरकार ऐसे ही मास्टर स्ट्रोक लगा रही है और महंगाई से आम जनता की मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने त्योहारों से पहले चीनी की कीमत में भारी बढ़ोतरी को लेकर गुरुवार को मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने इसे ‘चीनी घोटाला’ बताते हुए मोदी सरकार का नया ‘मास्टर स्ट्रोक’ करार दिया।
पार्टी महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा कि चीनी की कीमत करीब 45 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर अगस्त में 70-75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। उन्होंने दावा किया कि इससे त्योहारों के चार महीनों में देश के उपभोक्ताओं पर करीब 36,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
चीनी घोटाला मोदी सरकार का नया मास्टर स्ट्रोक
कांग्रेस नेता ने इसे ‘‘चीनी घोटाला’’ करार दिया और आरोप लगाया कि इसका फायदा जमाखोरों और कालाबाजारियों को हो रहा है। उन्होंने सरकार की नीतियों पर तंज कसते हुए कहा कि ‘‘जनता को खुलेआम मुनाफाखोरों और कालाबाजारियों से लुटवाने का मोदी सरकार का यह नया मास्टर स्ट्रोक है। 12 साल से मोदी सरकार ऐसे ही मास्टर स्ट्रोक लगा रही है और महंगाई के जरिये आम जनता की मुश्किलें बढ़ाई जा रही हैं।’’
चीनी के भंडार और उत्पादन में कमी
सुरजेवाला के अनुसार, 2025-26 सत्र की शुरुआत में चीनी का भंडार करीब 50 लाख टन था, जबकि पिछले सत्र में यह 80 लाख टन था। उन्होंने ‘इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के 30 अप्रैल, 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि इस सत्र में चीनी उत्पादन करीब 275 लाख टन रहा, जबकि सरकार की ओर से पहले 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान बताया गया था।
त्योहारों के कारण चीनी की खपत बढ़ती है
सुरजेवाला ने कहा कि अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारों के कारण चीनी की मासिक खपत औसतन 24 लाख टन से बढ़कर करीब 30 लाख टन हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 20 अगस्त को 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात का फैसला किया, लेकिन विदेश से चीनी आने और उसके परिष्करण में समय लगने के कारण इसका लाभ त्योहारों के मौसम में उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा।
एथेनॉल नीति भी चीनी की कीमत में बढ़ोतरी का कारण
कांग्रेस महासचिव ने एथेनॉल नीति को भी चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण बताया। सुरजेवाला ने दावा किया कि नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच एथेनॉल उत्पादन में गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ, जिससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई। मोदी सरकार ने नवंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच E20 मिलावटी तेल के उत्पादन में 32% शुगरकेन कॉम्प्लेक्स का इस्तेमाल किया। शुगरकेन कॉम्प्लेक्स मतलब- शुगर, डी मोलासेस या सी मोलासेस नतीजा ये हुआ कि बाजार में जनता के लिए उपलब्ध होने वाली चीनी गाड़ियों में चली गई। यानी- E20 की वाहवाही लूटे मोदी सरकार और खामियाजा भुगतें लोग।
सुरजेवाला ने 2017 में राशन की दुकानों के जरिए रियायती दर पर चीनी देने की योजना बंद किए जाने का भी मुद्दा उठाया और कहा कि इससे करोड़ों परिवारों को सस्ती चीनी मिलने की सुविधा समाप्त हो गई। पहले कांग्रेस सरकार एक स्कीम के जरिए देश के 40 करोड़ लोगों को राशन की दुकान से हर महीने, हर व्यक्ति को 500 ग्राम चीनी ₹13.50/किलो के हिसाब देती थी। इस पर कांग्रेस सरकार ₹18.50/किलो की सब्सिडी खुद वहन करती थी, लेकिन मोदी सरकार ने साल 2017 में यह योजना बंद कर दी।
उन्होंने कहा कि देश की जनता इस बार जब दशहरा और दीपावली का त्योहार मनाएगी, तो मोदी सरकार के महंगाई की मार याद बार-बार आएगी।
