इस्लामाबाद वार्ता में पहले दौर की चर्चा का सार: न्यूक्लियर-मिसलाइल प्रोग्राम से लेकर होर्मुज और लेबनान पर बातचीत

इस्लामाबाद वार्ता में शनिवार का दौर कामयाब रहा या नहीं, यह विशेषज्ञ तय करेंगे, लेकिन फिलहाल ईरान और अमेरिका दोनों ही इसे आज भी जारी रखने पर सहमत नजर आ रहे हैं। ईरान और अमेरिका दोनों ने ही अपनी मांगे सामने रख दी हैं।

मांगों और मुद्दों का लिखित मसौदा तैयार करता ईरानी प्रतिनिधिमंडल (फोटो - सौजन्य  ड्रॉपसाइट)
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नवजीवन डेस्क

इस्लामाबाद वार्ता के दौरान ईरान-अमेरिका के बीच विशेषज्ञ चरण और लिखित दस्तावेज़ शामिल किए गए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच सीधी बातचीत इस्लामाबाद के सेरेना होटल में हुई। इससे पहले दोनों प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मिले।

सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान बातचीत में शामिल होने पर तब सहमत हुआ जब अमेरिका ने ईरान की फ़्रीज़ की गई संपत्तियों को जारी करने पर सहमति जताई और इज़रायल ने बेरूत से दक्षिणी लेबनान तक अपने हमलों को कम करने पर सहमति दी। तेहरान इसे लेबनान में संघर्ष-विराम की प्रतिबद्धता की दिशा में आंशिक प्रगति मानता है। अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से इन संपत्तियों को अनफ़्रीज़ किए जाने की पुष्टि नहीं की है।

सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने यह साफ़ कर दिया है कि वह अभी भी इज़रायल को अपनी पूर्व-शर्तों का पूरी तरह से पालन करने के लिए बाध्य करने की ज़िम्मेदारी अमेरिका पर ही डालता है।

शनिवरा को हुई बातचीत निम्न मुख्य चरणों से गुज़री:

🔸शुरुआती उच्च-स्तरीय चर्चाएं

🔸विशेषज्ञ-स्तरीय समिति के काम के लिए एक विराम

🔸और मुख्य टीमों में विशेष प्रतिनिधिमंडलों के शामिल होने के साथ बातचीत की फिर से शुरुआत।

बातचीत तीन समितियों – राजनीतिक, आर्थिक और कानूनी – में विभाजित है; ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची राजनीतिक पक्ष का नेतृत्व कर रहे हैं, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती आर्थिक मामलों को देख रहे हैं, और उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी कानूनी मामलों की ज़िम्मेदारी संभाल रहे हैं।

फ़ार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, आमने-सामने की बातचीत फिलहाल समाप्त हो गई है, लेकिन दोनों पक्ष लिखित दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान जारी रखे हुए हैं।

▪️ तस्नीम की रिपोर्ट है कि जहां बातचीत लिखित दस्तावेज़ों के आदान-प्रदान के चरण तक पहुंच गई थी, वहीं अमेरिका की "अत्यधिक मांगों" के कारण प्रगति धीमी पड़ गई है और उसमें बाधा आ रही है।

▪️ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ विवाद का एक मुख्य बिंदु बना हुआ है। फ़ाइनेंशियल टाइम्स ने भी इसी बात की रिपोर्ट दी है।

▪️ बताया जा रहा है कि ईरानी अधिकारी इस बात पर अड़े हुए हैं कि उनकी सैन्य उपलब्धियों को सुरक्षित रखा जाए और उनके राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा की जाए।

ईरानी प्रतिनिधिमंडल के करीबी एक सूत्र ने फ़ार्स को बताया कि बातचीत का एक और दौर आज रात या कल होने की संभावना है।


इस बीच ड्रॉपसाइट ने अल जज़ीरा के विश्लेषक अली हाशेम के हवाले से बताया है कि फिलहाल बातचीत कहां पहुंची है। उन्होंने निम्न बिंदुओं को रेखांकित किया:

➤ किसी समझौते पर काम करने का ढांचा लगभग तैयार है।

➤ "यह ढांचागत समझौता संघर्ष को नियंत्रित करने और तब तक युद्धविराम की अवधि बढ़ाने का एक माध्यम है, जब तक कि कोई वास्तविक समाधान नहीं निकल जाता।"

➤ ग़ालिबफ़-वेंस की मुलाक़ात को सौहार्दपूर्ण बताया गया है; यह उस नींव पर आधारित है जो उन्होंने पिछली बातचीत के दौरान रखी थी।

➤ मुख्य अड़चनें: लेबनान में युद्धविराम + स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ ।

➤ ईरान होर्मुज़ पर अपनी संप्रभुता और नियंत्रण को औपचारिक रूप देने पर ज़ोर दे रहा है।

➤ वह चाहता है कि समझौते को लागू करने की व्यवस्था में चीन और रूस भी शामिल हों।

➤ वह पहले से तय ओमान/जिनेवा परमाणु ढांचे को स्वीकार करने को तैयार है, लेकिन मिसाइलों पर किसी भी तरह की पाबंदी को खारिज करता है।

➤ ईरान चाहता है कि युद्ध पूरी तरह से समाप्त हो जाए + US के साथ एक शांति संधि हो जिसे US कांग्रेस और ईरानी शूरा परिषद द्वारा अनुमोदित किया जाए + शत्रुता की समाप्ति को UN सुरक्षा परिषद में दस्तावेज़ के रूप में दर्ज किया जाए + और सभी प्रतिबंधों को तत्काल हटा दिया जाए।

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