कफील खान मामले में CM योगी को 'सुप्रीम' झटका, अल्पसंख्यक कांग्रेस चेयरमैन ने कोर्ट के फैसले को बताया सरकार की बेइज्जती
काफील खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई योगी सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के इस मामले में दखल ना देने के फैसले को अल्पसंख्यक कांग्रेस चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की बेइज़्ज़ती बताई है।

उत्तर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। काफील खान के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई योगी सरकार की याचिका खारीज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी गयी चुनौती को खारिज करने को लेकर अल्पसंख्यक कांग्रेस चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुख्यमंत्री योगी की बेइज़्ज़ती बताई है।
प्रेस विज्ञप्ति में शाहनवाज़ आलम ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे का यह कह कर याचिका खारिज करना की इलाहाबाद 'हाई कोर्ट ने अच्छ फैसला सुनाया था, उसमें हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता' कुंठित व्यक्तित्व वाले मुख्यमंत्री की सुप्रीम बेइज़्ज़ती है। यह उनके कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाता है कि हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बावजूद तथ्यों को तोड़मरोड़ कर अदालत को गुमराह करने वाले अलीगढ़ के तत्कालीन डीएम को अब तक उन्होंने निलंबित क्यों नहीं किया।
शाहनवाज़ आलम ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अगर मुख्यमंत्री जी में थोड़ी भी लाज शर्म बची हो तो उन्हें डॉ कफ़ील खान और उनके पूरे परिवार से माफ़ी मांग लेनी चाहिए। आपको बता दें, डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग लेकर योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसएस बोबड़े ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के डॉ. कफील को मुक्त किए जाने के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा, ‘आपराधिक केस उसके नेचर के हिसाब से बनेगा। आप किसी और केस के नाम पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकते।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने अच्छा आदेश दिया है। इस आदेश में दखल देने की कोई वजह नहीं है।
गौरतलब है कि सीएए के खिलाफ बोलने पर उनके खिलाफ नैशनल सिक्यॉरिटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ. खान पर से NSA को हटाने और रिहा करने का आदेश दिया था। 1 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एनएसए के तहत कफील खान की हिरासत को खत्म कर दिया था। इसी के खिलाफ यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया लेकिन निराशा हाथ लगी।
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Published: 17 Dec 2020, 3:35 PM
