सुप्रीम कोर्ट के वकीलों ने CJP प्रदर्शन के दौरान छात्रों और वकीलों पर पुलिस बर्बरता की निंदा की, जांच की मांग की
एससीबीए ने प्रस्ताव में कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और बार के सदस्यों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा और असंतुलित बल का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। लोकतांत्रिक समाज में यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। हम निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) ने सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों और वकीलों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निंदा की है और घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है।
एससीबीए के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह के नेतृत्व में पारित प्रस्ताव में कहा गया कि पुलिस कार्रवाई में कई छात्र और एसोसिएशन के सदस्यों समेत वकील घायल हुए। एससीबीए ने प्रस्ताव में छात्रों और वकीलों पर कथित 'निर्दयी लाठीचार्ज' की आलोचना करते हुए घटना की तत्काल, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की। साथ ही घायलों को उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की भी अपील की।
एससीबीए की सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा जारी प्रस्ताव में कहा गया है, “शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और बार के सदस्यों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा और असंतुलित बल का इस्तेमाल बेहद चिंताजनक है। लोकतांत्रिक समाज में यह बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। हम पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और घायलों के समुचित इलाज की मांग करते हैं।”
वहीं, एससीएओआरए ने अपने बयान में कहा कि शांतिपूर्ण विरोध संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) और 19(1)(ख) के तहत संरक्षित अधिकार है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण सभा पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध वैधता, आवश्यकता और अनुपातिकता की संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरना चाहिए और कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।
सोमवार को हजारों छात्रों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक मामले और परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और जमकर लाठीचार्ज किया। इस दौरान पुलिस की बर्बरतापूर्वक कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए।
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