बंगाल SIR: सुप्रीम कोर्ट सख्त, ERO और AERO को 26 फरवरी तक दस्तावेज सौंपने का निर्देश
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने ईआरओ और एईआरओ को 15 फरवरी तक जमा दस्तावेज 26 फरवरी शाम 5 बजे तक न्यायिक अधिकारियों को सौंपने का आदेश दिया है।

पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े मामले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी ईआरओ और एईआरओ को निर्देश दिया कि 15 फरवरी तक जो भी दस्तावेज मतदाताओं ने अपने दावों के समर्थन में दिए थे, और जो 24 फरवरी तक अपलोड नहीं हुए हैं वो सभी दस्तावेज 26 फरवरी शाम पांच बजे तक एसआईआर प्रक्रिया में तैनात किए गए जजों को सौंपे।
इससे पहले मंगलवार को दिए गए आदेश में कोर्ट ने 14 फरवरी तक लिखित या डिजिटल रूप में जमा हुए दस्तावेजों को ही स्वीकार करने की बात कही थी। लेकिन कोर्ट ने बुधवार को साफ किया है कि जो दस्तावेज 14 फरवरी तक ईआरओ और एईआरओ को मिल चुके थे, लेकिन 24 फरवरी को आदेश होने तक चुनाव आयोग के पोर्टल पर अपलोड नहीं हुए थे, वह भी न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिए जाएं।
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े विवाद में निर्देश दिया था कि राज्य में तार्किक विसंगति और अनमैप्ड श्रेणी के मामलों में लाखों आवेदनों का निपटारा करने के लिए न्यायिक अधिकारियों को लगाया है। कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के पहले के आदेश के अनुसार जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश स्तर के लगभग 250 न्यायिक अधिकारी इस सत्यापन कार्य में लगे हुए हैं। लेकिन, इतनी बड़ी संख्या में आवेदनों के सामने यह संख्या काफी कम साबित हो रही है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने और तेजी लाने के लिए सिविल न्यायाधीशों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, झारखंड उच्च न्यायालय और उड़ीसा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों से भी अतिरिक्त न्यायिक अधिकारियों की मांग की जा सकती है। कोर्ट ने जोर दिया कि यह काम युद्ध स्तर पर पूरा किया जाना चाहिए, ताकि समय पर मतदाता सूची तैयार हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी व्यवस्था की थी कि यदि 28 फरवरी 2026 तक तार्किक विसंगति या अनमैप्ड श्रेणी के सभी मामलों का सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है, तो निर्वाचन आयोग अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने के बाद पूरक सूची जारी कर सकता है।
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