गोवा: पर्रिकर सरकार का ‘खनन खेल’ उजागर, सुप्रीम कोर्ट ने 88 खनन पट्टों को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के 88 खनन पट्टों को रद्द कर दिया है। सरकार ने उन्हीं कंपनियों को खनन पट्टा दिया था, जिनपर शाह आयोग ने 2012 में अवैध खनन का आरोप लगाते हुए करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर किया था।

फोटो: सोशल मीडिया
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आईएएनएस

सुप्रीम कोर्ट ने गोवा के 88 खनन पट्टों को रद्द कर दिया है। इन पट्टों को खान और खनिज अधिनियम के तहत खनन पट्टों के लिए नीलामी अनिवार्य किए जाने से ठीक पहले राज्य सरकार ने 2015 में नवीनीकृत किया था। साल 2007 से 20 साल के लिए नवीनीकृत किए गए पट्टों को रद्द करते हुए न्यायमूर्ति मदन बी. लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा कि गोवा सरकार कानून के अनुसार नए सिरे से आवेदनों की जांच करेगी।

खनन पट्टों के नवीनीकरण में की गई जल्दबाजी और अनियमितता को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि लोहा और मैंगनीज खदानों समेत सभी खनन गतिविधियों पर गोवा में 15 मार्च तक रोक रहेगी। अदालत का यह फैसला एक गैरसरकारी संगठन की याचिका पर आया है। इस याचिका में राज्य सरकार द्वारा खनन पट्टों के नवीनीकरण को चुनौती दी गई थी।

खनन पट्टे को रद्द किए जाने के बाद आम आदमी पार्टी ने प्रदेश की बीजेपी सरकार पर पट्टे के नवीनीकरण में घोटाला करने का आरोप लगाया है। पार्टी के प्रदेश संयोजक एल्विस गोम्स ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि 2014-15 में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार ने उन्हीं खनन कंपनियों के पक्ष में खनन पट्टों का नवीनीकरण किया, जिनपर शाह अयोग ने अवैध खनन का आरोप लगाया था और 2012 में 35,000 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। उन्होंने कहा कि पट्टा नवीनीकरण का यह घोटाला उससे भी बड़ा है।

एल्विस गोम्स ने कहा, “न्यायमूर्ति बीएम शाह आयोग ने 35,000 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर किया था। उसपर सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की और पट्टे के लिए नीलामी को अनिवार्य करने के केंद्रीय कानून के लागू होने से ठीक पहले जल्दबाजी में 88 खदानों के पट्टों का नवीनीकरण उन्हीं कंपनियों के नाम 2014-15 में कर दिया गया, जिनपर शाह आयोग ने अवैध खनन का आरोप लगाया था।"

उन्होंने कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए कि किस प्रकार पट्टों का नवीनीकरण किया गया। शाह आयोग द्वारा 2012 में 35,000 करोड़ रुपये का घोटाला प्रकाश में लाने के पूर्व गोवा निम्न दर्जे के लौह-अयस्क के निर्यात में अग्रणी था और यहां से पांच करोड़ रुपये का लौह अयस्क का निर्यात होता था। आयोग ने इस घोटाले में प्रमुख खनन कंपनियों और गोवा की तत्कालीन सरकार के मुख्यमंत्री दिगंबर कामत और प्रमुख नौकरसाहों की संलिप्तता उजागर की थी।

इसके बाद 2012 में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रदेश में लौह-अयस्क के खनन पर रोक लगा दी थी। और अब सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में मौजूदा सभी लौह अयस्क पट्टे को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि हाल में पर्यावरण मंजूरी प्राप्त लाइसेंसधारियों को बोली के जरिए पट्टे दिए जाएं।

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