‘हैशटैग मीटू’ के तहत अकबर पर लगे आरोपों पर सुषमा की चुप्पी, लेकिन मेनका ने कहा जांच तो होनी चाहिए

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री मेनका गांधी ने हैशटैग मी टू मामले में सबसे पहले चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि ऐसेआरोपों की जांच होनी चाहिए। लेकिन विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर पर लगे आरोपों के बारे में प्रतिक्रिया मांगने पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चुप्पी साध ली।

नवजीवन डेस्क

केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर पर हैशटैग मी टू के तहत एक महिला पत्रकार द्वारा यौन शोषण के आरोप लगने के बाद सरकार ने चुप्पी साध रखी है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज खुद एक महिला हैं। लेकिन जब उनसे एम जे अकबर पर लगे आरोपों के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने चुप्पी साध ली।

सुषमा स्वराज से पत्रकारों ने साफ पूछा कि एम जे अकबर पर आरोपों को लेकर आपकी क्या प्रतिक्रिया है, लेकिन उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।

लेकिन मेनका गांधी ने इस मामले पर चुप्पी तोड़ी है और वह मीटू मुद्दे पर बोलने वाली पहली मंत्री बन गई है। केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी कहा है कि, “इस मामले की जांच होनी चाहिए। सत्ता में बैठे पुरुष कई बार ऐसे कृत्यों में शामिल होते हैं।” एक न्यूज चैनल से बातचीत में मेनका गांधी ने कहा कि, “अब जबकि महिलाओं ने इस मुद्दे पर साहस दिखाया है तो आरोपों को गंभीरता से लेना चाहिए।”

मेनका गांधी ने इस मुद्दे पर बस एम जे अकबर का इस्तीफा नहीं मांगा, लेकिन कहा कि, “वह अब भी अपने इस पुराने रुख पर कायम हैं कि हर किस्म के यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के मामले जब भी सामने आएं तो उनकी जांच होनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मामला कितना पुराना या नया है।

मेनका गांधी ने बताया कि, “मैंने इस मामले में कानून मंत्रालय को लिखा है कि यौन उत्पीड़न के मामलों में समय सीमा की बाध्यता को खत्म किया जाना चाहिए।”

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Published: 9 Oct 2018, 1:00 PM
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