बीजेपी में शामिल होते ही लताड़ से हुआ नरेश अग्रवाल का स्वागत, जया बच्चन पर दिए बयान के लिए सुषमा ने फटकारा

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य सभा सांसद नरेश अग्रवाल ने 12 मार्च की शाम बीेजेपी का दामन थामते ही अपना खाता एक विवादित बयान से खोला, जिसपर सुषमा स्वराज ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई।

फोटोः सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

कल तक समाजवादी पार्टी (एसपी) के ताकतवर नेता रहे नरेश अग्रवाल ने बीजेपी का दामन थामते ही अभद्रता की सीमा लांघ दी। उन्होंने फिल्म अभिनेत्री और राज्यसभा सांसद जया बच्चन के लिए कहा, “फिल्मों में काम करने वाली से मेरी हैसियत कर दी गई, उनके नाम पर हमारा टिकट काटा गया। मैंने इसको भी बहुत उचित नहीं समझा। मैं बीजेपी में कोई शर्त पर नहीं आया। कोई राज्यसभा टिकट की मांग नहीं है।”

हालांकि उनके ऐसा बोलते ही बीजेपी की वरिष्ठ नेता और देश की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उन्हें मर्यादा की याद दिला दी। उन्होंने लताड़ लगाते हुए ट्वीट किया, “श्री नरेश अग्रवाल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं। उनका स्वागत है। लेकिन जया बच्चन जी के विषय में उनकी टिप्पणी अनुचित एवं अस्वीकार्य है।”

लेकिन यहां नरेश अग्रवाल से दो सवाल बनते हैं और एक तीसरा सवाल भी। अगर आप बीजेपी में राज्यसभा के टिकट या किसी ऐसे पद के लिए नहीं आए हैं तो एसपी को छोड़ने की जरूरत ही क्या थी? आप भी सांसद थे और जया बच्चन भी सांसद थीं। पार्टी ने जया बच्चन को चौथी बार अपना उम्मीदवार चुना। आप तो सिर्फ दो ही बार राज्यसभा सांसद रहे हैं। विधानसभा में एसपी को इतनी कम सीटें आईं कि आप दोनों में कोई एक ही फिर से राज्यसभा जा सकता था। पार्टी की ऐसी कमजोर और दुविधापूर्ण स्थिति में आपको तो पार्टी के साथ खड़ा होना चाहिए था। लेकिन आप एसपी को और कमजोर कर बीजेपी में चले गए। क्या इससे आपकी हैसियत बढ़ गई?

फोटोः सोशल मीडिया
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पीयूष गोयल के साथ नरेश अग्रवाल

इसी से दूसरा सवाल यह है कि फिल्मों में काम करने वाली से क्या आपकी हैसियत ज्यादा है? आपको ऐसा तो नहीं लगता कि फिल्मों में काम करना कम हैसियत का बात है? वैसे तो इस तथ्य के पक्ष में कोई आंकड़ा देना संभव नहीं, लेकिन, नरेश जी, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जितने लोग राजनीति में जाना चाहते हैं उससे कई गुना ज्यादा लोग फिल्मों में काम करना चाहते हैं। अगर जरूरत हो तो किसी युवा को दो विकल्प देकर देख लें। चाहें तो अपने जैसे किसी बुजुर्ग भी पूछ सकते हैं।

आप राजनीति में नए नहीं हैं नरेश जी। लंबा अनुभव है आपके पास। सदन में बैठने का और सत्ता सुख भोगने का। 7 बार विधायक, 4 बार मंत्री और 1 बार संसद सदस्य। फिर भी कल तक जिस बीजेपी के आप तीखे आलोचक थे, उसी बीजेपी में एक दोयम दर्जा स्वीकार कर लिया आपने? सिर्फ एक और बार की राज्यसभा सदस्यता के लिए? अच्छा, उसके लिए भी नहीं। तो फिर इतना बड़ा राजनीतिक कैरियर यूं ही जाने दिया?

और बात राजनीति की हो रही है तो तीसरा और आखिरी सवाल। क्या आप जया बच्चन को जानते हैं, नरेश जी? वे एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री होने के अलावा अमिताभ बच्चन की पत्नी हैं? क्या आप अमिताभ बच्चन को जानते हैं, नरेश जी? चलिए, उनके बारे में कुछ और नहीं तो इतना तो जानते ही होंगे कि वे आपकी नई पार्टी के नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चहेते हैं। राजनीति के माहिर खिलाड़ी होने के बावजूद इतनी सी राजनीति आपके पल्ले नहीं पड़ी और बेकार ही आपको सुषमा स्वराज से डांट सुननी पड़ी। कुछ याद आया, नरेश जी!

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