बॉम्बे हाई कोर्ट ने वायु प्रदूषण पर अधिकारियों को फटकार लगाई, कहा- आप दूसरी दुनिया में नहीं रह रहे?

हाई कोर्ट ने कहा कि नगर निकाय के अधिकारी भी मुंबई में हर किसी की तरह उसी हवा में सांस ले रहे हैं। पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘आप किसी अलग दुनिया में नहीं रह रहे हैं। हम सब एक ही हवा में सांस ले रहे हैं।’’

फोटो: सोशल मीडिया
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नवजीवन डेस्क

बॉम्बे हाई कोर्ट ने वायु प्रदूषण को कम करने के उपाय संबंधी उसके आदेशों की ‘जानबूझकर अवहेलना’ पर शुक्रवार को नगर निकाय के अधिकारियों को फटकार लगाई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारी भी उसी अशुद्ध हवा में सांस ले रहे हैं और वे किसी ‘अलग दुनिया’’ में नहीं रह रहे हैं। अदालत ने उनका वेतन रोकने की चेतावनी भी दी।

कोर्ट ने कहा कि अगर उन्होंने लगातार जारी किए गए आदेशों का पालन नहीं किया, तो उनके वेतन रोक दिए जाएंगे। अदालत ने कहा कि पिछले साल 2023 में खुद ही (सुओ मोटु) प्रदूषण बढ़ने के मामले में कदम उठाए थे और नगर निगमों को निर्देश दिए थे कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं।


मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ ने अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने चेतावनी दी है। हाई कोर्ट ने कहा कि वायु प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से बार-बार जारी किए गए उसके आदेशों की ‘‘जानबूझकर अवहेलना’’ की गई है। इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।


हाई कोर्ट ने कहा कि नगर निकाय के अधिकारी भी मुंबई में हर किसी की तरह उसी हवा में सांस ले रहे हैं। पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘आप किसी अलग दुनिया में नहीं रह रहे हैं। हम सब एक ही हवा में सांस ले रहे हैं।’’

हाई कोर्ट ने 2023 में वायु प्रदूषण का स्वतः संज्ञान लिया था और वायु प्रदूषण पर काबू के लिए महानगरपालिकाओं और अन्य प्राधिकारियों को कई निर्देश जारी किए थे।

मुंबई में वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए स्थिति प्रस्तुत की और बताया कि वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ रहा है और सांस संबंधी मरीजों के मामलों में 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और लगातार लोग इसकी शिकायत कर रहे हैं। आरोप है कि कई सार्वजनिक स्थानों के आसपास कूड़े के ढेर और नालियों की सफाई न होने से बीमारियों में वृद्धि हो रही है। हवा की क्वालिटी खराब होने से दमा जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं।

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